देश के सबसे बड़े आईपीओ (IPO) को लेकर हलचल तेज हो गई है और इसकी संभावित टाइमलाइन से जुड़ी नई जानकारियां सामने आ रही हैं। 11 अक्टूबर तक रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) का इंतजार बना हुआ है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक 19 अक्टूबर के आसपास एंकर निवेशकों के लिए विंडो खुल सकती है। इसके बाद 21 से 23 अक्टूबर के बीच पब्लिक ऑफर आ सकता है और बाजार के माहौल के हिसाब से अक्टूबर के अंत तक लिस्टिंग हो सकती है। बता दें कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने जून में ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे।
आईपीओ के प्राइस बैंड को लेकर भी चर्चाएं जोरों पर हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि कंपनी बाजार से करीब ₹30,000 से ₹37,700 करोड़ जुटा सकती है, जिससे इसका वैल्यूएशन लगभग ₹10.3 लाख करोड़ बैठता है। वहीं कुछ अन्य रिपोर्ट्स में बाजार के मूड के आधार पर वैल्यूएशन ₹12 से ₹15 लाख करोड़ के बीच रहने का अनुमान जताया जा रहा है। RHP आने तक इन आंकड़ों को अस्थायी ही मानें। आधिकारिक दस्तावेज जारी होने के बाद ही जुटाए जाने वाले फंड के इस्तेमाल, लॉट साइज और रिजर्वेशन से जुड़े ब्यौरों की जांच करें।

Jio Platforms IPO: एंकर बुक खुलने से पहले रिटेल निवेशक जरूर निपटा लें ये काम
अगर आप इस इश्यू में बोली लगाने की सोच रहे हैं, तो अपनी तैयारियां अभी पूरी कर लें। अपना डीमैट खाता एक्टिव रखें, पैन-आधार और KYC वेरिफिकेशन पूरा करें, खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें और ₹5 लाख की सीमा वाला बैंक UPI ID तैयार रखें। आवेदन के लिए 'UPI Application Supported by Blocked Amount' (UPI-ASBA) तरीके का इस्तेमाल करें। याद रखें, आवेदन को मान्य रखने के लिए आईपीओ बंद होने वाले दिन शाम 5:00 बजे तक UPI मैंडेट स्वीकार करना जरूरी है।
| विवरण | समय-सीमा |
|---|---|
| UPI मैंडेट स्वीकार करना (रिटेल UPI-ASBA) | आईपीओ बंद होने के दिन शाम 5:00 बजे तक |
| शेयर अलॉट न होने पर फंड अनब्लॉक होने का अनुमानित समय | आईपीओ बंद होने के दो कार्य दिवसों के भीतर |
Jio Platforms IPO: लिक्विडिटी का नया रुख और टेलिकॉम सेक्टर पर नजर
बड़े आईपीओ अक्सर कम अवधि के लिए बाजार से काफी नकदी खींच लेते हैं, हालांकि इस पर जानकारों की अलग-अलग राय है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली करके आईपीओ में दांव लगा रहे हैं, जबकि फंड मैनेजरों का कहना है कि घरेलू बाजार में लिक्विडिटी की कोई कमी नहीं है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारती एयरटेल के लिए जियो का यह आईपीओ टेलिकॉम सेक्टर के बेंचमार्क को नए सिरे से तय कर सकता है। वहीं, इस साल के अंत में टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी से भी सेक्टर की कमाई के गणित को मजबूती मिलेगी।
Jio Platforms IPO: आईपीओ फंडिंग की लागत बनाम एफडी का रिटर्न
| विकल्प | सालाना अनुमानित दर |
|---|---|
| आईपीओ फंडिंग लोन (NBFC/HNI, कम अवधि) | 8.5%–14% |
| बड़े प्राइवेट बैंक की 1 साल की FD (HDFC बैंक) | लगभग 6.25% |
| स्मॉल फाइनेंस बैंक की 1 साल की FD (Unity SFB) | लगभग 8.0% |
ग्रे मार्केट की चर्चाएं पूरी तरह अनौपचारिक और बेहद उतार-चढ़ाव वाली होती हैं। इतने बड़े इश्यू में भारी ओवरसब्सक्रिप्शन का जोखिम रहता है, इसलिए अगर आप कंपनी के फंडामेंटल्स और वैल्यूएशन से पूरी तरह संतुष्ट हैं, तभी 'कट-ऑफ' प्राइस पर आवेदन करें। 11 अक्टूबर तक आईपीओ की तारीखें, इश्यू साइज और प्राइस बैंड केवल संभावित हैं, इसलिए RHP जारी होते ही इनकी दोबारा पुष्टि कर लें। आधिकारिक ऑफर डॉक्यूमेंट में दिए गए जोखिमों (risk factors) को भी ध्यान से पढ़ें।


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