ऑडिट वाले मामलों में Income Tax Return (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 नवंबर 2026 है और आज 4 नवंबर हो चुकी है। ध्यान रहे कि CBDT ने पिछले महीने टैक्सपेयर्स को 3 हफ्ते की बड़ी राहत दी थी। हालांकि, आखिरी तारीख का इंतजार करने से बचें, क्योंकि 8 नवंबर को रविवार के दिन दिवाली है और इसके बाद कई राज्यों में बैंकों की छुट्टियां रहेंगी। इस वजह से नेट बैंकिंग या बैंक ब्रांच के जरिए टैक्स पेमेंट अटक सकता है। यह गाइड सही टैक्स रिजीम चुनने, AIS और 26AS के मिलान से लेकर सही तरीके से ई-वेरिफिकेशन करने तक में आपकी पूरी मदद करेगी।
सबसे पहले अपने लिए सही टैक्स रिजीम (Tax Regime) तय करें। असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए न्यू टैक्स रिजीम को ही डिफॉल्ट विकल्प बनाया गया है। इसमें 4 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स शून्य है, साथ ही 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है। 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम पर रिबेट (छूट) मिलने से टैक्स जीरो हो जाता है, जबकि इससे थोड़ा अधिक आय होने पर मार्जिनल रिलीफ का फायदा मिलता है। दूसरी ओर, ओल्ड टैक्स रिजीम में पुरानी कटौतियां (Deductions) पहले की तरह लागू हैं। अगर आपकी बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम होती है और आप ओल्ड रिजीम चुनना चाहते हैं, तो आपको धारा 139(1) की तय तारीख से पहले फॉर्म 10-IEA (Form 10-IEA) सबमिट करना अनिवार्य है।

ओल्ड वर्सेस न्यू टैक्स रिजीम: AY 2026-27 में क्या बदला?
| प्रमुख बातें (Key Item) | ओल्ड रिजीम | न्यू रिजीम (AY 2026-27) |
|---|---|---|
| बेसिक टैक्स छूट (Basic Exemption) | 2.5 लाख रुपये | 4 लाख रुपये |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | 50,000 रुपये | 75,000 रुपये |
| धारा 87A के तहत रिबेट | 5 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स शून्य | 12 लाख रुपये तक टैक्स शून्य; इससे अधिक पर मार्जिनल रिलीफ |
| टैक्स डिडक्शंस (Deductions) | 80C, 80D, HRA, LTA जैसी सभी छूट उपलब्ध | ज्यादातर छूट खत्म; 80CCD(2) और कुछ खास छूट ही लागू |
| बाहर निकलने (Opt-out) का नियम | लागू नहीं | बिजनेस/प्रोफेशन वालों के लिए तय तारीख से पहले फॉर्म 10-IEA अनिवार्य |
इसे एक आसान उदाहरण से समझें: अगर आपकी सालाना सैलरी 15 लाख रुपये है और आप सिर्फ 80C (1.5 लाख रुपये) और 80D (25,000 रुपये) का दावा करते हैं, तो न्यू रिजीम में 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद सेस (Cess) मिलाकर आपका कुल टैक्स करीब 97,500 रुपये बनेगा। वहीं, ओल्ड रिजीम में इन डिडक्शंस के बाद आपको करीब 2,02,800 रुपये टैक्स देना होगा। यानी न्यू रिजीम में आपको करीब 1.05 लाख रुपये की सीधी बचत होगी। हालांकि, अगर आप HRA, LTA या होम लोन के ब्याज पर बड़ी छूट ले रहे हैं, तो यह गणित बदल भी सकता है।
AIS/TIS और फॉर्म 26AS का सही मिलान कैसे करें?
रिटर्न दाखिल करने से पहले इनकम टैक्स पोर्टल से अपना AIS और TIS डाउनलोड करें और इनका मिलान फॉर्म 26AS (Form 26AS) से करें। अगर आंकड़ों में कोई अंतर नजर आता है, तो AIS में तुरंत अपना फीडबैक दें और जरूरत पड़ने पर डिडक्टर से TDS स्टेटमेंट सही करने को कहें। रिटर्न भरने से पहले ब्याज, डिविडेंड, शेयर बाजार के लेन-देन और बड़े ट्रांजैक्शंस का सही हिसाब मिला लें। जानकारियों में गड़बड़ी होने पर धारा 234A, 234B और 234C के तहत भारी ब्याज लग सकता है। इसके अलावा, डेडलाइन बीतने पर धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस भी भरनी पड़ सकती है।
ई-वेरिफिकेशन, ऑडिट फॉर्म्स और टैक्स पेमेंट की प्रक्रिया
रिफंड और EVC की सुविधा का फायदा उठाने के लिए सबसे पहले पोर्टल पर अपना बैंक खाता प्री-वैलिडेट (Pre-validate) कर लें। ऑडिट वाले मामलों में रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन सिर्फ डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) के जरिए ही करना होता है, जबकि अन्य मामलों में आधार OTP, नेट बैंकिंग या बैंक-EVC का इस्तेमाल किया जा सकता है। फाइलिंग से पहले यह पक्का कर लें कि फॉर्म 3CA या 3CB के साथ फॉर्म 3CD अपलोड हो चुका हो और उसका UDIN वैलिडेट हो। सेल्फ-असेसमेंट टैक्स भरने के लिए 'e-Pay Tax' का इस्तेमाल करें ताकि CRN जनरेट हो सके। ध्यान रखें कि जमा की गई रकम का समायोजन सबसे पहले लेट फीस और ब्याज में होता है, उसके बाद मूल टैक्स में। रिटर्न भरने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। अगर आप तय समय में रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) 31 दिसंबर 2026 तक, रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च 2027 तक और अपडेटेड रिटर्न 48 महीनों के भीतर भरा जा सकता है।


Click it and Unblock the Notifications