नई दिल्ली। अगर आप चाहते हैं कि आपका निवेश डबल हो जाए, तो एक अच्छा मौका है। यहां पर सबसे जल्द पैसा डबल हो रहा है। पोस्ट ऑफिस में जहां पैसा 10 साल से ज्यादा में डबल होता है, वहीं 23 मार्च 2021 तक निवेश पैसे को केवल 87 माह यानी 7 साल और 3 माह में ही पैसा डबल कर सकते हैं। अगर आप भी निवेश के लिए इच्छुक हैं, तो आइये जानते हैं कि यह मौका कहां है और इसका पूरा डिटेल क्या है।
एनबीएफसी कंपनी आईआईएफएल दे रही है मौका
एनबीएफसी कंपनी आईआईएफएल अपना बांड ( नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर यानी एनसीडी) लेकर बाजार में आई है। यह निवेश के लिए खुल गया है। इस बांड में 23 मार्च 2021 तक निवेश किया जा सकता है। कंपनी ने कहा है कि बांड का ऐलाटमेंट पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि लोगों को जल्द से जल्द आवेदन करना चाहिए।
1000 करोड़ रुपये के बांड हो रहे हैं जारी
एनबीएफसी कंपनी आईआईएफएल 1000 करोड़ रुपये के बांड जारी कर रही है। इन बांड की लिस्टिंग बीएसई और एनएसई में कराई जाएगी। कंपनी ने इसके लिए लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अपना रजिस्ट्रार नियुक्त किया है।
कितने रुपये का है एक बांड
एनबीएफसी कंपनी आईआईएफएल अपने नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर यानी एनसीडी के तहत 1000 रुपये की फेसवैल्यू के बांड जारी करेगी। वहीं कंपनी ने इस एनसीडी में न्यूनतम 10 बांड के लिए आवेदन करने का नियम तय किया है। इस प्रकार इस एनसीडी में न्यूनतम 10,000 रुपये का निवेश करना होगा।
कैसे होगा आईआईएफएल के एनसीडी में पैसा डबल
एनबीएफसी कंपनी आईआईएफएल ने अपने नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर यानी एनसीडी में निवेश के तीन विकल्प दिए हैं। पहला है मासिक ब्याज लेने का विकल्प। दूसरा है सालाना ब्याज लेने का विकल्प। तीसरा विकल्प है 87 माह बाद निवेश किया गया पूरा पैसा वापस पाने का विकल्प। अगर कोई निवेशक इस एनसीडी में निवेश के बाद पूरा पैसा मैच्योरिटी पर लेता है हर 1000 रुपये के बांड के बदले कंपनी 2000 रुपये का भुगतान करेगी। जहां तक ब्याज दरों की बात है तो यह 10 फीसदी के हिसाब से दिया जाएगा।
जानिए इस बांड की रेटिंग
आईआईएफएल फाइनेंस को क्रिसिल से निगेटिव आउटलुक के साथ एए रेटिंग दी है। वहीं ब्रिकवर्क रेटिंग्स से इसे निगेटिव आउटलुक के साथ एए प्लस रेटिंग दी है। इसका मतलब हुआ कि क्रेडिट रिस्क कम है, लेकिन पूरी तरह से सुरक्षित भी नहीं है।
क्या होता है एनसीडी
नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर यानी एनसीडी फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है। इन्हें कोई भी कंपनी जारी कर सकती है। इनके जरिये कंपनियां निवेशकों से पैसा जुटाती है। कंपनियां बांड जारी करती है, जिसमें निवेश करने वालों को एक तय दर से ब्याज दिया जाता है। एनसीडी की अवधि फिक्स होती है। इनकी मैच्योरिटी पर निवेशकों को ब्याज के साथ मूल रकम वापस कर दी जाती है।
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