नयी दिल्ली। कोरोना और फिर लॉकडाउन के कारण पिछले साल बहुत सी आर्थिक अड़चनें आईं। बड़े स्तर पर वेतन में कटौती, कंपनियों में छंटनी, लिक्विडिटी की कमी और लोन चुकाने में दिक्कत, ये कुछ वे चीजें रहीं जिनसे सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हुए। इन दिक्कतों ने लंबे समय तक फाइनेंशियल तौर पर फिट रहने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय रणनीति बनाने की जरूरत को उजागर किया है। जिन लोगों ने बेहतरीन फाइनेंशियल प्लानिंग का पालन किया वे महामारी के बावजूद दूसरों की तुलना में बेहतर स्थिति में रहे। अगर आप वित्तीय तौर पर फिट रहना चाहते हैं तो अच्छी प्लानिंग करिए। हम आपको यहां 5 ऐसी चीजें बताएंगे, जो आपकी प्लानिंग में काम आएंगे।
लोन के लिए इमरजेंसी फंड
पिछले साल लोन चुकाना एक बड़ी मुसीबत रही। आरबीआई ने मोरेटोरियम दी, मगर उस अवधि के लिए ब्याज का मामला कोर्ट तक पहुंचा। ऐसी किसी भी स्थिति में लोन चुकाने में नाकामयाबी से बचने के लिए सबसे बढ़िया तरीका है कि एक इमरजेंसी फंड बनाएं। ये फंड आपको लोन की राशि के हिसाब से बनाना होगा। इमरजेंसी फंड सिर्फ लोन चुकाने तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें बाकी जरूरी देनदारियों को भी शामिल करें। इनमें बीमा प्रीमियम, घर का किराया और महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्यों के लिए मासिक योगदान शामिल हैं।
इक्विटी एसआईपी जारी रखें
बाजार में उठापटक के दौरान एसआईपी जारी रखना जरूरी है, क्योंकि इस समय क्वालिटी शेयर आकर्षक वैल्यू पर उपलब्ध होंगे। मंदी के समय निरंतर एसआईपी योगदान जारी रखने से किसी भी गिरावट पर आपको कम एनएवी पर अधिक इकाइयाँ मिलेंगी। यह तरीका किसी भी समय बाजार में निवेश लागत को और कम करने में मदद करता है।
निवेश की स्पीड बढ़ाएं
जिस समय बाजार में गिरावट हो उस समय एक बार में मोटा पैसा लगा कर इक्विटी म्यूचुअल फंड में अपना कुल निवेश बढ़ाएं। मगर इसके लिए इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल न करें। बल्कि अपने पास मौजूद अतिरिक्त राशि को म्यूचुअल फंड की बढ़िया इक्विटी योजना में लगाएं। बाजार में गिरावट के समय म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
पर्याप्त बीमा कवर रखें
अभी भी लोगों की बड़ी संख्या ऐसी है जो बीमा कवर नहीं लेते। कोरोना महामारी ने अपने और परिवार के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य कवर बनाए रखने की जरूरत पर भी प्रकाश डाला। महामारी के बीच अस्पताल में भर्ती होने की बढ़ती लागत से पता चला है कि अस्पताल में भर्ती होने का एक भी मामला जीवन भर की बचत को खत्म कर सकता है। इसलिए बीमा जरूरी है। इससे आप अस्पताल के खर्चों से बच सकते हैं।
इनकम और खर्चों की पूरी जानकारी रखें
ये काम सबसे पहले किया जाना चाहिए। अपनी आय और खर्चों की सूची तैयार करें। इनमें जरूरी खर्चों को पहले रखें। अपनी इनकम में से रोजाना के खर्चों को अलग रखें। इससे आपको आइडिया लग जाएगा कि जरूरी खर्चों के बाद आपके पास हर महीने कितने पैसे बचेंगे। इसके बाद आप निवेश, इमरजेंसी फंड और बाकी चीजों के लिए पैसा बांट सकते हैं। पहले खर्च करने के बाद बचे हुए पैसे सेविंग होते थे, मगर अब फॉर्मूला ये है कि पहले सेविंग करें और बचे हुए पैसों से अपना खर्च चलाएं।
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