आज, 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर तमाम करदाता शिकायत कर रहे हैं कि उनका आईटीआर रिफंड अटक गया है। अगर आपका पैसा भी फंसा है, तो यह चेकलिस्ट आपके बहुत काम आएगी। इसमें हमने पोर्टल के हर स्टेटस का मतलब और रिफंड पाने का सबसे तेज तरीका आसान भाषा में समझाया है। जानिए सही बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट (pre-validate) कैसे करें, रिफंड री-इश्यू की रिक्वेस्ट कैसे डालें और डेटा मिसमैच, ई-वेरिफिकेशन की डेडलाइन, बकाया टैक्स की डिमांड और साइबर फ्रॉड से कैसे बचें।
सबसे पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपना रिफंड स्टेटस चेक करें। अगर स्टेटस 'Processed' दिख रहा है, तो e‑File > Income Tax Returns > View Filed Returns में जाकर रिफंड एडवाइस चेक करें। यदि वहां 'Refund failed' लिखा आ रहा है, तो Services > Refund Re‑issue पर जाएं और अपने प्री-वैलिडेटेड बैंक अकाउंट को चुनें। वहीं, अगर स्टेटस 'Under processing' दिख रहा है, तो सबसे पहले अपने बैंक अकाउंट को वैलिडेट करें। इसके लिए Profile > My Bank Account > Add Bank Account > Pre‑Validate पर जाएं और फिर डैशबोर्ड पर नजर बनाए रखें।

ITR refunds stuck: reconcile AIS, TIS, and Form 26AS
टैक्स डेटा में गड़बड़ी या अंतर होने पर भी सिस्टम रिफंड रोक देता है। इसे ठीक करने के लिए Services > Annual Information Statement (AIS) पर जाएं। यहां AIS, टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) और फॉर्म 26AS का आपस में मिलान करें। अगर कोई गलती दिखे, तो 'AIS Feedback' विकल्प का इस्तेमाल करके उसे सही, आंशिक सही या खारिज के रूप में मार्क करें और अपने डिडक्टर (TDS काटने वाले) से TDS डेटा सुधारने को कहें। उदाहरण के लिए: अगर आपका TDS 1,20,000 रुपये कटा है, फाइनल टैक्स दायित्व 1,05,000 रुपये बनता है और 15,000 रुपये रिफंड आना है, तो AIS में एक छोटी सी गलती भी इस पैसे को अटका सकती है।
ITR refunds: outstanding demand, e‑verification, and timelines
अगर आपका कोई पुराना टैक्स बकाया (Demand) है, तो आयकर विभाग रिफंड के पैसे से उसे एडजस्ट कर सकता है। इसके लिए Pending Actions > Response to Outstanding Demand में जाकर स्थिति चेक करें। वहां अपनी सहमति या असहमति दर्ज कराएं, सही कारण बताएं और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। इसके अलावा, ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरीफाई जरूर कर लें। इसके लिए e‑File > Income Tax Returns > e‑Verify Return का इस्तेमाल करें, वरना रिफंड प्रोसेसिंग रुक जाएगी। अगर इसके बाद भी देरी हो रही है, तो Grievances > Submit Grievance में जाकर शिकायत दर्ज करें और बैंक वैलिडेशन का स्क्रीनशॉट अटैच कर दें।
Phishing alert: जल्दी रिफंड दिलाने का दावा करने वाले या फीस मांगने वाले किसी भी ईमेल या एसएमएस के झांसे में न आएं। अपना ओटीपी या पासवर्ड कभी किसी से शेयर न करें। केवल.gov.in पर खत्म होने वाले आधिकारिक इनकम टैक्स पोर्टल का ही इस्तेमाल करें। ब्राउजर में खुद वेब एड्रेस टाइप करें और अकाउंट में लॉग इन करके ही स्टेटस देखें। ध्यान रखें, बैंक या आयकर विभाग कभी भी रिफंड जारी करने के लिए लिंक नहीं भेजते।
ITR refunds: old vs new regime—quick comparison
| पहलू | पुरानी व्यवस्था (Old regime) | नई व्यवस्था (New regime) |
|---|---|---|
| डिडक्शन और छूट (Exemptions) | कई तरह की छूट उपलब्ध हैं, जैसे 80C, 80D, HRA और होम लोन का ब्याज। | सीमित छूट; सैलरी पर स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, बाकी प्रमुख छूटें नहीं मिलतीं। |
| सबूत और पेरोल प्रक्रिया | पेरोल के दौरान ज्यादा डॉक्युमेंट और डिक्लेरेशन जमा करने होते हैं। | कम कागजी कार्रवाई और आसान पेरोल प्रक्रिया। |
| रिफंड कितना मिलेगा | अगर आपने बड़ा निवेश और डिडक्शन क्लेम किया है, तो ज्यादा रिफंड मिल सकता है। | कम या बिना छूट वाले मामलों में रिफंड भी कम बनता है। |
| किसके लिए बेहतर | उन करदाताओं के लिए फायदेमंद जो बड़ा निवेश करते हैं और होम लोन चुका रहे हैं। | कम निवेश और सीधी-सादी इनकम वाले टैक्सपेयर्स के लिए सही। |
आज ही, 26 अक्टूबर को ये जरूरी काम निपटा लें और रिफंड हमेशा प्री-वैलिडेटेड बैंक खाते में ही मंगाएं। अपना AIS क्लियर रखें, टैक्स डिमांड का तुरंत जवाब दें और 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। अगर 10 वर्किंग दिनों के बाद भी कोई अपडेट न मिले, तो शिकायत दर्ज कराएं और 'View Filed Returns' पर नजर रखें। इस आसान तरीके से आपका अटका हुआ रिफंड बिना किसी झंझट के क्लियर हो जाएगा।


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