Income Tax Department की सख्ती शुरू, ITR में फर्जी क्लेम पर SMS-Email अलर्ट, तुरंत करें सुधार

Income Tax Alert: देश में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वाले हजारों लोगों के लिए यह खबर बेहद अहम है। हाल के दिनों में बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स का रिफंड अटका हुआ है और इसके पीछे गलत तरीके से किए गए क्लेम एक बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अब ऐसे एजेंटों और दलालों के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को गलत रास्ता दिखाकर टैक्स बचाने का झांसा देते थे।

Income Tax Alert Fake ITR Claim Agents

एजेंटों का नेटवर्क कैसे काम करता था

जांच में सामने आया है कि कुछ एजेंट कमीशन के बदले टैक्सपेयर्स की ITR फाइल करते थे। ये एजेंट असली इनकम से ज्यादा डिडक्शन दिखाते थे या ऐसी छूट जोड़ देते थे, जिनका टैक्सपेयर्स से कोई लेना-देना नहीं होता था। इसका नतीजा यह होता था कि टैक्स कम बनता था और कई मामलों में गलत तरीके से रिफंड भी मिल जाता था। सबसे ज्यादा फर्जी क्लेम राजनीतिक दलों और कुछ चैरिटेबल संस्थाओं को दिए गए डोनेशन के नाम पर किए गए।

Income Tax Alert Fake ITR Claim Agents

सरकार क्यों हुई सख्त

सीबीडीटी की हालिया सलाह से साफ है कि सरकार अब इस तरह की गलत टैक्स प्लानिंग को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करना चाहती। टैक्स चोरी से सरकार को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से अब टेक्नोलॉजी के जरिए ऐसे मामलों पर नजर रखी जा रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

कैसे पकड़े जाते हैं फर्जी क्लेम

इनकम टैक्स विभाग अब एडवांस डेटा सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। जब किसी रिटर्न में डिडक्शन का पैटर्न सामान्य से अलग दिखता है, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेता है। इसके बाद बैंक रिकॉर्ड, फॉर्म 26AS, AIS, ट्रस्ट की जानकारी और अन्य वित्तीय डेटा से मिलान किया जाता है। जहां गड़बड़ी पाई जाती है, वहां सर्वे और तलाशी जैसी कार्रवाई भी की जाती है।

गलत क्लेम पर क्या सजा हो सकती है

अगर कोई व्यक्ति फर्जी डिडक्शन का दावा करता है, तो उसका क्लेम कैंसल कर दिया जाता है। इसके बाद अतिरिक्त टैक्स के साथ ब्याज भी देना पड़ता है। कई मामलों में टैक्स की रकम से दोगुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर यह साबित हो जाए कि जानबूझकर टैक्स चोरी की गई है, तो मामला गंभीर हो जाता है। ऐसे में कानूनी कार्रवाई और जेल तक की सजा भी हो सकती है।

ट्रस्ट और डोनर्स पर भी असर

फर्जी डोनेशन के मामलों में जिन ट्रस्ट या संस्थाओं के नाम सामने आते हैं, उनके रजिस्ट्रेशन पर भी खतरा मंडराने लगता है। इससे भविष्य में उन्हें मिलने वाले चंदे पर असर पड़ता है। वहीं डोनर्स के लिए भी बैंक और वित्तीय संस्थानों से लोन लेना मुश्किल हो सकता है।

टैक्सपेयर्स को मिला सुधार का मौका

सरकार ने ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए एक मौका भी दिया है। चुने गए लोगों को SMS और ईमेल के जरिए बताया जा रहा है कि वे अपनी ITR दोबारा जांच लें। अगर गलती से भी कोई गलत क्लेम हुआ है, तो समय रहते उसे सुधार लें।

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