ITR Refund Rule: इस साल की आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की समय-सीमा निकल चुकी है और अब कई करदाताओं (टैक्सपेयर्स) के मन में यह सवाल है कि क्या देर से फाइल लिए रिटर्न पर उन्हें टैक्स रिफंड मिलेगा या नहीं? दरअसल, आकलन वर्ष (AY) 2025-26 के लिए बिना ऑडिट वाले खातों की ITR भरने की अंतिम तिथि 16 सितंबर थी, जिसे सरकार ने दो बार बढ़ाया था। अब लोग 31 दिसंबर की विलंबित ITR की अंतिम तिथि तक रिटर्न दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में चलिए समझते हैं कि देर से फाइल किए रिटर्न पर रिफंड मिलेगा या नहीं और इसके लिए नियम-कानून क्या कहते हैं...

विलंबित ITR वह होता है जो निर्धारित तिथि निकलने के बाद, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले दाखिल किया जाता है। नियमों के अनुसार, विलंबित ITR वित्तीय वर्ष समाप्त होने से 90 दिन पहले तक भरा जा सकता है। इस वर्ष के लिए यह अंतिम तिथि 31 दिसंबर है।
देर से फाइल किए गए रिटर्न पर रिफंड क्लेम कर सकते हैं या नहीं?
आयकर अधिनियम के तहत, विलंबित ITR यानी देर से फाइल किए गए रिटर्न में भी रिफंड का दावा किया जा सकता है। अंतर केवल ब्याज पर आता है। धारा 244A के अनुसार, समय पर रिटर्न दाखिल करने पर ब्याज की गणना 1 अप्रैल से होती है, जबकि देरी से रिटर्न दाखिल करने पर ब्याज उसी दिन से मिलता है जिस दिन ITR दाखिल किया गया हो।
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि विलंबित ITR का मतलब रिफंड का रुक जाना है। हालांकि, समस्याएं आमतौर पर प्रोसेसिंग से जुड़ी होती हैं। जैसे, 'अंडर प्रोसेसिंग' स्थिति का लंबे समय तक रहना, AIS या TDS में अंतर के कारण रिफंड का अटकना, या पुराने टैक्स डिमांड के साथ एडजस्टमेंट। इन चुनौतियों के बावजूद, रिफंड का अधिकार बना रहता है। यानी देर से फाइल किए गए रिटर्न पर भी रिफंड मिलता है।
देरी से फाइल किए रिटर्न पर क्या-क्या समस्याएं आती हैं?
देरी से ITR दाखिल करने पर कुछ शुल्क और नुकसान हो सकते हैं। यदि आप समय पर ITR दाखिल नहीं करते हैं, तो धारा 234F के तहत विलंब शुल्क लगता है। यह शुल्क ₹5,000 है, लेकिन यदि आपकी कुल आय ₹5 लाख से कम है, तो यह ₹1,000 होता है।
धारा 234A के तहत, यदि कोई कर बकाया है, तो प्रति माह 1% ब्याज देना पड़ता है। इसकी गणना देय तिथि से लेकर ITR दाखिल करने की तिथि तक की जाती है। यदि कोई कर बकाया नहीं है और केवल रिफंड बनता है, तो यह ब्याज लागू नहीं होता।
देरी से ITR दाखिल करने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि रिफंड पर मिलने वाला ब्याज (धारा 244A) नहीं मिलता है। यह नुकसान स्थायी होता है। इसके अतिरिक्त, विलंबित ITR में कुछ नुकसानों को आगे नहीं ले जाया जा सकता, जैसे हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन और बिजनेस इनकम के नुकसान। यह निवेशकों के लिए एक बड़ी समस्या हो सकती है।
इनके अलावा देरी से फाइलिंग से जुड़ी अन्य समस्याओं में AIS या फॉर्म 26AS का बेमेल होने पर रिफंड का अटकना, पुराने कर मांगों के खिलाफ रिफंड का एडजस्ट होना और बैंक खाता प्री-वैलिडेट न होने पर रिफंड का विफल होना शामिल है। साथ ही, विलंबित रिटर्न में सुधार करने के लिए भी कम समय मिलता है।
31 दिसंबर से पहले टैक्सपेयर्स क्या करें?
31 दिसंबर से पहले कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए। AIS, फॉर्म 26AS और फॉर्म 16 का सावधानीपूर्वक मिलान करें। अपने बैंक खाते को प्री-वैलिडेट करें। ITR फाइल करने के तुरंत बाद उसे वेरिफाई करें। सभी कटौतियों और छूटों (जैसे 80C, 80D, 80CCD, होम लोन ब्याज, शिक्षा शुल्क) की दोबारा जांच करें। अंतिम दिन का इंतजार न करें और जल्द से जल्द ITR दाखिल करें।
रिफंड स्टेटस कैसे चेक करें?
रिफंड स्टेटस का पता करने के लिएआप आयकर पोर्टल पर 'e-File' → 'Income Tax Returns' → 'View Filed Returns' → 'Refund Status' पर जा सकते हैं। इसके अलावा, TIN-NSDL टूल यह दिखाता है कि रिफंड जारी हुआ है, प्रोसेस में है, फेल हुआ है या एडजस्ट किया गया है।
हालांकि 31 जुलाई की समय-सीमा छूटने पर भी रिफंड मिलता है, लेकिन ब्याज का नुकसान होता है और प्रोसेसिंग में देरी होती है। 31 दिसंबर की विलंबित ITR की अंतिम तिथि नजदीक है, इसलिए जिन लोगों को रिफंड चाहिए, वे जल्द से जल्द ITR दाखिल करें, बैंक विवरण वैलिडेट करें और AIS व TDS डेटा की दोबारा जांच करें।
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