इन्वेस्को इंडिया फार्मा एंड हेल्थकेयर फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) आज यानी 18 अगस्त 2026 से निवेशकों के लिए खुल गया है। इस स्कीम में 1 सितंबर 2026 तक सब्सक्रिप्शन लिया जा सकता है। यह फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर पर केंद्रित एक ओपन-एंडेड इक्विटी थीमैटिक स्कीम है। इस फंड का बेंचमार्क BSE Healthcare Total Return Index है। निवेशक इसमें न्यूनतम ₹1,000 से शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि, रिस्क-ओ-मीटर पर इसे 'वेरी हाई' यानी अत्यधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।
रुपये की कमजोरी से फार्मा एक्सपोर्टर्स के मार्जिन को कुछ राहत मिली है, हालांकि इनपुट कॉस्ट बढ़ने की वजह से यह बढ़त थोड़ी सीमित रही। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) का मानना है कि रेगुलेटेड मार्केट्स की मांग और नई दवाओं की लॉन्चिंग से कंपनियों की कमाई को अच्छा सपोर्ट मिलेगा। हालांकि, अमेरिकी एफडीए (US FDA) की सख्त कार्रवाइयों से सप्लाई और बाजार के सेंटिमेंट पर असर पड़ सकता है। वहीं, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और PRIP जैसी सरकारी योजनाएं सप्लाई चेन के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो रही हैं।

Invesco India Pharma & Healthcare Fund NFO: किन्हें करना चाहिए निवेश?
ऐसे सेक्टोरल फंड्स में निवेश करते समय इन्हें अपने मुख्य पोर्टफोलियो के बजाय सैटेलाइट पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाएं और 5 से 7 साल का लंबा नजरिया रखें। मार्केट की टाइमिंग के रिस्क को कम करने के लिए किस्तों में SIP या सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए निवेश करना ज्यादा समझदारी होगी। NFO के दौरान SIP और ASBA दोनों विकल्प मौजूद हैं; दूसरी SIP की किस्त एनएफओ बंद होने के बाद कटेगी। ध्यान दें कि अगर आप 3 महीने के भीतर पैसे निकालते हैं, तो 0.50 फीसदी का एग्जिट लोड देना होगा।
डाइवर्सिफाइड SIP बनाम इनवेस्को इंडिया फार्मा एंड हेल्थकेयर फंड NFO
लगातार और स्थिर कंपाउंडिंग चाहने वाले ज्यादातर निवेशकों के लिए डाइवर्सिफाइड SIP ही सबसे बेहतर विकल्प मानी जाती हैं। अगर आप फार्मा सेक्टर में एक्सपोजर बढ़ाना चाहते हैं, तो इसमें सीमित रकम ही लगाएं या फिर कम लागत वाले फार्मा ETF या इंडेक्स फंड्स का विकल्प भी चुन सकते हैं। BSE Healthcare TRI को ट्रैक करने वाले ऑप्शंस में मोतीलाल ओसवाल का ETF और बंधन का इंडेक्स फंड शामिल हैं। एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स भले ही थोड़ा ज्यादा रिटर्न दे दें, लेकिन इनमें फंड मैनेजर का रिस्क और एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है।
टैक्स के नियम और आज ही कैसे करें अप्लाई?
अगर यह स्कीम इक्विटी-ओरिएंटेड फंड के तौर पर क्वालिफाई करती है, तो इस पर इक्विटी टैक्सेशन के नियम लागू होंगे। सेक्शन 111A के तहत शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस (STCG) पर 20 फीसदी का टैक्स लगेगा। वहीं, सेक्शन 112A के तहत ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा। अप्लाई करने के लिए अपनी KYC प्रक्रिया पूरी करें, डिमैट या स्टेटमेंट होल्डिंग का ऑप्शन चुनें और UPI या ASBA के जरिए आसानी से पेमेंट करें।
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