Phone on EMI: भारतीय रिजर्व बैंक ने यह प्रस्ताव दिया है कि अगर कोई उधार लेने वाला, किसी मोबाइल फोन को खरीदने के लिए लिए गए लोन को चुकाने में डिफॉल्ट करता है, तो लोन देने वालों को उस फोन के कुछ फंक्शन बंद करने की अनुमति दी जाए। यह कदम एक बड़े ड्राफ्ट फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिसका मकसद लोन रिकवरी के तरीकों में सुधार करना और साथ ही उधार लेने वालों की सुरक्षा को मजबूत करना है।

ये ड्राफ्ट संशोधन RBI के 'जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण निर्देशों' (Responsible Business Conduct Directions) के तहत जारी किए गए हैं और 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे।
मोबाइल फोन कब बंद किया जाएगा?
इस प्रस्ताव के तहत, बैंक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके फाइनेंस किए गए मोबाइल डिवाइस के कुछ फंक्शन पर पाबंदी लगा सकते हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ बहुत सख्त नियमों के तहत ही किया जा सकता है। ड्राफ्ट निर्देशों के मुताबिक, बैंक किसी लोन अकाउंट पर पाबंदी तभी लगा सकते हैं, जब लोन चुकाने की तारीख 90 दिन से ज्यादा गुजर चुकी हो।
इससे पहले, जब लोन चुकाने की तारीख 60 दिन से ज्यादा गुजर जाए, तो बैंकों को एक नोटिस भेजना जरूरी होगा। इस नोटिस में कर्ज लेने वालों को बकाया चुकाने के लिए कम से कम 21 दिन का समय दिया जाएगा। कोई भी पाबंदी लगाने से पहले, सात दिन की मोहलत वाला दूसरा नोटिस भेजना भी जरूरी होगा।
EMI नहीं भरने पर फोन से क्या-क्या बंद हो जाएगा?
RBI ने लोन देने वालों को जरूरी सेवाओं को बंद करने से रोक दिया है। इंटरनेट एक्सेस, आने वाली कॉल, इमरजेंसी SOS फीचर, और सरकारी या सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नोटिफिकेशन को बंद नहीं किया जा सकता। बकाया चुकाए जाने के बाद, लोन देने वालों को एक घंटे के अंदर सभी पाबंदियां हटा देनी होंगी। गलत तरीके से ब्लॉक करने के मामलों में, लोन देने वालों को समस्या हल होने तक लोन लेने वालों को हर घंटे 250 रुपये का मुआवजा देना होगा। डिवाइस पर पाबंदी लगाने के लिए इस्तेमाल की गई किसी भी टेक्नोलॉजी को, लोन पूरी तरह चुकाए जाने के बाद अनइंस्टॉल कर देना होगा।


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