18 सितंबर को समाप्त हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 14.9 अरब डॉलर घटकर 765.9 अरब डॉलर रह गया। यह नवंबर 2024 के बाद किसी एक हफ्ते में आई सबसे बड़ी गिरावट है। इस हफ्ते डॉलर के मुकाबले रुपया 95.6 से 96.2 के दायरे में ट्रेड करता दिखा और 25 सितंबर को यह 95.75 पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा भंडार घटने से अब किसी भी नए आर्थिक झटके के प्रति देश का आयात बिल (Import Bill) ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
आरबीआई (RBI) के आंकड़ों और मार्केट डीलरों के संकेतों से पता चलता है कि यह गिरावट डॉलर की बिकवाली और वैल्यूएशन में हुए नुकसान का नतीजा है। इसमें से करीब 10.9 अरब डॉलर की कमी संभवतः स्पॉट मार्केट में आरबीआई के हस्तक्षेप (डॉलर बेचने) के कारण आई है। डिपॉजिट स्वैप के दम पर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब रिजर्व में यह गिरावट देखी गई है। हालांकि, इस हफ्ते की निकासी के बावजूद भारत के पास विदेशी मुद्रा का बड़ा बफर मौजूद है। केंद्रीय बैंक फिलहाल डॉलर बटोरने के बजाय रुपये में मजबूती और स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहा है।

फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट: रुपया, ट्रैवल कार्ड और सोना—अब आपको क्या करना चाहिए?
विदेश पैसे भेजते समय एक बार में पूरा फंड ट्रांसफर करने के बजाय टुकड़ों में (Staggered Transfers) भेजें। बाजार में जब भी रुपये में थोड़ा सुधार दिखे, तुरंत ट्रैवल फॉरेक्स कार्ड लोड कर लें या टीटी (Telegraphic Transfer) का इस्तेमाल करें। अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करें और हिडन चार्ज समेत कुल लागत (All-in Cost) की जानकारी मांगें। टीटी सेलिंग रेट्स इंटरबैंक दरों के काफी करीब होते हैं और इनमें मार्जिन कम होता है, जबकि कार्ड और कैश ट्रांजैक्शन पर ज्यादा मार्कअप और एक्स्ट्रा फीस लगती है। कोई भी बुकिंग करने से पहले रेट अलर्ट सेट करना समझदारी होगी।
| रेट का प्रकार | कहां चेक करें | सामान्य मार्कअप |
|---|---|---|
| इंटरबैंक (Interbank) | मार्केट स्क्रीन या बैंक बेंचमार्क | बेसलाइन |
| टीटी सेलिंग (आउटरवर्ड) | बैंक फॉरेक्स/टीटी शीट | ~0.125–0.150% |
| कार्ड या करेंसी नोट्स | बैंक या मनी चेंजर का रेट | ~2–3.5% प्लस फीस |
सोना, इंपोर्टेड गैजेट्स और ईंधन: रुपये की गिरावट से जेब पर कितना पड़ेगा असर?
मई में कस्टम ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद सोना खरीदने वालों को अब ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ रहा है। नए टैक्स स्ट्रक्चर के तहत प्रभावी ड्यूटी अब लगभग 15 फीसदी बैठती है। जब तक रुपया स्थिर नहीं होता, तब तक सोने की कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद कम ही है। दूसरी ओर, विदेशी ब्रांड्स के इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स भी महंगे हो सकते हैं क्योंकि कंपनियां नई कीमतें तय कर सकती हैं। वहीं, डेली प्राइसिंग मैकेनिज्म के तहत पेट्रोल-डीजल की कीमतें इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की दरों और डॉलर-रुपये के एक्सचेंज रेट के हिसाब से तय होती हैं।
अगले 15 दिनों तक USD/INR दर, ब्रेंट क्रूड की चाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर नजर रखें। जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचें; सोना हो या महंगे गैजेट्स, इन्हें किश्तों में खरीदें। विदेश यात्रा पर जा रहे हैं तो मार्केट सुधरने पर ट्रैवल कार्ड पहले से लोड कर लें और बच्चों की ट्यूशन फीस भी टुकड़ों में भेजें। जिन छोटे और मध्यम कारोबारियों (SMEs) को डॉलर में पेमेंट करना है, उन्हें प्लेन-वैनिला फॉरवर्ड्स के जरिए हेजिंग करनी चाहिए। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी बहुत मजबूत स्थिति में है, इसलिए पैनिक करने के बजाय सही रणनीति के साथ आगे बढ़ें।


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