नई दिल्ली, अक्टूबर 26। पारंपरिक रूप से सोना भारतीय परिवारों के लिए सुरक्षित ऑप्शन रहा है। चीन के साथ ही भारत में साल दर साल सोने (गहने) की खपत बढ़ रही है। सोने की खास विशेषताएं, जो इसे भारतीयों के लिए आकर्षक बनाती हैं, उनमें मुद्रास्फीति से बचाव, शॉर्ट टर्म कैश लोन (उधार लेने) की क्षमता और नकदी के लिए बेचने की क्षमता (लिक्विडिटी) शामिल है। वहीं दूसरी तरफ है एक नया ऑप्शन 'क्रिप्टोकरेंसी'। निवेश के लिहाज से इनमें कौन सा ऑप्शन बेस्ट है, हम इस खबर में यही पता लगाने की कोशिश करेंगे।
निवेश का सही रास्ता
हाल के वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी की तरफ लोगों के बढ़ते आकर्षण को देखते हुए, सोने की इसके साथ तुलना करना और उनका मूल्यांकन करना और उन शर्तों को तय करना दिलचस्प है, जिन पर एक निवेशक किसी एक ऑप्शन को चुन सकता है। पहले बात करते हैं बिटकॉइन की, जो इस साल की शुरुआत में 65,000 डॉलर (48 लाख रु) के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गयी, लेकिन चीन की एक कार्रवाई के कारण मई में वापस 30,000 डॉलर तक गिर गयी। हालाँकि बिटकॉइन फिर से अपने ऑल टाइम हाई की तरफ लगातार बढ़ी रही है क्योंकि यह दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करना जारी रखे हुए है।
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अटकलें
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अटकलों और अस्थिरता से संबंधित चिंताएं मौजूद हैं। मगर वे निवेशक जो बिटकॉइन और एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी के साथ लंबे समय से मजबूती से बने हुए हैं, उन्हें इनसे बढ़िया रिटर्न मिला है। अगर किसी ने 1 साल सोने में 1000 रु लगाए होते तो आज वे 920 रु होते, चांदी में यह 849 रु, बिटकॉइन में 4159 रु और एथेरियम में 8094 रु हो गए होते।
मार्केट कैपिटल का फर्क
क्रिप्टोकरेंसी में अब संस्थागत निवेशकों का निवेश बढ़ रहा है। वीज़ा, पेपल और टेस्ला जैसी कंपनियां क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रही हैं और इन्हें वैश्विक रूप से अपनाने का मतलब है कि क्रिप्टोकरेंसी का ईकोसिस्टम बढ़ेगा। आज, सोने की मार्केट कैपिटल 10 अरब डॉलर है, जबकि क्रिप्टोकरेंसी के लिए यह आंकड़ा 2 अरब डॉलर का है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले पांच वर्षों में इस अंतर के काफी हद तक कम होने की उम्मीद करते है।
सुरक्षा कहां हैं
सोने (फिजिकल) को घर पर या बैंक लॉकर में रखना होता है। कोई भी बीमा प्रोडक्ट सोने के स्टोरेज को पूरा नहीं करता है। इसलिए यह हमेशा जोखिम भरा होता है। क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल वॉलेट में स्टोर किया जाता है जिसमें अक्सर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन होता है। इन्हें फिजिकल वॉलेट में भी सुरक्षित किया जा सकता है, जिन्हें फिजिकल सोने के समान सुरक्षित रखने की आवश्यकता होती है। कुछ वैश्विक कंपनियां आपके क्रिप्टो पोर्टफोलियो का बीमा करती हैं।
लिक्विडिटी और उधार लेने की क्षमता
क्रिप्टोकरेंसी एक दूसरे के बीच और भारतीय रुपये के साथ आसानी से विनिमेय होती हैं। फिजिकल सोने के उलट अंतर्राष्ट्रीय एक्सचेंज ग्राहकों को डिजिटल संपत्ति खरीदने की अनुमति देते हैं। पर बैंक सोने के बदले फौरन कैश देने को तैयार रहते हैं। कुछ प्रोडक्ट ऐसे हैं, जिनमें आप सोना रख कर ब्याज कमा सकते हैं। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि दोनों के अपने फायदे हैं। जरूरत ये है कि आपको अपनी जरूरत पहचाननी है। उसी हिसाब से इनमें से कोई एक ऑप्शन चुनें।
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