31 जुलाई को ITR फाइल किया था? आज है ई-वेरिफिकेशन की आखिरी तारीख, वरना अटक सकता है रिफंड!

31 जुलाई को ITR फाइल किया था? तो ध्यान दें, आज रविवार, 30 अगस्त 2026 की रात 11:59 बजे तक इसे e-verify करना अनिवार्य है। डेडलाइन मिस हुई तो आपका रिटर्न अमान्य (invalid) हो सकता है, जिससे रिफंड अटक जाएगा और टैक्स कंप्लायंस में परेशानी होगी। नियम सीधा है: फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन पूरा करें। आधार OTP, नेट-बैंकिंग, बैंक या डीमैट EVC, या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट के जरिए तुरंत यह काम निपटाएं।

31 जुलाई को रिटर्न दाखिल करने वाले सभी टैक्सपेयर्स पर यह 30 दिन का नियम लागू होता है। आयकर विभाग ने साफ किया है, "अगर अपलोड करने के बाद रिटर्न वेरिफाई नहीं होता है, तो उसे अमान्य माना जाएगा।" वहीं, 30 दिनों के बाद वेरिफाई करने पर ई-वेरिफिकेशन की तारीख को ही फाइलिंग डेट माना जाएगा। इससे आपको लेट-फाइलिंग फीस, ब्याज भरना पड़ सकता है और कुछ घाटों (losses) को आगे कैरी-फॉरवर्ड करने का मौका भी हाथ से निकल सकता है।

ITR E-verification Deadline 2026: Last Chance to Verify Your Income Tax Return Filed on July 31st

2 मिनट में ITR ई-वेरिफाई करने के आसान तरीके

सबसे पहले e-filing पोर्टल पर लॉगिन करें, View Filed Returns खोलें और e-Verify पर क्लिक करें। इसके बाद Aadhaar OTP, नेट-बैंकिंग, बैंक या डीमैट इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC), या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट का विकल्प चुनें। अगर कोई ऑप्शन काम न करे, तो आधार को पैन से लिंक करें, अपने बैंक या डीमैट अकाउंट को प्री-वैलिडेट व EVC-इनेबल करें या सपोर्टेड नेट-बैंकिंग का सहारा लें। नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट है; पुरानी रिजीम चुनने के लिए फॉर्म 10-IEA का इस्तेमाल करें।

देर से ई-वेरिफिकेशन करने पर क्या होगा? जानें कंडोनेशन और अन्य विकल्प

अगर आप 30 दिनों के बाद e-verify करते हैं, तो पोर्टल उसी तारीख को आपकी फाइलिंग डेट मानेगा। लेट वेरिफिकेशन की वजह से धारा 234F के तहत लेट फीस और किसी भी बकाया सेल्फ-असेसमेंट टैक्स पर धारा 234A के तहत ब्याज लग सकता है। अगर आज की डेडलाइन छूट जाती है, तो Services → Service Requests → Condonation request → Delay in submission of ITR-V विकल्प का इस्तेमाल करें। उदाहरण के लिए: अगर आपकी आय ₹5 लाख से ज्यादा है और आप 5 सितंबर को ई-वेरिफाई करते हैं, तो आप पर ₹5,000 की लेट फीस लागू हो सकती है।

ओल्ड बनाम न्यू रिजीम: एक नज़र में समझें अंतर

पहलूपुरानी व्यवस्था (Old regime)नई व्यवस्था (New regime - डिफॉल्ट)
डिडक्शन और टैक्स छूट80C, 80D, HRA, LTA और होम-लोन ब्याज पर छूट की अनुमति।ज्यादातर टैक्स छूट खत्म; आसान स्लैब दरें।
स्टैंडर्ड डिडक्शनवेतनभोगी और पेंशनभोगियों के लिए उपलब्ध।वेतनभोगी और पेंशनभोगियों के लिए उपलब्ध।
किसके लिए बेस्ट?बड़ी छूट और भत्तों (allowances) का दावा करने वालों के लिए।कम डिडक्शन वाले और आसान प्रक्रिया चाहने वालों के लिए।
स्विच कैसे करें?ड्यू डेट तक फॉर्म 10-IEA बदलकर डिफॉल्ट से बाहर निकलें।जब तक पुरानी व्यवस्था न चुनें, तब तक इसी में बने रहेंगे।

ध्यान रखें कि ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू होती है। ITR स्टेटस जानने के लिए "View Filed Returns/Forms" और रिफंड का स्टेटस देखने के लिए "Check Refund Status" पर जाएं। अपने रिफंड बैंक अकाउंट को पहले से ही प्री-वैलिडेट करके रखें। अगर कोई टैक्स डिमांड दिखे, तो रिफंड जारी होने से पहले Pending Actions के तहत उसका जवाब दें। रिफंड जल्दी आ सकता है, लेकिन आयकर विभाग के पास धारा 143(1) के तहत वित्त वर्ष खत्म होने के बाद रिटर्न प्रोसेस करने के लिए कानूनी रूप से नौ महीने तक का समय होता है।

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