Income Tax Saving Tips: वित्तीय वर्ष 2024-25 का जल्द खत्म होने वाला है इसलिए टैक्स प्लानिंग पर ध्यान देना और भी जरूरी हो जाता है। इससे आपके पैसों की बचत होती है और साथ ही फाइनेंशियल हेल्थ भी आपकी बेहतर होती है। आप 31 मार्च की डेडलाइन से पहले टैक्स प्लानिंग के जरिए अपनी बचत को मैक्सिमाइज कर सकते हैं।

इन तरीकों से बचाएं टैक्स (Income Tax Saving Schemes)
धारा 80सी के तहत, आप 1.5 लाख रुपये तक की कर छूट का दावा कर सकते हैं। इसमें जीवन बीमा प्रीमियम, पीपीएफ में योगदान, यूएलआईपी प्रीमियम, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र, बच्चों की ट्यूशन फीस, ईएलएसएस म्यूचुअल फंड और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। यदि कोई प्रीमियम बकाया है, तो उसका भुगतान करने से आपको इस छूट का लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।
एनपीएस में निवेश (Income Tax Saving)
धारा 80सी छूट के अलावा, टैक्स बचत के कई रास्ते भी हैं। धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत एनपीएस में निवेश के लिए अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट मिलती है। यह धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट के अतिरिक्त है।
स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम
स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भी टैक्स-बचत का फायदा मिलता है। धारा 80डी के तहत, आप अपने और अपने जीवनसाथी या बच्चों और माता-पिता के लिए भुगतान किए गए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के लिए 25,000 रुपये की कटौती का दावा कर सकते हैं। सीनियर सिटीजन के लिए, यह छूट बढ़कर 50,000 रुपये हो जाती है। अगर आप और आपके माता-पिता दोनों 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, तो कुल छूट 1 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
होम लोन(Top income tax saving investments option)
अगर आपने घर खरीदा है, तो धारा 24बी के तहत होम लोन के ब्याज भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की कटौती की अनुमति है। पहली बार घर खरीदने वाले लोग धारा 80ईई के तहत 35 लाख रुपये से कम के लोन पर 50,000 रुपये की अतिरिक्त ब्याज छूट का फायदा उठा सकते हैं।
एजुकेशन लोन
एजुकेशन लोन पर भी टैक्स में छूट मिलती है। एजुकेशन लोन पर ब्याज धारा 80ई के अंतर्गत छूट मिलती होती है, जबकि दान धारा 80जी के अंतर्गत आता है।
बैंक जमा पर ब्याज छूट
आप धारा 80TTA के तहत बैंक जमा पर 10,000 रुपये तक की ब्याज छूट का दावा कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को धारा 80TTB के तहत 50,000 रुपये तक का दावा करने का फायदा है। इसके अलावा, रोजगार के दौरान प्राप्त भत्ते आयकर अधिनियम की धारा 10 और उसकी उपधाराओं के अनुसार छूट मिलती हैं।
भारत में आयकर अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के अंतर्गत इन छूटों और कटौतियों को समझकर, करदाता वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले अपनी टैक्स योग्य आय को प्रभावी ढंग से कम कर सकते हैं और अपनी बचत को अधिकतम कर सकते हैं।
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