लॉकडाउन के चलते इन दिनों देश व दुनिया के सर्राफा बाजार प्रभावित हो रहे हैं। कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है। इतना ही नहीं इस वजह से आर्थिक स्थित पर असर पड़ रहा है।
नई दिल्ली: लॉकडाउन के चलते इन दिनों देश व दुनिया के सर्राफा बाजार प्रभावित हो रहे हैं। कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है। इतना ही नहीं इस वजह से आर्थिक स्थित पर असर पड़ रहा है। इन दिनों सोने के भाव में लगातार चमक दिखाई दे रही है। बीते सोमवार को एमसीएक्स में सोने का वायदा बाजार में जून 2020 की डिलीवरी के लिए 46,286 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ। यह अब तक अपने स्तर से 1,000 रुपये अधिक है। हाल ही में सोने का भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।
भारत में सोने के भाव में उछाल
वहीं बीते दिनों वायदा बाजार में जून डिलीवरी वाला सोना 0.75 फीसदी या 344 रुपये उछलकर पहली बार सोना 46,640 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसी तरह से घरेलू बाजार में चांदी मई वायदा का भाव भी 1.4 फीसदी या 610 रुपये उछलकर 44, 360 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। भारत में सोने के भाव में उछाल देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उछाल आने से भारत में भी तेजी देखने को मिलती है। एक्सपर्ट अनुमान जता रहे हैं कि अगर इस साल शार्ट टर्म में 1700 डॉलर से ऊपर और साल के आखिरी में 1,500 डॉलर प्रति औंस से नीचे तक गिरता है तो यह एक नया रिकार्ड होगा। अगर इक्विटी मार्केट इस संकट से उबरते हैं तो सोने की कीमत में कुछ गिरवाट देखने को मिल सकती है। मौजूदा समय में साफ तौर पर देखने को मिल रह है कि कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से फैल रहा है साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ रहा है। ऐसे में सोने की कीमत एक बड़ा फैक्टर होगी।
निवेशक बेचने के लिए मजबूर
किसी भी राजनीतिक और आर्थिक रूप से अनिश्चतताओं के बीच निवेशकों के लिए धातुएं सुरक्षित ठिकाना होती हैं। यह महंगाई और अपस्फीति से बचने का बहुत बड़ा उपाय है। इसकी वजह ये है कि सोना किसी भी सरकार या करेंसी से जुड़ा नहीं होता है। और न ही इसका इंडस्ट्री में उपयोग किया जाता है। मौजूदा हालात में कोरोना वायरस के चलते शेयर मार्केट में भी उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इसके चलते बाजार में बिकवाली बढ़ गई है। निवेशकों के लिए बॉन्ड और इक्विटी में कोई भरोसे का सौदा नहीं रह गया है। ऐसे में निवेशक सोने की तरफ ही भागते हैं। सोने में किए गए निवेश को कभी भी लिक्विडिटी में भी बदल सकते हैं। नकदी जुटाने के लिए लोग ट्रेडर्स और निवेशक उन चीजों को बेच रहे हैं, जो खरीद सकते हैं। सोने की खरीदारी कर रहे हैं। लोग अभी से ही अपनी भविष्य की कमाई के लिए चिंतित हैं। कोरोनावायरस पूरी दुनिया में फैल चुका है। यूरोप और यूएस में तबाही मचाए हुए हैं। कोरोना वायरस के कहर ने पूरी दुनिया को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
सोने में मांग कम होने से आपूर्ति में रुकावट
कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है। लिहाजा कई कंपनियों को बंद कर दिया गया है। लॉकडाउन की वजह से इटली के लोम्बार्डी में स्थिति स्विस रिफाइनरी को भी बंद कर दिया गया है। अपने 100 साल के इतिहास में पहली बार है जब कंपनी को बंद कर दिया गया है। सोने की आपूर्ति में कई तरह की रुकावटें आ रही हैं। सोने की सप्लाई नहीं हो पा रही है। पहले से ही सोने की आपूर्ति बहुत कम होती थी, अब आपूर्ति कम होने से इसकी कीमत में इजाफा बना हुआ है। भारत में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है। ऐसे में केवल आवश्यक वस्तुओं की ही आपूर्ति की जा रही है। सोनी की बिक्री मे पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। दुनिया भर में सोने के सबसे बड़े दो कंज्यूमर हैं। मांग कम होने से आपूर्ति में कटौती कर दी गई है।
रुपये में आई कमजोरी
भारतीय रुपये में जनवरी से अब तक 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। हाल ही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 76 रुपये के स्तर पर चल रहा है। आरके लगातार कड़ी मशक्कत करने के बावजूद भी emerging markets से फॉरेन फंड निकलने के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है। कोरोना वायरस का प्रसार भी तेजी से हो रहा है। अगर रुपये में कमजोरी आती है, तो घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोना महंगा हो जाता है। इसकी वजह ये है कि देश में जो भी अपनी मांग को पूरा करने के लिए आयात किया जाता है, उसको डॉलर में भुगतान किया जाता है।


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