नई दिल्ली, मई 24। देश की सबसे बड़ी और सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने मंगलवार को कहा कि उसका बोर्ड डिविडेंड पर विचार करेगा। कंपनी का बोर्ड 30 मई सोमवार को कंपनी के लिस्टिंग के बाद पहले तिमाही परिणामों का खुलासा करेगी और उसी बैठक में डिविडेंड पर विचार किया जाएगा। बता दें कि जिन लोगों को कंपनी के आईपीओ से फायदा नहीं हुआ, उनके लिए यह कमाई का मौका होगा।
क्या होता है डिविडेंड (लाभांश)
लाभांश किसी कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को मुनाफे का वितरण होता है। जब कोई कंपनी लाभ या सरप्लस कमाती है, तो वह शेयरधारकों को लाभांश के रूप में लाभ के अनुपात का भुगतान करती है। जो मुनाफे की राशि निवेशकों को नहीं बांटी जाती, उसे बिजनेस में रीइंवेस्ट करने के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है।
डिविडेंड का भुगतान
बीएसई को दी गयी एक जानकारी में एलआईसी ने कहा है कि वह 31 मार्च 2022 को समाप्त तिमाही और वर्ष (2021-22) के लिए ऑडिटेड वित्तीय परिणामों पर चर्चा और अप्रूव करेगी। साथ ही लाभांश का भुगतान, यदि कोई हो, पर विचार और पास किय जाएगा। इस लिहाज से 31 मार्च, 2022 को समाप्त तिमाही / वर्ष के लिए वित्तीय परिणामों पर विचार और अप्रूव के लिए बोर्ड की बैठक के 48 घंटे बाद तक कंपनी के शेयरों में लेनदेन के लिए ट्रेडिंग विंडो 17 मई, 2022 से बंद है।
कितने पर है शेयर
मंगलवार को बीएसई पर कंपनी का शेयर करीब 1.5 फीसदी की तेजी के साथ 829.85 रुपये पर कारोबार कर रहा है। इस कीमत पर ये स्टॉक अपने इश्यू प्राइस 949 रुपये से 12.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।
कितनी है मार्केट कैपिटल
कंपनी की मार्केट कैप 5,24,626.93 करोड़ रुपये है, जिसमें फ्री फ्लोट एम-कैप सिर्फ 15,730 करोड़ रुपये है। 4 मई से 9 मई तक चले आईपीओ के 20,557 करोड़ रुपये के आईपीओ को 2.95 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। यह शेयर 17 मई को इश्यू प्राइस से लगभग 9 प्रतिशत छूट पर लिस्ट हुआ।
कितना है आगे शेयर के लिए टार्गेट
भले ही एलआईसी का शेयर कमजोरी के साथ लिस्ट हुआ, मगर फिर भी आगे इसके ऊपर जाने की संभावना है। लिस्टिंग के दिन मैक्वेरी ने इसके लिए 'न्यूट्रल' रेटिंग जारी की थी। इस विदेशी ब्रोकरेज ने एलआईसी के लिए 1,000 रुपये का टार्गेट सुझाया, जो 949 रुपये के इश्यू प्राइस पर 5.37 प्रतिशत की वृद्धि का संकेत देता है। एलआईसी एक भारतीय वैधानिक बीमा और निवेश कंपनी है जिसका मुख्यालय भारत के मुंबई शहर में है। यह भारत सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है। भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना 1 सितंबर 1956 को हुई, जब भारत की संसद ने भारतीय जीवन बीमा अधिनियम पारित किया जिसने भारत में बीमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया। भारतीय जीवन बीमा निगम बनाने के लिए 245 से अधिक बीमा कंपनियों और प्रोविडेंट सोसायटियों का विलय कर दिया गया था।
आईपीओ रहा कमजोर
इसके आईपीओ को 2.95 गुना ओवरसब्सक्राइब किया गया था। ये दिखने में तो ठीक है। पर एलआईसी जैसे बड़े नाम के मुकाबले यह काफी कम रहा। आईपीओ में 16.2 करोड़ इक्विटी शेयर रखे गए थे, जिसके मुकाबले 47.83 करोड़ इक्विटी शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुई हैं। पॉलिसीधारकों के लिए अलग रखे गए हिस्से को 6.11 गुना, कर्मचारियों के आवंटित कोटे को 4.39 गुना और खुदरा निवेशकों के आरक्षित शेयरों के लिए 1.99 गुना आवेदन मिले।
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