इनकम टैक्स एक्ट 2025: आज की बैठक से बदलेगा आपका TDS? जानें क्या है नया नियम

संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति आज, 3 सितंबर को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक कर रही है। इस बैठक की मुख्य कार्यसूची डायरेक्ट टैक्स सुधारों और हाल ही में लागू हुए 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' के क्रियान्वयन की समीक्षा करना है। इस नए कानून ने 1961 के पुराने कानून की जगह ली है और यह 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है। बैठक से टैक्स दरों में किसी बड़े फेरबदल की जगह नियमों को लेकर स्पष्टता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका सीधा असर आपके हर महीने कटने वाले सैलरी TDS और वित्त वर्ष 2026–27 (FY 2026–27) के टैक्स रिटर्न पर पड़ने वाला है।

नौकरीपेशा करदाताओं के लिए वित्त वर्ष 2026–27 से जुड़े ज्यादातर अहम नियम पहले ही तय किए जा चुके हैं। नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) बाय डिफ़ॉल्ट लागू रहेगी और इसके टैक्स स्लैब एसेसमेंट ईयर 2027–28 में भी जारी रहेंगे। न्यू टैक्स रिजीम में ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन तो मिलता रहेगा, लेकिन सेक्शन 80C और 80D के तहत मिलने वाली अधिकांश कटौतियों का फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि, अगर करदाता चाहें तो सही प्रक्रिया का पालन कर पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) का विकल्प चुन सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट की सुविधा नहीं है।

Income Tax Act 2025: CBDT Meeting Updates and FY 2026-27 Tax Regime Guide for Salaried Employees

Income-tax Act 2025: आज संसदीय समिति किन मुद्दों पर दे सकती है सफाई?

हर महीने सही TDS कटौती के लिए कंपनियों को कर्मचारियों से समय पर टैक्स डिक्लेरेशन की जरूरत होती है। हालांकि, डिक्लेरेशन के दौरान चुनी गई व्यवस्था और अंतिम रिटर्न दाखिल करते समय आपके विकल्प में अंतर हो सकता है। CBDT ने साफ किया है कि एम्प्लॉयर को बताई गई टैक्स रिजीम ही कानूनी रूप से आपका अंतिम फैसला नहीं होती। बिजनेस इनकम वाले करदाताओं को नई व्यवस्था से बाहर (Opt-out) रहने के लिए ITR की अंतिम तिथि से पहले फॉर्म 10IEA दाखिल करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, पुरानी व्यवस्था चुनने वाले कर्मचारियों के HRA प्रूफ से जुड़े नियमों पर भी समिति से दिशानिर्देश मिलने की उम्मीद है।

Old vs new regime: FY 2026–27 के लिए दोनों व्यवस्थाओं का त्वरित मुकाबला

फीचर/नियमपुरानी व्यवस्था (Old regime)नई व्यवस्था (New regime)
बाय डिफ़ॉल्ट लागू (Default status)नहींहां
स्टैंडर्ड डिडक्शन₹50,000₹50,000
80C और 80D छूटउपलब्ध हैउपलब्ध नहीं है
HRA छूटसेक्शन 10(13A) के तहत उपलब्धउपलब्ध नहीं है
टैक्स स्लैब एक नज़र में0–2.5 लाख: 0%, 2.5–5 लाख: 5%, 5–10 लाख: 20%, 10 लाख से अधिक: 30%0–3 लाख: 0%, 3–6 लाख: 5%, 6–9 लाख: 10%, 9–12 लाख: 15%, 12–15 लाख: 20%, 15 लाख से अधिक: 30%

सैलरी का उदाहरण: FY 2026–27 में आपके TDS पर क्या पड़ेगा असर?

इसे एक उदाहरण से समझें। अगर आपकी सालाना सैलरी ₹12,00,000 है और ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, तो न्यू रिजीम के तहत आपकी टैक्स योग्य आय ₹11.5 लाख होगी। इस पर सेस मिलाकर कुल ₹85,800 टैक्स बनेगा। वहीं, अगर आप ओल्ड रिजीम चुनते हैं और 80C में ₹1.5 लाख, 80D में ₹25,000 और HRA के रूप में ₹1.8 लाख की छूट क्लेम करते हैं, तो आपका टैक्स घटकर ₹74,360 रह जाएगा। यानी हर महीने लगभग ₹953 कम TDS कटेगा। हालांकि, यह बचत आपके असल किराए और जमा किए गए प्रूफ पर निर्भर करेगी।

FY 2026–27: तुरंत निपटा लें ये जरूरी काम

अगली सैलरी पे-रोल कट-ऑफ से पहले अपने HR विभाग को अपनी टैक्स रिजीम के फैसले की जानकारी दे दें। यदि आप पुरानी व्यवस्था चुन रहे हैं, तो रेंट रसीद, रेंट एग्रीमेंट और नियमानुसार मकान मालिक का PAN समय से जमा करा दें। तिमाही समाप्त होने से पहले अपने AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) में दर्ज जानकारी का सही मिलान कर लें ताकि कोई अनबन न हो। बाद में फॉर्म 16 से भी इसका मिलान जरूर करें। बिजनेस इनकम वाले करदाता फॉर्म 10IEA की अंतिम तारीख को कैलेंडर में मार्क कर लें। समय रहते काम पूरा होने से AY 2027–28 में बिना किसी परेशानी के रिटर्न दाखिल किया जा सकेगा।

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