ITR Filing: सरकार ने AY 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म (ITR-1 से ITR-7) नोटिफाई कर दिए हैं। इसका मतलब है कि अब व्यक्ति, पेंशनभोगी, पेशेवर और अन्य टैक्सपेयर इन फॉर्मों (जो भी उन पर लागू हों) का इस्तेमाल करके 31 जुलाई, 2026 को या उससे पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर सकते हैं।

ITR फाइल करने की आखिरी तारीख
वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) के लिए, ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वाले नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। जिन नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स को ITR-3 और ITR-4 फाइल करना है, उनके लिए आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। हालांकि, अगर आप यह तारीख चूक जाते हैं, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक विलंबित रिटर्न (belated return) फाइल कर सकते हैं, लेकिन इस पर विलंब शुल्क और ब्याज लगेगा।
ITR-1 किसे फाइल करना चाहिए?
नीचे दिए गए इनकम के प्रकार ITR-1 फॉर्म का हिस्सा नहीं हो सकते-
- बिजनेस और प्रोफेशन से होने वाला प्रॉफिट और गेन
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन
- सेक्शन 112A के तहत 1.25 लाख रुपये से ज्यादा का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन
- एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली इनकम
- 'अन्य स्रोतों' (Other Sources) के तहत होने वाली इनकम, जो नीचे दिए गए प्रकार की हो- लॉटरी से मिली जीत, रेस के घोड़ों को रखने और उनका रखरखाव करने की एक्टिविटी, सेक्शन 115BBDA या सेक्शन 115BBE के तहत खास दरों पर टैक्सेबल इनकम, सेक्शन 5A के प्रावधानों के अनुसार बांटी जाने वाली इनकम।
ITR-2 फाइल करने के लिए कौन एलिजिबल है?
ITR-2 उन व्यक्तियों या HUF द्वारा फाइल किया जा सकता है जो-
- ITR-1 (सहज) फाइल करने के लिए एलिजिबल नहीं हैं।
- बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाले प्रॉफिट और गेन से कोई इनकम नहीं रखते हैं, और साथ ही बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाले प्रॉफिट और गेन के रूप में दी गई कोई इनकम नहीं रखते हैं- ब्याज (Interest), सैलरी, बोनस, कमीशन या मेहनताना (चाहे किसी भी नाम से जाना जाए), जो किसी पार्टनरशिप फर्म से उन्हें मिलना बाकी हो या मिल चुका हो, किसी अन्य व्यक्ति (जैसे पति/पत्नी, नाबालिग बच्चा, आदि) की इनकम को अपनी इनकम के साथ क्लब (जोड़ना) करना चाहते हैं - बशर्ते क्लब की जाने वाली इनकम ऊपर दी गई किसी भी कैटेगरी में आती हो।
ITR-2 फाइल करने के लिए कौन एलिजिबल नहीं है?
ITR-2 कोई भी ऐसा व्यक्ति या HUF फाइल नहीं कर सकता, जिसकी उस साल की कुल इनकम में बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाले प्रॉफिट और गेन से होने वाली इनकम शामिल हो, और साथ ही जिसकी इनकम नीचे दिए गए प्रकार की हो- ब्याज (Interest)स सैलरी, बोनस, कमीशन या मेहनताना (चाहे किसी भी नाम से जाना जाए), जो किसी पार्टनरशिप फर्म से उन्हें मिलना बाकी हो या मिल चुका हो।


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