ITR Filing 2025: आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का समय आ चुका है और इस दौरान कई लोग उलझन में रहते हैं कि आखिर उनके लिए सही ITR फॉर्म कौन सा है। चाहे आप नौकरी करते हों, अपना बिजनेस चलाते हों, फ्रीलांसिंग से कमाई करते हों या पेंशन पाते हों, हर इनकम कैटेगरी के लिए अलग फॉर्म तय हैं। सही फॉर्म चुनना इसलिए जरूरी है ताकि रिटर्न फाइलिंग में कोई गलती न हो और भविष्य में नोटिस जैसी परेशानी से बचा जा सके।

ITR-1 कॉमन इनकम वालों के लिए
यह फॉर्म उन भारतीय निवासियों के लिए है जिनकी सालाना कुल इंकम 50 लाख रुपए से कम है। इसमें इनकम के स्रोत जैसे, नौकरी या पेंशन, एक हाउस प्रॉपर्टी से इनकम, ब्याज या अन्य छोटे स्रोत धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपए तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन
ITR-2 बिजनेस इनकम न हो तो चुनें
अगर आपकी इनकम में बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली कमाई शामिल नहीं है, तो ITR-2 सही है। इसे व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) दोनों भर सकते हैं।
ITR-3 बिजनेस और प्रोफेशन वाले टैक्सपेयर्स के लिए
अगर आपकी आमदनी में बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली कमाई है, तो ITR-3 फॉर्म आपके लिए जरूरी है। यह व्यक्ति और HUF दोनों के लिए लागू होता है।
ITR-4 छोटे व्यापारी और प्रोफेशनल्स
यह फॉर्म उन व्यक्तियों, HUF और फर्मों (LLP को छोड़कर) के लिए है जिनकी सालाना इनकम 50 लाख रुपए तक है और जो प्रेजम्प्टिव टैक्स स्कीम (धारा 44AD, 44ADA या 44AE) के तहत टैक्स भरते हैं। इसमें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन भी शामिल हो सकता है।
ITR-5 खास संस्थाओं के लिए
यह फॉर्म उन संस्थाओं के लिए है जो व्यक्ति, HUF या कंपनी नहीं हैं और ITR-7 भी फाइल नहीं करतीं।
ITR-6 - कंपनियां जो टैक्स छूट का दावा नहीं कर रहीं
धारा 11 के तहत छूट का दावा न करने वाली कंपनियों को ITR-6 फॉर्म भरना होता है।
ITR-7 - धार्मिक, राजनीतिक और ट्रस्ट संस्थाएं
यह फॉर्म उन संस्थाओं के लिए है जिन्हें आयकर अधिनियम की धारा 139(4A), 139(4B), 139(4C) या 139(4D) के तहत रिटर्न फाइल करना जरूरी होता है। इसमें राजनीतिक दल, धार्मिक ट्रस्ट और चैरिटी संस्थाएं शामिल हैं।
ITR-U पुराने रिटर्न को संशोधित करने के लिए
अगर आपने किसी पुराने असेसमेंट ईयर का रिटर्न भरा है और उसमें सुधार करना है, तो ITR-U का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 48 महीनों तक लागू होता है।
टिप्स:
अपनी इनकम के स्रोत और कैटेगरी के हिसाब से ही फॉर्म चुनें।
गलत फॉर्म भरने से रिटर्न रिजेक्ट हो सकता है।
जरूरत पड़ने पर टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लें।
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