29 अक्टूबर 2026 तक मिली जानकारी के मुताबिक, जिन टैक्सपेयर्स के खातों का ऑडिट होता है, उन्हें अब 31 अक्टूबर तक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की हड़बड़ी की जरूरत नहीं है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने असेसमेंट ईयर 2026–27 के लिए ITR फाइल करने की लास्ट डेट बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी है। ध्यान दें कि यह राहत केवल उन्हीं टैक्सपेयर्स के लिए है जिनके खातों का ऑडिट होना अनिवार्य है, बाकी सभी के लिए नहीं। इस एक्सटेंशन से टैक्सपेयर्स को बिना किसी गलती के और पेनल्टी से बचते हुए सही रिटर्न दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का अतिरिक्त समय मिल गया है।
इसकी पात्रता (एलिजिबिलिटी) की शर्त बहुत सीधी है: आपके खातों का ऑडिट होना चाहिए और आपके चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ने ऑडिट रिपोर्ट अपलोड कर दी हो। टैक्स ऑडिट रिपोर्ट सबमिट करने की डेडलाइन भी बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 की गई थी, इसलिए रिटर्न फाइनल करने से पहले अपनी ई-फाइलिंग वर्कलिस्ट में यह जरूर चेक कर लें कि रिपोर्ट जमा और स्वीकार हुई है या नहीं। वहीं, नॉन-ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स को अपनी पुरानी डेडलाइन के हिसाब से ही फाइलिंग करनी होगी।

किसे मिली 21 नवंबर तक की राहत? फाइल करने से पहले देखें यह क्विक चेकलिस्ट
फाइल करने से पहले इस लास्ट-मिनट चेकलिस्ट पर जरूर नजर डाल लें। सबसे पहले चेक करें कि फॉर्म 3CA/3CB‑3CD अपलोड और एक्सेप्ट हुआ है या नहीं। इसके बाद एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) और फॉर्म 26AS का अपने ब्रोकर और डिविडेंड स्टेटमेंट से सही मिलान (रिकंसीलिएशन) करें। TDS या TCS में कोई अंतर हो तो उसे सुधारें। फॉर्म सबमिट करने से पहले पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था (Old vs New Regime) में से अपने फायदे की दोबारा गणना कर लें। कैपिटल गेन्स, डेप्रिसिएशन क्लेम और प्रिजम्पटिव टैक्स से जुड़ी एंट्रियों को री-चेक करें। सही ब्याज के साथ अपना सेल्फ-असेसमेंट टैक्स जमा करें। रिफंड पाने के लिए बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट करना न भूलें और स्क्रूटनी के लिए सभी जरूरी डाक्यूमेंट्स अपने पास तैयार रखें।
पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था: फाइल करने से पहले क्या जांचें?
टैक्स कैलकुलेशन के लिए पिछले साल के फॉर्मूले पर आंख बंद करके भरोसा न करें। अगर आप सैलरीड क्लास हैं और बड़े डिडक्शंस (छूट) क्लेम कर रहे हैं, तो पुरानी व्यवस्था (Old Regime) आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। वहीं अगर आपकी टैक्स छूट कम हैं, तो नई व्यवस्था (New Regime) ज्यादा आसान साबित हो सकती है। ई-फाइलिंग यूटिलिटी में दोनों विकल्पों का हिसाब लगाएं और उनके स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। उदाहरण के तौर पर, सैलरीड क्लास सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन बनाम सेक्शन 80C और मेडिकल इंश्योरेंस के पूरे डिडक्शन की तुलना करें, फिर जिस विकल्प में कम टैक्स बने, उसे ही चुनें।
| पैरामीटर | पुरानी व्यवस्था (Old regime) | नई व्यवस्था (New regime) |
|---|---|---|
| ज्यादातर टैक्स छूट (80C, 80D, HRA, होम-लोन ब्याज) | उपलब्ध | अधिकांश उपलब्ध नहीं |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | उपलब्ध | उपलब्ध |
| टैक्स रेट्स, रिबेट और सरचार्ज | नियमानुसार | नियमानुसार |
| किसके लिए बेहतर? | ज्यादा टैक्स छूट का दावा करने वालों के लिए | कम छूट और आसान फाइलिंग चाहने वालों के लिए |
30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन: ये हैं मान्य तरीके
ITR सबमिट करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। इसके लिए आप आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), बैंक अकाउंट इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC), डिमैट अकाउंट या अनिवार्य मामलों में डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप 30 दिनों के बाद ई-वेरिफिकेशन करते हैं, तो जिस दिन ई-वेरिफिकेशन होगा, उसी दिन को आपकी फाइलिंग डेट माना जाएगा, जिससे लेट-फाइलिंग के नियम और पेनल्टी लागू हो सकती है। समय पर ई-वेरिफिकेशन करके आप 21 नवंबर तक मिली राहत का पूरा फायदा उठा सकते हैं और बेवजह की फीस से बच सकते हैं।
आखिर में, इन दो बातों का खास ध्यान रखें। पहला, सबमिट करने से पहले पोर्टल के डेटा का अपने कागजात से अच्छी तरह मिलान कर लें; आयकर विभाग के पोर्टल पर रिटर्न से जुड़े नियम और जिम्मेदारियां स्पष्ट बताई गई हैं। दूसरा, अगर आपका अकाउंट ऑडिटेड है, तो 21 नवंबर से पहले शांति से और सही जानकारी के साथ रिटर्न भरें। यह डेडलाइन एक्सटेंशन और ऑडिट रिपोर्ट की तारीख में बदलाव पूरी तरह आधिकारिक है। इस मिले हुए समय का उपयोग एक ही बार में बिल्कुल सटीक रिटर्न दाखिल करने के लिए करें।


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