31 अगस्त ITR डेडलाइन: कहीं चूक न जाएं! फाइलिंग से पहले ये 5 गलतियां सुधारें

31 अगस्त की ITR-3/4 फाइलिंग डेडलाइन में अब बेहद कम समय बचा है। नॉन-ऑडिट बिजनेस, फ्रीलांसर या प्रोफेशनल्स (जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं है) और नॉन-ऑडिट फर्मों के पार्टनर तुरंत अपना रिटर्न फाइल करें। यह डेडलाइन सख्त है, इसे महज एक सलाह न समझें। ध्यान रखें कि फाइलिंग के 30 दिनों के भीतर e-verify करना अनिवार्य है, वरना आपका ITR अमान्य हो जाएगा और प्रोसेस नहीं किया जाएगा।

31 अगस्त की डेडलाइन किनके लिए है: ऐसे इंडिविजुअल्स और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) जिनकी बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम है और उन्हें ऑडिट कराने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा प्रिजम्प्टिव टैक्स स्कीम के तहत ITR-4 भरने वाली रेजिडेंट फर्म्स भी इसके दायरे में आती हैं। अगर यह तारीख मिस हो जाए, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न या तय समयसीमा में रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

ITR-3/4 Filing Deadline 2026: Step-by-Step Guide to File Income Tax Return Before 31st August

ITR‑3/4 (नॉन-ऑडिट) फाइलिंग: केवल 10 मिनट में समझें पूरा प्रोसेस

सबसे पहले अपने लिए सही टैक्स रिजीम चुनें। इसके बाद Form 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) का मिलान करें और ब्याज या डिविडेंड से जुड़ी गड़बड़ियों को ठीक करें। अगर कोई बकाया टैक्स बनता है, तो e-Pay Tax के जरिए Challan ITNS 280 से सेल्फ-असेसमेंट टैक्स जमा करें और चालान की जानकारी अपने ITR में दर्ज करें। सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर इसे e-verify जरूर करें।

ओल्ड बनाम न्यू रिजीम: कौन सी रिजीम चुनें और कब?

फीचरओल्ड रिजीमन्यू रिजीम
स्टैंडर्ड डिडक्शन (सैलरी)₹50,000₹75,000
80C, 80D, 80Gछूट उपलब्ध हैउपलब्ध नहीं (धारा 80CCD(2) के तहत एम्प्लॉयर NPS योगदान और चुनिंदा बिजनेस क्लेम को छोड़कर)
होम लोन ब्याज (खुद के रहने वाले मकान पर)डिडक्शन की अनुमति; सीमित सेट-ऑफअनुमति नहीं; सेट-ऑफ भी नामंजूर

एक उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपकी सैलरी ₹15,00,000 है, सेक्शन 80C में ₹1,50,000 का निवेश है, सेक्शन 80D में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम ₹25,000 और होम लोन का ब्याज ₹2,00,000 है। ओल्ड रिजीम में ₹50,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम ₹10.75 लाख बनेगी। वहीं न्यू रिजीम में ये सभी छूट नहीं मिलतीं लेकिन ₹75,000 का डिडक्शन मिलता है, जिससे टैक्सेबल इनकम ₹14.25 लाख होगी। यानी इस स्थिति में ओल्ड रिजीम चुनना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

AIS/26AS जांच, 234A का ब्याज और रिफंड क्लेम

फाइलिंग से पहले AIS और TIS में बैंक ब्याज, ब्रोकर्स से मिले डिविडेंड और TDS की जानकारी अच्छी तरह चेक कर लें। कोई गड़बड़ी दिखे तो फाइल करने से पहले फीडबैक दें। अगर 31 अगस्त तक टैक्स बकाया रहता है, तो तुरंत सेल्फ-असेसमेंट टैक्स जमा करें; वरना फाइलिंग तक धारा 234A के तहत हर महीने 1% ब्याज जुड़ता जाएगा। रिफंड में किसी भी देरी से बचने के लिए पोर्टल पर अपना बैंक खाता पहले ही प्री-वैलिडेट (pre-validate) कर लें।

अगर आपसे कोई गलत जानकारी दर्ज हो गई है और रिटर्न अभी वेरिफाई नहीं हुआ है, तो पोर्टल के 'Discard Return' ऑप्शन से अमान्य ITR डिलीट करें और तय तारीख से पहले दोबारा फाइल करें। अगर रिटर्न वेरिफाई हो चुका है, तो दिए गए समय के भीतर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करें। ऐसा न कर पाने पर धारा 234F के तहत लेट फीस देकर 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न भरा जा सकता है।

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