ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स के लिए राहत की खबर है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट सबमिट करने की डेडलाइन 21 अक्टूबर 2026 कर दी है। ध्यान दें कि इस छूट से सिर्फ काम का बोझ थोड़ा कम हुआ है, नियम वही रहेंगे। अगर आप इस वीकेंड जरूरी चीजें चेक करना भूल गए, तो ब्याज, लेट फीस और नोटिस का जोखिम बना रहेगा।
यह राहत सेक्शन 139(1) के एक्सप्लेनेशन 2 के सीरियल नंबर 2 के तहत आने वाले टैक्सपेयर्स पर लागू होगी, जिनमें मुख्य रूप से सेक्शन 44AB वाले ऑडिट केस शामिल हैं। वहीं, सेक्शन 92E के तहत आने वाले ट्रांसफर प्राइजिंग मामलों के लिए समय सीमा पहले जैसी ही रहेगी। उनके लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 है, जबकि फॉर्म 3CEB जमा करने की डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 तय की गई है।

Audit Cases के लिए ITR की नई डेडलाइन: जानिए तारीखें और नियम
अगर आप बिना किसी गड़बड़ी के रिटर्न फाइल करना चाहते हैं, तो इस वीकेंड यह चेकलिस्ट जरूर पूरी कर लें। ऑडिट यूटिलिटी से फॉर्म 3CA या 3CB के साथ 3CD की JSON फाइल अपलोड करें और फिर टैक्सपेयर लॉगिन में जाकर इसे एक्सेप्ट करें। तय समय सीमा के अंदर यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) को अपडेट और वैलिडेट करना न भूलें। DPM और DOA में डेप्रिसिएशन ब्लॉक्स को ध्यान से भरें, क्योंकि पोर्टल 3CD के साथ इनकी क्रॉस-चेकिंग करता है। इसके अलावा, रिफंड पाने वाले बैंक अकाउंट को पहले ही प्री-वैलिडेट कर लें। अगर आधार OTP या डिजिटल सिग्नेचर काम न करे, तो बैंक अकाउंट, डीमैट, ATM EVC या नेट बैंकिंग के जरिए e-Verify करें।
धारा 234A, 234B और 234C का ब्याज: आसान उदाहरण से समझें
इसे बैंक ब्याज की आय वाले एक नौकरीपेशा टैक्सपेयर के उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए, ₹30,000 का सेल्फ-असेसमेंट टैक्स 24 नवंबर 2026 को जमा किया जाता है और उसी दिन रिटर्न भी फाइल होता है। ऐसे में सेक्शन 234B के तहत 1 अप्रैल से 24 नवंबर तक (कुल 8 महीने) 1% प्रति माह की दर से ₹2,400 का ब्याज लगेगा। वहीं, 21 नवंबर के बाद रिटर्न फाइल करने पर सेक्शन 234A के तहत 1 महीने का ₹300 ब्याज अलग से देना होगा। इसके अलावा, तय तारीख के बाद फाइल करने पर सेक्शन 234F के तहत लेट फीस भी लगेगी—यदि कुल आय ₹5 लाख से अधिक है तो ₹5,000 और ₹5 लाख तक है तो ₹1,000 का जुर्माना लगेगा।
Old vs New Tax Regime: कौन सा विकल्प आपके लिए बेहतर?
रिटर्न भरने से पहले अपने टैक्स रिजीम (Tax Regime) का सही चुनाव कर लें। अगर आपकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय होती है और आप डिफॉल्ट न्यू टैक्स रिजीम से बाहर निकलकर ओल्ड रिजीम चुनना चाहते हैं, तो सेक्शन 139(1) की आखिरी तारीख से पहले फॉर्म 10-IEA जमा करना जरूरी है। बाकी लोग सीधे ITR फाइल करते समय चुनाव कर सकते हैं। दोनों रिजीम में डिडक्शन के नियम काफी अलग हैं, नीचे दी गई तालिका से इसे आसानी से समझें:
| फीचर (Feature) | ओल्ड रिजीम (Old Regime) | न्यू रिजीम (Section 115BAC) |
|---|---|---|
| लोकप्रिय टैक्स छूट (Deductions) | 80C, 80D और चैप्टर VI-A की ज्यादातर छूट उपलब्ध | केवल 80CCD(2), 80CCH(2) और 80JJAA की अनुमति; बाकी ज्यादातर बंद |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के लिए उपलब्ध | नए टैक्स स्लैब के साथ भी उपलब्ध |
| रिजीम चुनने का नियम | बिना बिजनेस इनकम वाले इंडिविजुअल्स के लिए एडवांस फॉर्म की जरूरत नहीं | बिजनेस इनकम होने पर फॉर्म 10-IEA भरना अनिवार्य |
21 अक्टूबर और 21 नवंबर की डेडलाइन के लिए दो जरूरी बातें हमेशा ध्यान रखें। रिटर्न में होने वाली गड़बड़ियों को समय रहते ठीक करें: यह जांच लें कि टर्नओवर, ऑडिट की पात्रता और 3CD के आंकड़े ITR शेड्यूल से पूरी तरह मेल खाते हों। जरूरत के मुताबिक डायरेक्टर्स और शेयरहोल्डर्स की जानकारी जरूर जोड़ें और अपना रिफंड बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट रखें। अगर आधार OTP काम न करे, तो समय पर e-Verify करने के लिए बैंक EVC, डीमैट EVC या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करें।


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