गैर-ऑडिट वाले बिजनेस और प्रोफेशन्स के लिए ITR-3/4 दाखिल करने की आखिरी तारीख शनिवार, 31 अगस्त 2026 है और इसमें अब सिर्फ 16 दिन ही बचे हैं। अगर आप यह डेडलाइन मिस करते हैं, तो आपको 31 दिसंबर 2026 तक लेट फीस के साथ बिलेटेड रिटर्न दाखिल करना पड़ेगा। ध्यान रहे, रिटर्न भरने के 30 दिनों के भीतर उसे e-verify कराना अनिवार्य है, वरना आपकी फाइलिंग अमान्य मानी जाएगी। इसलिए जितना जल्दी हो सके अपना आईटीआर भरें और इसे समय पर ई-वेरीफाई करना न भूलें।
आप प्रिजम्प्टिव (Presumptive) टैक्स स्कीम चुनते हैं या रेगुलर तरीका, इसी से तय होता है कि आपकी टैक्स लायबिलिटी, ब्याज और कागजी औपचारिकताएं कितनी होंगी। धारा 44AD के तहत, अगर आपका कैश लेन-देन (प्राप्ति और भुगतान) 5 फीसदी के भीतर है, तो आप ₹3 करोड़ तक के टर्नओवर पर प्रिजम्प्टिव टैक्स चुन सकते हैं; वरना यह सीमा ₹2 करोड़ है। वहीं धारा 44ADA के तहत, प्रोफेशनल्स के लिए 5 फीसदी कैश लिमिट के साथ ₹75 लाख तक की ग्रॉस रीसिप्ट पर यह छूट मिलती है; वरना सीमा ₹50 लाख ही रहती है। प्रिजम्प्टिव स्कीम में नॉन-कैश कमाई पर 6 फीसदी, कैश कमाई पर 8 फीसदी और प्रोफेशनल्स के लिए 50 फीसदी अनुमानित आय मानी जाती है। ध्यान दें कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) को नॉन-स्पेक्टेक्युलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है।

प्रिजम्प्टिव बनाम रेगुलर टैक्स: समझें टैक्स और ब्याज का गणित
सीधा गणित यह है कि अगर आपका असल प्रॉफिट मार्जिन प्रिजम्प्टिव दरों से कम है, तो प्रिजम्प्टिव स्कीम आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहती है। लेकिन अगर आपको बिजनेस खर्चों का दावा करना है, पिछले घाटे (carried-forward losses) को सेट-ऑफ करना है या कैश-फ्लो में ज्यादा उतार-चढ़ाव है, तो रेगुलर ऑप्शन बेहतर रहेगा। उदाहरण के लिए, ₹10 लाख कमाने वाला एक फ्रीलांसर प्रिजम्प्टिव स्कीम में ₹5 लाख की आय दिखाता है। वहीं, कम खर्च वाला कोई फ्रीलांसर अगर रेगुलर स्कीम में अपनी आय ₹3 लाख दिखाता है, तो उसे टैक्स कम देना होगा, लेकिन इसके लिए खाता-बही (books of accounts) मेंटेन करना और हर तिमाही एडवांस टैक्स देना जरूरी होगा।
अगर आप 31 अगस्त तक का इंतजार करते हैं, तो ब्याज का हिसाब समझ लीजिए। मान लीजिए TDS कटने के बाद आपका कुल टैक्स ₹1,00,000 बनता है और आपने कोई एडवांस टैक्स नहीं चुकाया है। ऐसे में धारा 234B के तहत 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक 1% प्रति माह की दर से ₹5,000 ब्याज लगेगा। इसके अलावा धारा 234C के तहत: ₹15,000 पर 1%×3 महीने, ₹30,000 पर 1%×3 महीने, ₹30,000 पर 1%×3 महीने और ₹25,000 पर 1%×1 महीना मिलाकर कुल ₹2,500 का ब्याज बनेगा।
| मद | दर | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| 234B/234C के तहत ब्याज | 1% प्रति माह (लगभग 12% सालाना) | साधारण ब्याज, टैक्स छूट नहीं; टैक्स भरते ही बंद |
| बड़े बैंकों की FD (1–2 वर्ष) | लगभग 6.25%–6.95% सालाना | टैक्सेबल; समय से पहले निकासी पर पेनल्टी |
| स्मॉल फाइनेंस बैंकों की उच्चतम FD | 8.1% सालाना तक | टैक्सेबल; दरें ज्यादा, बैंक छोटे |
इन आंकड़ों से साफ है कि देरी करने पर लगने वाला टैक्स ब्याज आम एफडी (FD) के रिटर्न से कहीं ज्यादा पड़ सकता है। इसलिए टैक्स का पैसा रोके रखना आपके लिए नुकसानदेह साबित होगा। इस समय बड़े बैंक 1 से 2 साल की एफडी पर आमतौर पर 6.25% से 6.95% ब्याज दे रहे हैं, जबकि स्मॉल फाइनेंस बैंक अधिकतम 8.1% तक का रिटर्न दे रहे हैं।
ITR-3/4 डेडलाइन: फाइलिंग के जरूरी स्टेप्स और पोर्टल चेकलिस्ट
धारा 234B के तहत ब्याज को बढ़ने से रोकने के लिए आज ही अपना सेल्फ-असेसमेंट टैक्स जमा करें। प्रिजम्प्टिव टैक्सपेयर्स को 15 मार्च तक 100% एडवांस टैक्स चुकाना अनिवार्य होता है, जबकि अन्य के लिए तिमाही किस्तें लागू होती हैं। रिटर्न फाइल करने के बाद आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), बैंक EVC या DSC के जरिए 30 दिनों के भीतर इसे e-verify जरूर करें। बिना किसी रुकावट के रिफंड और EVC पाने के लिए अपने बैंक खाते को प्री-वैलिडेट (Pre-validate) कर लें। कानूनन रिटर्न प्रोसेस होने में नौ महीने का समय लगता है, हालांकि रिफंड अक्सर इससे काफी पहले आ जाता है। फाइलिंग से पहले अपने AIS और TIS का मिलान जरूर कर लें।
ट्रेडर्स और फ्रीलांसर्स के लिए अंतिम फैसला: अगर आपकी कमाई 44AD/44ADA की सीमा में आती है और कैश लेन-देन 5 फीसदी से कम है, तो प्रिजम्प्टिव टैक्स स्कीम पेपरवर्क को काफी कम कर देती है। 15 मार्च तक टैक्स चुका देने पर यह धारा 234C के ब्याज को भी खत्म कर देती है। वहीं वास्तविक खर्चों का दावा करने और घाटे को एडजस्ट करने के लिए रेगुलर स्कीम चुनें। 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न फाइल करें, 30 दिनों के भीतर e-verify करें और रिफंड की रफ्तार तेज करने के लिए बैंक खाते को प्री-वैलिडेट रखें।
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