इनकम टैक्स विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए ITR-1 और ITR-4 फाइलिंग की सुविधा आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। यह वित्त वर्ष 2025-26 में हुई कमाई के लिए है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने 30 मार्च 2026 को ही ITR फॉर्म 1 से 7 तक नोटिफाई कर दिए थे, जिसके बाद अब फाइलिंग विंडो खुल गई है। अब सैलरीड क्लास, पेंशनर्स और प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन के दायरे में आने वाले छोटे कारोबारी बिना किसी इंतजार के अपना रिटर्न फाइल करना शुरू कर सकते हैं।
कौन भर सकता है ITR-1 और ITR-4 (AY 2026-27)
ITR-1 (सहज) उन लोगों के लिए है जिनकी इनकम का जरिया सीधा-सादा है, जैसे सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और ब्याज जैसे अन्य स्रोत। इसमें कुल आय 50 लाख रुपये तक होनी चाहिए। वहीं, ITR-4 (सुगम) उन छोटे टैक्सपेयर्स के लिए है जो सेक्शन 44AD, 44ADA या 44AE के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (अनुमानित टैक्स) का विकल्प चुनते हैं। भारत के ज्यादातर व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स इन्हीं दो फॉर्म्स के दायरे में आते हैं।

AY 2026-27 के लिए ITR-1 और ITR-4 फॉर्म में हुए बड़े बदलाव
इस साल सबसे बड़ा बदलाव ITR-1 (सहज) के दायरे में किया गया है। AY 2026-27 से अब ITR-1 के जरिए दो हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली आय की जानकारी दी जा सकती है। यह उन सैलरीड लोगों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत है जिनके पास दूसरा घर है या जिन्होंने अपना घर किराए पर दे रखा है। इसका मतलब है कि अब कई टैक्सपेयर्स को जटिल ITR-2 फॉर्म भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे आसान फॉर्म का ही इस्तेमाल कर सकेंगे।
ITR-4 के बिजनेस सेक्शन में एक नया कॉलम जोड़ा गया है। प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन चुनने वाले टैक्सपेयर्स को अब साल भर में किए गए निवेश (Investments) की जानकारी देनी होगी, जो पिछले सालों में जरूरी नहीं थी। इसके अलावा, वित्त वर्ष के अंत में बैंक अकाउंट का बैलेंस बताना भी अब अनिवार्य कर दिया गया है।
सभी ITR फॉर्म्स में अब 'सेकेंडरी एड्रेस' के लिए एक नया फील्ड जोड़ा गया है। कॉन्टैक्ट डिटेल्स वाले सेक्शन में अब प्राइमरी और सेकेंडरी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अलग-अलग मांगी गई है। इसका मकसद यह है कि अगर प्राइमरी नंबर पर संपर्क न हो पाए, तो विभाग दूसरे नंबर के जरिए आपसे जुड़ सके। ये बदलाव छोटे लग सकते हैं, लेकिन समय पर सूचनाएं पाने के लिए काफी अहम हैं।
ITR फाइलिंग की डेडलाइन: नोट कर लें ये जरूरी तारीखें
इस साल सभी टैक्सपेयर्स के लिए डेडलाइन एक जैसी नहीं है, इसलिए अपनी आखिरी तारीख जानना बेहद जरूरी है। नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स के लिए ITR-1 और ITR-2 भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। वहीं, जिन नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स को ITR-3 और ITR-4 भरना है, उनके लिए ड्यू डेट 31 अगस्त 2026 है। नीचे दी गई टेबल से आप सभी जरूरी तारीखें एक नजर में समझ सकते हैं:
| टैक्सपेयर की कैटेगरी | ITR फॉर्म | आखिरी तारीख |
|---|---|---|
| सैलरीड / पेंशनर्स | ITR-1, ITR-2 | 31 जुलाई, 2026 |
| प्रिजम्प्टिव / नॉन-ऑडिट बिजनेस | ITR-3, ITR-4 | 31 अगस्त, 2026 |
| टैक्स ऑडिट वाले मामले | ITR-3, ITR-6 | 31 अक्टूबर, 2026 |
| ट्रांसफर प्राइसिंग वाले मामले | ITR-6 | 30 नवंबर, 2026 |
| बिलेटेड रिटर्न (देरी से भरा गया रिटर्न) | सभी फॉर्म | 31 दिसंबर, 2026 |
कैसे भरें रिटर्न और क्यों है जल्दी फाइलिंग जरूरी?
टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह है कि 15 जून 2026 से पहले रिटर्न फाइल न करें। इसकी वजह यह है कि बैंकों, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के पास TDS सर्टिफिकेट, फॉर्म 16 और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) अपलोड करने के लिए 31 मई तक का समय होता है। अगर आप इससे पहले फाइलिंग करते हैं, तो डेटा मिसमैच होने का खतरा रहता है, जिससे बाद में परेशानी हो सकती है।
पोर्टल पर मौजूद AIS आपके PAN से जुड़ी हर कमाई को दिखाता है। रिटर्न जमा करने से पहले इसे क्रॉस-चेक करना अब अनिवार्य जैसा ही है। ये बदलाव बताते हैं कि अब पूरा सिस्टम टेक्नोलॉजी पर आधारित हो गया है, जहां छोटी सी गलती भी ऑटोमेटेड नोटिस का कारण बन सकती है। इसलिए फाइलिंग से पहले AIS डेटा जरूर जांच लें।
टैक्स रिजीम का चुनाव और ई-वेरिफिकेशन के नियम
AY 2024-25 से नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) ही डिफॉल्ट है, लेकिन टैक्सपेयर्स के पास पुरानी व्यवस्था चुनने का विकल्प रहता है। नॉन-बिजनेस मामलों में, आप हर साल रिटर्न भरते समय अपनी पसंद की टैक्स व्यवस्था चुन सकते हैं। सैलरीड टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि वे सबमिट बटन दबाने से पहले दोनों रिजीम की तुलना जरूर कर लें।
बिना वेरिफिकेशन के भरा गया रिटर्न 'डिफेक्टिव' माना जाता है, यानी कानूनी तौर पर इसकी कोई वैल्यू नहीं होती। ITR सबमिट करने के बाद आपके पास आधार OTP, नेट बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए इसे ई-वेरिफाई करने के लिए 30 दिन का समय होता है। ई-वेरिफिकेशन न करना एक ऐसी गलती है जिससे आपका भारी नुकसान हो सकता है।
अप्रैल या मई में रिटर्न भरने का एक बड़ा फायदा यह है कि रिफंड जल्दी प्रोसेस होता है, क्योंकि इनकम टैक्स विभाग 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर काम करता है। साथ ही, जल्दी फाइलिंग करने से आप आखिरी समय की तकनीकी दिक्कतों और हड़बड़ी से भी बच जाते हैं। ITR-1 और ITR-4 लाइव होने के साथ ही फाइलिंग सीजन शुरू हो चुका है, और समझदारी इसी में है कि आप समय रहते इसे पूरा कर लें।
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