इंश्योरेंस और इनवेस्टमेंट में क्या अंतर है, जानना बेहद जरूरी

आज के समय में हर कोई अपनी रकम को इंश्योरेंस में बेहतर न‍िवेश के ख्‍याल से डालता है। जबकि इंश्योरेंस प्‍लान लेने समय कस्‍टमर का एक मात्र उद्देश्य इंश्योरेंस होना चाह‍िए ना क‍ि न‍िवेश।

नई द‍िल्‍ली: आज के समय में हर कोई अपनी रकम को इंश्योरेंस में बेहतर न‍िवेश के ख्‍याल से डालता है। जबकि इंश्योरेंस प्‍लान लेने समय कस्‍टमर का एक मात्र उद्देश्य इंश्योरेंस होना चाह‍िए ना क‍ि न‍िवेश। देश में करीब 90 फीसदी लोग इंश्योरेंस के नाम पर या तो मनी बैक पॉलिसी या एंडोमेंट, या फिर यूलिप ले लेते हैं। वहीं देखा जाएं तो जानकारों का कहना है कि इससे ना तो इंश्योरेंस का लक्ष्य पूरा हो पाता है और ना ही सही निवेश हो पाता है। सही मायने में इंश्योरेंस का काम टर्म पॉलिसी ही करता है। टर्म पॉलिसी से कम प्रीमियम में एक बड़ी राशि का बीमा हो जाता है। आज हम आपको बताएंगे क‍ि आपके लिए इंश्योरेंस कितना जरूरी है और कौन सी पॉलिसी आपके लिए बेहतर है। फ‍िलहाल आपने देखा होगा बाजार में इस समय कई तरह के इंश्योरेंस प्लान उपलब्ध हैं। इनमें टर्म इंश्योरेंस, एंडोमेंट प्लान, यूएलआईपी, मनी बैक लाइफ इंश्योरेंस, पेंशन प्लान और चाइल्ड इंश्योरेंस प्रमुख हैं।

ट्रेड‍िशनल इंश्‍योरेंस में ज्‍यादा मैच्योरिटी बेन‍िफ‍िट

ट्रेड‍िशनल इंश्‍योरेंस में ज्‍यादा मैच्योरिटी बेन‍िफ‍िट

एंडोमेंट प्लान
प्रीमियम ज्यादा, बीमा की रकम कम
निश्चित टर्म के बाद एक मुश्त रकम मिलेगी
सालाना 4 फीसदी के आसपास रिटर्न

मनी बैक लाइफ इंश्योरेंस
तय पीरियड पर मनी बैक का विकल्प
मैच्योरिटी पर भी एक मुश्त रकम मिलेगी
सालाना 4 फीसदी के आसपास रिटर्न
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान

मार्केट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान है यूएलआईपी
प्रीमियम का कुछ हिस्सा जाता है लाइफ इंश्योरेंस में
प्रीमियम का बड़ा हिस्सा शेयर बाज़ार में निवेश करता है
इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करने का ऑप्शन
मंथली या सालाना आधार पर भर सकते हैं प्रीमियम

 

टर्म इंश्योरेंस में मैच्योरिटी पर कम फायदा

टर्म इंश्योरेंस में मैच्योरिटी पर कम फायदा

टर्म इंश्‍योरेंस को लेकर लोगों में जागरूकता का अभाव है। साथ ही मैच्योरिटी पर फायदे कम होने से भी इसकी ओर लोगों का रुझान कम रहता है। वहीं जीवन बीमा पॉलिसी से मैच्योर होने के बाद कुछ रकम मिलती है, जबकि परंपरागत टर्म इंश्‍योरेंस से कोई रकम नहीं मिलती है। हालांकि अब मार्केट में ऐसे भी टर्म प्लान मौजूद हैं, जो कवर लेने वाले को मैच्योरिटी पर कुल प्रीमियम की राशि लौटा देते हैं। यानि अगर आपने टर्म प्लान लिया है और कवर अवधि के दौरान आपको कुछ भी नहीं हुआ तो कंपनी आपसे ली हुई कुल प्रीमियम की राशि आपको लौटा देगी। इस तरह के टर्म प्लान को टर्म इंश्योरेंस प्लान विद रिटर्न ऑफ प्रीमियम (टीआरओपी) कहा जाता है। इस तरह के प्लान का प्रीमियम थोड़ा अधिक होता है। बीमा लेने वाले व्यक्ति की पॉलिसी के दौरान अचानक मृत्यु हो जाती है और अगर नॉमिनी मिलने वाले लाभ को एकमुश्त लेना नहीं चाहता है तो वह इसको मासिक आधार पर ले सकता है। वहीं अगर नॉमिनी चाहता है कि वह एक साथ राशि ले तो वह ऐसा बाद में भी कर सकता है।

जान‍िए कितना होना चाह‍िए कवर

जान‍िए कितना होना चाह‍िए कवर

टर्म प्लान लेने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपको कम प्रीमियम में बड़ा कवर देता है। आप 1 करोड़ रुपए का कवर बहुत ही कम प्रीमियम पर ले सकते हैं। ऐसा इसलिए है कि टर्म प्लान पूरी तरह से रिस्क प्लान होता है। इसलिए जो लोग कम प्रीमियम में बड़ा कवर लेना चाहते हैं, उनके लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है. इसके साथ ही आप पॉलिसी टर्म के दौरान अपने कवर को चाहें तो बढ़ा भी सकते हैं। एक 35 साल के आदमी को 30 साल के लिए 1 करोड़ रुपये के कवर पर 12 से लेकर 15 हजार रुपए के बीच या आसपास देना पड़ सकता है। अगर आपकी उम्र 40 साल से कम है तो एश्‍योर्ड रकम आपकी सालाना आय की 15 गुना होनी चाहिए और अगर आपकी उम्र 40 से 45 साल के बीच है तो यह राशि आपकी सालाना आय की 10 गुना होनी चाहिए।

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