निवेश की जब बात आती है, सब से पहले प्राथमिकता सुरक्षित निवेश होता है। निवेश करने वाले को यह लगता है कि उस का पैसा सुरक्षित रहे। ऐसे निवेशकों के लिए एफडी और आरडी निवेश के सब से सुरक्षित तरीके हैं।
नई दिल्ली: निवेश की जब बात आती है, सब से पहले प्राथमिकता सुरक्षित निवेश होता है। निवेश करने वाले को यह लगता है कि उस का पैसा सुरक्षित रहे। ऐसे निवेशकों के लिए एफडी यानी फिक्स्ड डिपौजिट और आरडी यानी रिकरिंग डिपौजिट निवेश के सब से सुरक्षित तरीके हैं। इंटरनेट बैंकिंग के जरिये बैंकिंग सेवाएं आसान हुई हैं। अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने बैंक अकाउंट को ऑपरेट कर सकते हैं। आप अपने बैंक अकाउंट से आसानी से अपने बिल का भुगतान या पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। इससे आपके समय की भी बचत होती है। इतना ही नहीं इंटरनेट बैंकिंग के जरिये कोई भी व्यक्ति घर बैठे ऑनलाइन फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट और रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट खोल सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का नेट बैंकिंग है तो कैसे घर बैठे ऑनलाइन एफडी और आरडी अकाउंट खोल सकते हैं। PPF अकाउंट मैच्योर होने वाला है, तो इन बातों का रखें ध्यान ये भी पढ़ें
जानें नेट बैंकिंग से एफडी अकाउंट खोलने का तरीका
- ऑनलाइन एफडी खोलने के लिये सबसे पहले आपको बैंक की आधिकारिक वेबसाइट www.onlinesbi.com पर जाकर नेट बैंकिंग में लॉग इन करना होगा। उसके बाद होमपेज पर जाकर डिपॉजिट स्कीम्स के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा और फिर टर्म डिपॉजिट पर जाना है। उसके बाद ई फिक्स्ड डिपॉजिट पर क्लिक करना है।
- इसके बाद एफडी को चुनकर ‘Proceed' पर क्लिक करें।
- अगर आपके पास एक से ज्यादा अकाउंट हैं, तो उस अकाउंट को चुनें, जिससे पैसे जमा करने हैं।
- इसके साथ ही एफडी की प्रिंसिपल अमाउंट को चुनें और अमाउंट के बॉक्स में भरें।
- ध्यान इस बात का रखें कि अगर आपकी उम्र 60 साल से ज्यादा है, तो सीनियर सिटीजन के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।
- एसटीडीआर डिपॉजिट या टीडीआर डिपॉजिट में से एक चुनें और अपनी मेच्योरिटी पीरियड को सेलेक्ट करें।
- इसके साथ ही अपनी इंटरनेट पे फ्रिक्वेंसी को भी चुनें।
- मेच्योरिटी के दिशानिर्देशों को भी चुनें और नियम व शर्तों को पढ़ने के बाद उन पर टिक कर दें।
- अंत में सबमिट पर क्लिक करें और आपका एफडी अकाउंट खुल जाएगा।
जानिए ऑनलाइन आरडी अकाउंट खोलने का तरीका
- नेट बैंकिंग में लॉग इन करने के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट के अंदर e -RD (RD) / e- SBI Flexi डिपॉजिट ऑप्शन पर क्लिक करें।
- अगर बैंक में आपके एक से ज्यादा अकाउंट हैं, तो सभी दिखेंगे। उस अकाउंट को चुनें जिसे आप आरडी अकाउंट से लिंक करना चाहते हैं।
- फिर अपनी मासिक किश्त की राशि और टेन्योर की राशि को चुनना है।
- टेन्योर आपकी ब्याज दर को तय करेगा।
- सिनियर सिटीजन को कुछ अतिरिक्त ब्याज दर भी मिल सकती है। अगर आप सीनियर सिटीजन में आते हैं, तो उस ऑप्शन को चुनें।
- फिर इस बात को चुनना होगा कि आपको मेच्योरिटी अमाउंट को सेविंग्स अकाउंट में लेना है या मेच्योरिटी अमाउंट को फिक्स्ड डिपॉजिट में बदल लें।
- फिर नियम व शर्तों को पढ़कर सब्मिट कर दें।
- अगले पेज पर नाम, नॉमिनेशन आपके लिंक सेविंग्स अकाउंट के मुताबिक दिखेगा।
- फिर कन्फर्म पर क्लिक करने के बाद, आरडी अकाउंट बन जाएगा और एक रेफरेंस नंबर और ई-आरडी अकाउंट नंबर जनरेट होगा।
- आप अपनी ई-आरडी की डिटेल्स को देखकर उसे डाउनलोड कर सकते हैं या प्रिंट भी लेकर रख सकते हैं।
- इसके अलावा अगर आप स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन (एसआई) रखना चाहते हैं, तो ऑनलाइन कर सकते हैं।
क्या है आरडी और एफडी में फर्क
- रेकरिंग डिपॉजिट की अवधि लगभग 6 महीने से लेकर 10 महीने तक की होती हैं जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि 7 दिन से लेकर 10 साल तक होती हैं।
- एफडी और आरडी अकाउंट खोलने के लिए दोनों में डाक्यूमेंट्स के तौर पर पहचान पत्र तथा निवास प्रमाण देने की आवश्यकता होती हैं जैसे -पैन कार्ड, पासपोर्ट, तथा इनकम डॉक्यूमेंट आदि।
- ज्यादा एफडी करने से हिसाब रखना मुश्किल होता है और इंटरेस्ट रेट लॉक हो जाता है।
- इतना ही नहीं आरडी में टैक्स बैनेफिट नहीं मिलता है और 10,000 रुपये से ज्यादा आय पर टीडीएस कटता है। इसमें ब्याज दर लंबे वक्त तक एक समान रहती है।
- हालांकि आरडी ओपनिंग दो तरह से की जा सकती है।
- एक तरीका तो है कि खुद बैंक जाकर आरडी खोली जाए और दूसरे ऑनलाइन भी आरडी खोली जा सकती है।
- आरडी हमेशा सरकारी बैंक में ही करवानी चाहिए और अब आप मोबाइल एप से भी आरडी खुलवा सकते हैं।
- रेकरिंग डिपॉजिट निवेशक की सेविंग पर निर्भर करता है और हर महीने एक निश्चित रकम का निवेश इसमें कर सकते हैं।
- रेकरिंग डिपॉजिट से सेविंग मैनेजमेंट आसान होता है और बार बार फिक्स डिपॉजिट के झंझट से मुक्ति मिल जाती है।
- इसके जरिए रीइन्वेस्टमेंट के पचड़ों से भी मुक्ति मिल जाती है और निवेश और ब्याज का हिसाब-किताब आसान हो जाता है।
- रेकरिंग डिपॉजिट निवेशकों के लिए सही विकल्प है।
- आरडी में हर महीने एक निश्चित रकम जमा करने की सुविधा मिलती है और इस आय पर एक निश्चित ब्याज मिलता है।
- ये लंबे वक्त तक जारी रख सकते हैं और इसमें खाता खोलते वक्त अवधि तय हो जाती है। अवधि खत्म होने पर ब्याज समेत भुगतान मिल जाता है।
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