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Income Tax : महिलाओं की घरेलू बचत पर बड़ा फैसला, होगा लाखों का फायदा

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नई दिल्ली, जून 22। महिलाएं कामकाजी न हों, फिर भी उनके पास बचे पैसे उनकी ही कमाई मानें जाएंगे। आयकर विभाग की एक अपीलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) बेंच ने ऐसा फैसला दिया है। यह फैसला न सिर्फ घरेलू महिलाओं को 2.5 लाख रुपये की बचत को वैधता देता है, बल्कि महिलाओं के घर के काम को सम्मान भी देता है। इस बेंच ने माना है कि महिलाएं एक एक पैसे को बचने के लिए बड़ा संघर्ष करती हैं। यह एक एक पैसा बचाने के लिए दुकनदरों से मोलभाव करती हैं, कई बार सामान लेने रिक्शे से जाने की वजाह पैदल ही चली जाती हैं। ऐसे में अगर वह अपनी साल में 2.5 लाख रुपये तक की बचत कर लेत हैं, तो इसके अतिरिक्त कमाई नहीं माना जा सकता है। इसलिए ऐसी महिलाएं 2.5 लाख रुपये की आयकर की छूट की हकदार हैं।
आइये जानते हैं कि क्या है यह पूरा मामला।

 

पहले जानिए क्या है पूरा मामला

पहले जानिए क्या है पूरा मामला

यह मामला आगरा का है। साल 2016 में नोटबंदी के बाद एक घरेलू महिला ने अपने बैंक खाते में 2,11,500 रुपये के पुराने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट जमा कराए थे। महिला ने इन पैसों को अपना बताया था। जब महिला ने इस पैसों को बैंक में जमा किया, तो आयकर विभाग ने इसे अतिरिक्त इनकम माना था। बाद में इन पैसों पर इनकम टैक्स की डिमांड की। महिला आयकर विभाग के इस आदेश के बाद इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में गई। आगरा स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के एक बेंच ने माना है कि महिलाएं घर चलाते समय कुछ न कुछ पैसे बचाती हैं। साथ ही उन्हें पति से भी कुछ पैसे मिलते हैं। इसके साथ ही बच्चों को घर आने वाले रिश्तेदारों से भी पैसे मिलते हैं। यह पैसे भी महिला की बचत ही माने जाते हैं। ऐसे में इस तरह बचाई रकम को इनकम टैक्स विभाग उस महिला की आमदनी नहीं बता सकता।

आईटीएटी ने दिया फैसला
 

आईटीएटी ने दिया फैसला

आगरा स्थित आईटीएटी में न्यायिक सदस्य ललित कुमार और लेखा सदस्य डा. मीठा लाल मीणा ने पूरा मामला सुनने के बाद कहा है कि नोटबंदी के समय उक्त महिला ने जो 2,11,500 की रकम जमा कराई, वह 2.5 लाख रुपये की सीमा के अंदर है। इसलिए इसे अतिरिक्त आमदनी नहीं माना जा सकता है। ऐसे में इस पर टैक्स भी नहीं लगाया जा सकता है। ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार महिला ने यह रकम अपने पति, बच्चों और रिश्तेदारों से मिली छोटी-छोटी रकम को जोड़ कर बचाई है। आयकर रिटर्न में इसका पूरा विवरण भी दिया गया है। ऐसे में इसे मानने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए इस पर आयकर नहीं वसूला जा सकता है।

जानिए और क्या कहा

जानिए और क्या कहा

बेंच ने यह है कि इस मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि महिला के पास कमाई का कोई जरिया नहीं था। गृहिणी सालों से परिवार में कई आर्थिक काम करती आ रही हैं। बेंच ने कहा कि अगर हम बहस के लिए इस ब्यौरे को दरकिनार भी कर देते हैं, तो असेसिंग अधिकारी को इसके पुख्ता सबूत देने होंगे कि बैंक में जमा रकम अघोषित आय थी। इसे किसी कारोबार या अन्य तरीके से कमाया गया था। अथॉरिटी की तरफ से इस बारे में कोई सबूत नहीं दिया गया है। ऐसे में यह आमदनी महिला की ही है, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगाया जा सकता है।

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जानिए केस की रोचक बातें

जानिए केस की रोचक बातें

इस मामले में सुनवाई के दौरान घरेलू महिलाओं को लेकर रोचक बातें सामने आईं। इस दौरान कहा गया कि महिलाओं के पास घर को चलाने के लिए कई जिम्मेदारियां होती हैं। घर के रोज सैकड़ों काम करने होते हैं। सुबह से उनका काम शुरू होता है तो देर शाम तक चलता रहता है। इस बीच वह राशन लेती हैं, दूध-अंडे-ब्रेड खरीदती हैं। फल-सब्जी खरीदती हैं। कुछ खराबी हो तो प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन से काम कराती हैं। इस तरह के काम में मोल-भाव करके कुछ पैसे बचा लेती हैं। कोई रिश्तेदार आया या कहीं जाना हुआ तो बच्चों को या उन्हें कुछ नकद पैसे मिल जाते हैं। इसे भी गुल्लक में ही डाल दिया जाता है। इसी तरीके से कोई कोई गृहिणी हजारों ही नहीं एक या दो लाख रुपये भी बचा लेती हैं।

English summary

Housewife savings cannot be treated as extra income

The income tax department had imposed tax on Rs 2,11,500 deposited by the woman during demonetisation, which was removed by ITAT.
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