नयी दिल्ली। क्या आपने होम लोन लिया हुआ है? अगर हां तो क्या आप जानते हैं कि आप किस तरीके से ब्याज चुका रहे हैं? अगर नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं आरबीआई का वो नियम जिससे आप पर ब्याज और ईएमआई दोनों का बोझ कम हो जाएगा। आरबीआई ने लोन मूल्य निर्धारण (Loan Pricing) का तरीका ग्राहकों के लिए आसान और पारदर्शी बनाने के लिए इसे एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट्स (ईबीआर) से लिंक करने की शुरुआत की थी। मगर कई बैंक ऐसे हैं जिन्होंने आरबीआई के इस निर्देश की जानकारी ग्राहकों तक सही से नहीं पहुंचाई। आरबीआीई के निर्देश के मुताबिक लोन मूल्य निर्धारण को ईबीआर से अक्टूबर 2019 से ही लिंक किया जाना था। जानकार भी नए ब्याज दर सिस्टम को ग्राहकों के लिए अच्छा बताते हैं। मगर यदि आपने लोन लिया हुआ है तो आप खुद नई व्यवस्था में दाखिल नहीं हो सकते, क्योंकि आपके लोन का एग्रीमेंट पूरी अवधि के लिए है। मगर आप अपने बैंक से आरएलएलआर (रेपो रेट लिंक्ड रेट) का ऑप्शन चुनने के लिए कह सकते हैं। यही वो सिस्टम है जिससे आप पर ईएमआई का भार कम होगा।
क्या है इंटर्नल और एक्सटर्नल बेंचमार्क तरीका
पहले आपको ब्याज दरों का तरीका जानना होगा। दरअसल बैंक पुराने सिस्टम में दो तरीकों से ब्याज दर तय करते हैं। इनमें अप्रैल 2016 से पहले लोन लेने वालों के लिए आधार दर यानी बेस रेट और अप्रैल 2016 के बाद एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट) पर ब्याज तय होता है। ये दोनों बैंकों की इंटर्नल बेंचमार्किंग ब्याज दर हैं। मगर इसे ग्राहकों के लिए सही न पाते हुए आरबीआई ने एक्सटर्नल बेंचमार्किंग शुरू की, जो सीधे आरबीआई की रेपो रेट से जुड़ी होती है। कोरोनावायरस के प्रभाव को देखते हुए आरबीआई ने रेपो रेट कम की, जिससे आरएलएलआर भी कम हुई। पर एमसीएलआर पर ऐसा नहीं होता।
ऐसे करें आरएलएलआर के लिए आवेदन
कोरोनावायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन है। लोगों के जरूरी काम भी रुके हुए हैं। मगर आप इस नये ब्याज दर सिस्टम में शिफ्ट करने के लिए घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने बैंक से ई-मेल या कॉल के जरिए बात करके ये जानकारी हासिल करें कि क्या नये ब्याज दर सिस्टम में शिफ्ट करने का कोई ऑनलाइन प्रोसेस है या नहीं। वैसे यहां एक गौर करने वाली है कि अगर आपका काम बैंक अपनी ब्रांच तक सीमित होगा तो ये आसानी से हो जाएगा। बल्कि ये घर बैठे ही संभव है। मगर लोन ट्रांसफर करवाने में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। बेस्ट ऑप्शन यही है कि आपका लोन आरएलएलआर के दायरे में आ जाए।
क्या होगा इसका फाएदा
ये देखा गया है कि आरबीआई के रेपो रेट कम करने का बैंक पूरा फायदा एमसीलआर घटा कर ग्राहकों को नहीं देते, मगर आरएलएलआर का सबसे बड़ा फायदा होगा कि आपको रेपो रेट कम होने का पूरा पूरा फायदा मिलेगा। वैसे भी आरबीआई का नियम है कि ब्याज दर के नए सिस्टम में शिफ्ट करने के लिए बैंकों को ग्राहकों की सहायता करनी होगी। मगर इसके लिए बैंक आपसे एक बार लिया जाने वाला सर्विस चार्ज ले सकता है। एक बात और कि आरबीआई का नया सिस्टम सिर्फ बैंक लोन ग्राहकों के लिए है। एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां) पर ये लागू नहीं होगा।


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