Financial Planning: नौकरी वाली महिलाओं के लिए भी फाइनेंशियल प्लानिंग है जरूरी, सीखें टिप्स

Financial Planning For Women: महिलाओं के लिए वित्तीय रूप से मजबूत और साक्षर होना दोनों ही बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अब महिलाएं भी पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं और फाइनेंशियल प्लानिंग से उन्हें एंपावरमेंट यानी सशक्तिकरण भी मिलता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि महिलाएं अपने आप को फाइनेंशियल रूप से मजबूत और सुरक्षित कर सकें। इसके लिए पैसे कमाने के साथ उन्हें सही जगह इन्वेस्ट करने की आदत काफी जरूरी है। अगर महिलाएं वित्तीय रूप से सशक्त है तो वह अपने परिवार की भी पूरी मदद कर सकती हैं।

इसके साथ ही कभी भी मैटरनिटी लीव या दूसरा वर्क ब्रेक लिया जाए तो उसके लिए भी फाइनेंशियल बैकअप तैयार होना चाहिए। इसके अलावा आपको वापस नौकरी करने के लिए एक बेहतर प्लानिंग भी तैयार करनी चाहिए, ताकि नौकरी छोड़ने के बाद आप जब भी दोबारा शुरू करें तो आपको जीरो से शुरू न करना पड़े। इसके लिए आपको कुछ जरूरी स्टेप्स फॉलो करने पड़ते हैं। आज हम आपको इन्हीं तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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वित्तीय साक्षरता है बहुत जरूरी

आज के समय में सिर्फ पुरुष नहीं बल्कि बच्चों और महिलाओं को भी फाइनेंशियल एजुकेशन देना बहुत जरूरी है। महिलाओं को पैसे बचाने के लिए और उसे बढ़ाने के लिए सही वित्तीय साक्षरता यानी फाइनेंशियल एजुकेशन की बहुत जरूरत पड़ती है। इसके लिए आपको टैक्स के बारे में जानना काफी जरूरी है। इसके साथ ही इन्वेस्टमेंट कॉन्सेप्ट समझना भी काफी अहम हो जाता है। पैसों के निवेश के सही तरीके जानने के बाद आप बड़ी आसानी से अच्छी खासी सेविंग कर सकती हैं। आप चाहे तो इसके लिए की एक्सपर्ट की भी मदद ले सकती हैं।

फाइनेंशियल गोल भी है जरूरी

कोई भी निवेश शुरू करने से पहले आपका वित्तीय लक्ष्य यानी फाइनेंशियल गोल क्लियर होना चाहिए। अगर आपका फाइनेंशियल गोल क्लियर है, तो आप बड़ी आसानी से उसके लिए पैसे बचा सकती हैं। इसके लिए आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को परिभाषित करके इस चीज की शुरुआत कर सकते हैं। इनमें आपके कई गोल शामिल हो सकते हैं, जैसे सेविंग करना, घर बनाना, अपने लिए गाड़ी लेना, घर के खर्च उठाना, रिटायरमेंट के लिए पैसों की बचत और कैरियर ब्रेक के टाइम एक अच्छा सेविंग अमाउंट जैसे कई गोल हो सकते हैं। जब आपका गोल क्लियर होगा तो आप बड़ी आसानी से किसी वित्तीय सलाहकार की मदद से उसे लक्ष्य के लिए बचत और निवेश कर सकती हैं।

सेविंग्स भी है बहुत जरूरी

बजट के साथ ही बचत का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी है। महिलाओं का ध्यान पैसे कमाने में तो होता है पर बचत करने में अक्सर उन्हें काफी मुश्किल आती है। इसीलिए आप अपने खर्चों को कंट्रोल करने के लिए एक मासिक बजट तैयार कर सकते हैं, जिससे आपको अपनी आमदनी और हो रहे खर्च के बारे में सही जानकारी हो सकेगी। अब हो रहे खर्चे में से कुछ फालतू खर्च कम करके आप अपनी सैलरी की एक हिस्से को सेविंग के लिए रख सकते हैं। क्योंकि अगर एक छोटी सी रकम भी लंबे समय तक बचाई जाए तो वह कुछ दिनों बाद एक बड़ा अमाउंट बन जाती है।

जैसे अगर अभी आपको 30 हजार रुपए हाथ में मिल रहे हैं, तो उसमें से आपको कम से कम 3000 रुपए हर महीने की बचत करनी ही चाहिए। जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती जाए वैसे-वैसे आपको सेविंग और इन्वेस्टमेंट बढ़ाते जाना चाहिए।

करियर ब्रेक से पहले कर लें प्लानिंग

शादी के बाद बच्चे पैदा होने पर महिलाओं को मैटरनिटी लीव और फिर कैरियर ब्रेक लेना पड़ता है। ऐसे कैरियर ब्रेक से अक्सर आपकी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर जबरदस्त असर पड़ता है। लेकिन अगर आप पहले से प्लान करके इस समय के लिए बचत करती हैं, तो बाद में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है। इसके लिए कुछ पैसे आपको फिक्स डिपाजिट जैसे स्कीम्स में इमरजेंसी फंड के तौर पर जमा करके रखनी चाहिए।

अगर आपको कैरियर ब्रेक लेना पड़ रहा है, तो उसकी जगह आप ऐसी कंपनी में भी काम कर सकती है जो वर्क फ्रॉम होम देती हो, जिससे आप घर पर रहकर बच्चों की देखभाल भी कर सकती हैं और नौकरी से भी समझौता नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा अगर आपके पास थोड़ा समय बचता है तो आप फ्री लासिंग करके भी पैसे कमा सकती हैं।

अगर आप अपने काम से काफी दिन तक दूर रही हैं, तो आपको फिर से जीरो से स्टार्ट करना पड़ सकता है। इसलिए भले ही नौकरी छोड़ दें आपको अपने काम के प्रति सजग रहना चाहिए और निरंतर उसकी प्रैक्टिस करते रहना चाहिए। आप चाहे तो इस ब्रेक के टाइम में अपनी स्किल्स को भी बेहतर कर सकती हैं, ताकि जब आप नौकरी पर लौटें तो आपके एक्सपीरियंस के साथ एक्स्ट्रा स्किल सेट भी होगा जिससे काफी मदद मिलेगी।

इसके अलावा काम पर लौटने से पहले अपनी सीवी को अपडेट करें। अपनी प्रोफाइल के हिसाब से जब देखे और अपने एक्स्ट्रा स्किल सेट के बारे में भी बताएं। आप ऐसी कंपनियों की तलाश भी कर सकती हैं, जो रिटर्नशिप प्रोग्राम के तहत एक ब्रेक के बाद वापस काम में आने वाली महिलाओं को मौका देती है।

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