25 अगस्त को सुबह 10:50 बजे भारतीय रुपया प्रति डॉलर 95.70 के आसपास ट्रेड कर रहा था। सेंट्रल बैंक के लगातार दखल से बाजार को थोड़ी मजबूती जरूर मिली है। कच्चे तेल में तेज उछाल के बाद भले ही थोड़ी राहत दिखी हो, लेकिन ब्रेंट क्रूड अभी भी $90 के निचले स्तरों में बना हुआ है, जिससे भारत का इंपोर्ट बिल दबाव में है। रुपये के 96 के करीब पहुंचने और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों के लिए अपनी एसेट्स को सुरक्षित (हेज) करने के विकल्प और बढ़ा दिए हैं।
शॉर्ट टर्म आउटलुक की बात करें तो ट्रेडर्स का कहना है कि सेंट्रल बैंक के एक्शन से रुपये की गिरावट 96 के ठीक नीचे थमी हुई है, जबकि कॉर्पोरेट्स की तरफ से डॉलर की मांग लगातार बनी हुई है। मई में लगा 96.96 का ऑल-टाइम लो अब भी निवेशकों के दिमाग में है। अगर ब्रेंट क्रूड $90 के पास टिका रहता है, तो आने वाले दिनों में रुपया 94 से 97 के दायरे में घूम सकता है, जिसमें इंट्राडे के दौरान बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

गोल्ड, USD ETF, इंटरनेशनल फंड्स और डेट: आज कहां लगाएं पैसा?
टैक्स बचत के मामले में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के जरिए सोने में निवेश सबसे बेहतरीन विकल्प है। हालांकि, इस पर मिलने वाला 2.5 फीसदी का सालाना ब्याज टैक्सेबल होता है, लेकिन अगर आपने इश्यू के समय सब्सक्राइब किया है और मैच्योरिटी तक इसे होल्ड रखते हैं, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाले रिटर्न पर कोई टैक्स नहीं लगता। वहीं गोल्ड ETF और इंटरनेशनल फंड्स आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होते हैं। 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए टारगेट-मैच्योरिटी गिल्ट फंड्स पर भी यही नियम लागू होता है। डॉलर में निवेश के लिए आप इंटरनेशनल फंड्स या NSE IFSC रिसीट्स का रास्ता चुन सकते हैं। ध्यान रखें कि LRS के तहत 10 लाख रुपये से ज्यादा भेजने पर 20 फीसदी TCS लागू होता है।
कमजोर रुपये के इस दौर में समझदारी से निवेश की जरूरत है। डॉलर से जुड़े फंड्स और गोल्ड ETF में सिस्टेमैटिक प्लान (SIP) अपनाएं ताकि करेंसी के उतार-चढ़ाव और वैल्यूएशन का एवरेजिंग का फायदा मिल सके। अगर आप शॉर्ट-टर्म गिल्ट फंड्स में पैसा लगाना चाहते हैं और यील्ड आपके नजरिए से मेल खाती है, तो एकमुश्त (लम्पसम) निवेश चुन सकते हैं। फिलहाल 10 साल वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.81 फीसदी के करीब है। याद रखें कि 2023 के बाद डेट फंड से होने वाली कमाई पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक टैक्स लगता है।
ब्याज दरें: डेट यील्ड बनाम बैंक FD बनाम FCNR(B)
| इन्वेस्टमेंट ऑप्शन | अनुमानित दर (25 अगस्त) | भारत में टैक्स नियम |
|---|---|---|
| बैंक FD (रेजिडेंट, बड़े प्राइवेट बैंक) | 2.75%–6.50% | टैक्स स्लैब के अनुसार |
| 10 साल का सरकारी बॉन्ड यील्ड | ~6.81% | डेट म्यूचुअल फंड पर स्लैब रेट; डायरेक्ट बॉन्ड पर नियमानुसार |
| FCNR(B) USD डिपॉजिट (3–5 साल) | ~6.25% | NRI रहने तक पूरी तरह टैक्स-फ्री |
पैसा पार्क करते समय इन बेंचमार्क दरों पर जरूर ध्यान दें। देश के बड़े बैंकों में रेजिडेंट्स को FDs पर 2.75 से 6.50 फीसदी का ब्याज मिल रहा है। हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद 3 से 5 साल की FCNR(B) डॉलर डिपॉजिट्स पर दरें बढ़कर लगभग 6.25 फीसदी हो चुकी हैं। गिल्ट यील्ड्स में पॉलिसी फैसलों के आसपास उतार-चढ़ाव आ सकता है, इसलिए अपने वित्तीय लक्ष्यों की अवधि के हिसाब से ही मैच्योरिटी पीरियड चुनें।
NRIs, छात्र और ट्रेवलर्स: USD, फॉरेक्स कार्ड और INR निवेश के विकल्प
अगर आप NRI हैं और रुपये व डॉलर डिपॉजिट में से किसी एक को चुनने की सोच रहे हैं, तो टैक्स और करेंसी के जोखिम पर जरूर ध्यान दें। जब तक आप नॉन-रेजिडेंट हैं, तब तक NRE और FCNR(B) अकाउंट्स पर मिलने वाला ब्याज भारत में टैक्स-फ्री रहता है। हालांकि, रुपये में कराई गई FD पर टैक्स लगता है। विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों और यात्रियों को ट्यूशन फीस या रहने के खर्च के लिए आरबीआई से मान्यता प्राप्त फॉरेक्स कार्ड और बैंक ट्रांसफर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रखें कि हर यात्रा के दौरान अपने साथ अधिकतम $3,000 कैश ही ले जाया जा सकता है, जबकि LRS योजना के तहत तय कामों के लिए सालाना $250,000 तक ट्रांसफर करने की अनुमति है।
मौजूदा माहौल में किसी एक एसेट क्लास पर बड़ा दांव लगाने के बजाय पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करना ही सबसे सही रणनीति है। गोल्ड और इंटरनेशनल फंड्स में टुकड़ों में (एसआईपी के जरिए) निवेश बढ़ाएं, और अपने लक्ष्यों के हिसाब से गिल्ट बॉन्ड्स में तय रिटर्न लॉक करें। अपने इमरजेंसी फंड को सुरक्षित और इंश्योर्ड बैंक एफडी में ही रखें। आजकल ज्यादातर ब्रोकर और बैंक ऐप्स पर गोल्ड ETF, SGB और इंटरनेशनल फंड्स में निवेश करना बेहद आसान है। इसके अलावा, डॉलर एक्सपोजर के लिए NSE IFSC ब्रोकर्स यूएस रिसीट्स खरीदने की सुविधा भी देते हैं।
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