इस बार ऑडिट मामलों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर नहीं है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फाइल करने की डेडलाइन बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी है। वहीं टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की 'तय तारीख' (specified date) को आगे बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दिया गया था। ध्यान रखें कि यह राहत केवल उन्हीं टैक्सपेयर्स के लिए है जिनके खातों का ऑडिट होना अनिवार्य है।
आखिर इस एक्सटेंशन का फायदा किसे मिलेगा? इसमें कंपनियां, वे अन्य टैक्सपेयर्स जिनकी बुक्स का ऑडिट जरूरी है, और ऑडिट होने वाली फर्मों के पार्टनर शामिल हैं। हालांकि, ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों के लिए अलग समय सीमा लागू रहेगी। ITR में यह छूट सेक्शन 139(1) के स्पष्टीकरण (Explanation) 2 के सीरियल नंबर 2 के तहत दी गई है। अगर आपकी ऑडिट रिपोर्ट 21 अक्टूबर तक फाइल हो चुकी है, तो 21 नवंबर तक अपना ITR जरूर दाखिल कर दें।

ऑडिट मामलों के लिए ITR: 21 नवंबर की डेडलाइन—तुरंत करें ये जरूरी काम
सबसे पहले अपने खातों (books closure) को फाइनल करें और सभी एडजस्टमेंट पूरे कर लें। यह जांच लें कि फॉर्म 3CA या 3CB के साथ फॉर्म 3CD आपके लेजर से पूरी तरह मेल खाता हो। यूनीक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) जेनरेट और वैलिडेट जरूर करें, क्योंकि इनकम टैक्स पोर्टल UDIN को क्रॉस-चेक करता है। एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) का मिलान करें; कोई अंतर दिखे तो पोर्टल पर फीडबैक दर्ज कराएं। सेक्शन 234A के ब्याज से बचने के लिए सेल्फ-असेसमेंट टैक्स का भुगतान समय रहते कर दें और पोर्टल पर चालान का मिलान कर लें।
ओल्ड वर्सेस न्यू टैक्स रेजीम: फाइल करने से पहले एक नजर डालें
| सवाल | ओल्ड टैक्स रेजीम | न्यू टैक्स रेजीम |
|---|---|---|
| क्या अधिकतर डिडक्शन (छूट) मिलती हैं? | हां, धारा 80C/80D आदि के तहत व्यापक छूट। | सीमित छूट, लेकिन आसान टैक्स स्ट्रक्चर। |
| किसे ज्यादा फायदा होता है? | जो टैक्स में बड़ी छूट क्लेम करते हैं। | जिनके पास डिडक्शन क्लेम करने के विकल्प कम हैं। |
| काम की टिप | सभी टैक्स छूट जोड़कर टैक्स की गणना करें। | बिना बड़ी छूट के सीधे टैक्स की गणना करें। |
इसे एक आसान उदाहरण से समझें। रिया एक ऑडिटेड फर्म में सैलरीड पार्टनर हैं और TDS कटने के बाद भी उन पर ₹30,000 का टैक्स बाकी है। अगर वह 21 नवंबर तक रिटर्न फाइल कर देती हैं, तो उन पर धारा 234F के तहत कोई लेट फीस नहीं लगेगी। अगर वह इस टैक्स का भुगतान 10 नवंबर को करती हैं, तो बकाया ₹30,000 पर सेक्शन 234A के तहत एक महीने का ब्याज लगेगा। वहीं, अगर वह 2 दिसंबर को रिटर्न फाइल करती हैं, तो उन्हें ₹5,000 की 234F लेट फीस देनी होगी।
ई-वेरिफिकेशन चेकलिस्ट और संभाल कर रखने वाले पोर्टल प्रूफ
रिटर्न दाखिल करने के बाद आधार OTP, नेट बैंकिंग, प्री-वैलिडेटेड बैंक या डिमैट EVC अथवा डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के जरिए ई-वेरिफाई (e-verify) जरूर करें। इसके बाद ITR एक्नॉलेजमेंट, ऑडिट रिपोर्ट एक्नॉलेजमेंट, UDIN वैलिडेशन स्टेटस, AIS/TIS फीडबैक रसीद और पेमेंट चालान डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें। भविष्य में टैक्स विभाग की ओर से कोई सवाल पूछे जाने पर ये दस्तावेज बेहद काम आते हैं। आखिरी वक्त का इंतजार किए बिना मिली छूट का फायदा उठाएं और बिना किसी गलती के रिटर्न भरें।
आपको मिला यह तीन हफ्ते का अतिरिक्त समय बेहद कीमती है, इसलिए देरी बिल्कुल न करें। अगर आपकी ऑडिट रिपोर्ट 21 अक्टूबर तक फाइल हो चुकी है, तो 21 नवंबर की डेडलाइन के हिसाब से अभी से ITR की तैयारी शुरू कर दें। AIS/TIS का मिलान करें, UDIN वैलिडेशन जांचें और ब्याज से बचने के लिए बकाया टैक्स का जल्द भुगतान करें। पोर्टल से जुड़े सभी प्रूफ सुरक्षित रखें। सही समय पर काम और पुख्ता दस्तावेज आपको बेवजह की लेट फीस, टैक्स नोटिस और दोबारा रिटर्न सुधारने के झंझट से बचाएंगे।


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