Ways to save tax through insurance: यह फिर से साल का वह समय है जब काफी बड़ी आबादी टैक्स को किस प्रकार बचाया जा सकता है, ऐसे विकल्पों की तलाश कर रही है। अपनी वित्तीय स्थिति की देखते हुए निवेश के उचित विकल्पों की तलाश करना जरूश्री है। आखिरकार, निवेश का प्राथमिक उद्देश्य बचत को अधिकतम करना और वित्तीय रूप से सुरक्षित होना होता है। टैक्स बचाने के लिए सबसे ज्यादा प्रिय तरीका इंश्योरेंस है। यह न केवल वित्तीय सुरक्षा की गारंटी देते हैं, बल्कि अच्छा टैक्स लाभ भी प्रदान करते हैं। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट्स विवेक जैन के अनुसार लोग बीमा के माध्यम से टैक्स की अच्छी बचत कर सकते हैं। इससे टैक्स छूट के अलावा अन्य कई लाभ भी मिलते हैं। आइये जानते हैं बीमा के माध्मय से कितनी तरह से टैक्स बचा सकते हैं।
यूलिप (सेक्शन 80सी और 10 (10डी)
यूलिप का विकल्प चुनने से न केवल टैक्स सेविंग में मदद मिलती है, बल्कि पैसे बढ़ाने और मुश्किल समय के लिए वित्तीय योजना बनाने में भी मदद मिलती है। यूलिप के लिए भुगतान किया गया प्रीमियम इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स डिडक्शन के लिए पात्र है। इसके अतिरिक्त, यूलिप पॉलिसी से मैच्योरिटी की राशि इनकम टैक्स की धारा 10 (10डी) के तहत टैक्स फ्री है। यह ध्यान देने योग्य है कि पारंपरिक पॉलिसियों की मैच्योरिटी राशि, जिसका संयुक्त प्रीमियम 5 लाख रुपये से अधिक है, वह टैक्सेबल होगी।

गारंटीड रिटर्न पॉलिसी (धारा 80सी और 10 (10डी))
अगर आप टैक्स बेनिफिट के लिए निवेश करने पर विचार कर रहे हैं तो गारंटीड रिटर्न पॉलिसी में इनवेस्ट करने पर जरूर विचार करना चाहिए। बाजार के रिस्क से दूर रहकर इनवेस्ट करने वाले निवेशकों के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है, क्योंकि यह पॉलिसी वित्तीय सुरक्षा के साथ-साथ टैक्स बेनिफिट की सुविधा भी देती है। पीपीएफ, एफडी और एनएससी जैसी पारंपरिक योजनाओं की तुलना में एक योग्य विकल्प मानी जाने वाली, गारंटीड रिटर्न पॉलिसी नियम और शर्तों के आधार पर 6 से 7.2% की उच्च रिटर्न दर प्रदान करती हैं। लॉन्गटर्म लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फायदेमंद, लंबी अवधि में अधिकतम रिटर्न प्राप्त करने के लिए एक गारंटीड रिटर्न पॉलिसी में निवेश करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, यह इंश्योरेंस बेनिफिट और वार्षिक प्रीमियम का 10 गुना लाइफ कवर के साथ आता है, जो धारा 10 (10)डी के तहत टैक्स फ्री है। यह पॉलिसी लाइफ इंश्योरेंस घटक होने के कारण धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स इन्सेंटिव भी प्रदान करती है।
हेल्थ इंश्योरेंस (धारा 80डी)
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हर किसी के पास होना बहुत ही आवश्यक है। जहां एक ओर, यह किसी बीमारी के कारण उत्पन्न होने वाले मेडिकल खर्चों को कवर करती है, वहीं दूसरी ओर, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 80D के तहत, पॉलिसीधारक टैक्स छूट भी कराता है। ऐसे पॉलिसीधारक को स्वयं, जीवनसाथी और आश्रित बच्चों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 25,000 रुपये तक की टैक्स छूट मिल सकती है। बीमाधारक उन माता-पिता के लिए जो सीनियर सिटीजन नहीं हैं भुगतान किए गए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम के खिलाफ 25,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का क्लेम कर सकता है। वहीं अगर एक या दोनों माता-पिता सीनियर सिटीजन हैं, तो 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का क्लेम कर सकते हैं। अपने और माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने पर नियम और शर्तों के अनुसार लगभग टैक्स कटौती में 75000 रुपये की बचत होती है।
टर्म इंश्योरेंस (धारा 80सी और 10 (10डी))
टैक्स-बचत के लिए यह काफी सामान्य निवेश होना चाहिए। किसी व्यक्ति के टर्म लाइफ प्लान के लिए भुगतान किया गया प्रीमियम इनकम टैक्स की धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स बेनिफिट के लिए पात्र है। इतना ही नहीं, यह लाभ धारा 10 (10डी) तक भी मिलता है, जिसमें पॉलिसीधारक की मृत्यु के मामले में इस योजना के तहत प्राप्त भुगतान भी पूरी तरह से टैक्स फ्री है। यह एक ऐसी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी है जो पॉलिसीधारक के परिवार की आर्थिक रूप से सुरक्षा करती है। पॉलिसीधारक की अचानक मृत्यु की स्थिति में यह योजना एक वित्तीय सुरक्षा उपकरण के रूप में कार्य करती है। इस प्रकार, एक टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ व्यक्ति की टैक्स बेनिफिट में भी मदद करती है।


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