Home Loan Default: आज के समय में घर खरीदने का सपना ज्यादातर लोग होम लोन के जरिए पूरा करते हैं। ये लोन आम तौर पर लंबे समय के होते हैं और इनकी EMI (मासिक किस्त) भी ज्यादा होती है। लेकिन क्या हो अगर अचानक आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाए और आप EMI चुकाने में असमर्थ हो जाएं?
ऐसी स्थिति में आपको लोन डिफॉल्टर माना जा सकता है। लेकिन डिफॉल्टर बन जाने का मतलब ये नहीं कि आपके पास कोई रास्ता नहीं बचता। बैंक की ओर से कुछ राहत के मौके दिए जाते हैं, जिनके बारे में जानना जरूरी है।

डिफॉल्टर कब माना जाता है कोई व्यक्ति?
अगर कोई व्यक्ति लगातार तीन महीनों तक EMI का भुगतान नहीं करता, तो बैंक उस लोन को NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर देता है। यानी बैंक को लगता है कि उस लोन से अब समय पर पैसे नहीं मिलेंगे। इसके बाद लोन लेने वाले व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है।
क्या EMI चूकने के बाद तुरंत होगी संपत्ति ज़ब्त?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं होता। बैंक किसी भी लोन डिफॉल्टर की संपत्ति जब्त करने से पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाता है। सबसे पहले बैंक एक नोटिस भेजता है जिसमें उधारकर्ता को बकाया चुकाने के लिए 60 दिनों का समय दिया जाता है। इसके साथ ही बैंक आम तौर पर 2-3 बार रिमाइंडर कॉल या नोटिस के जरिए स्थिति सुधारने का मौका देता है।
6-7 महीने मिलते हैं सुधार का मौका
अगर उधारकर्ता गंभीरता से समाधान निकालना चाहता है, तो बैंक उसे लगभग 6 से 7 महीनों तक का समय देता है। इस दौरान वह चाहे तो EMI को री-शेड्यूल करवा सकता है या फिर बैंक से कुछ समय की मोहलत मांग सकता है। कई बार बैंक किस्तों को कम करने या नई शर्तों के तहत लोन को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हो जाते हैं।
प्रॉपर्टी की नीलामी कब होती है?
जब बार-बार मौका देने के बाद भी लोन की अदायगी नहीं होती, तो बैंक कानूनी रूप से प्रॉपर्टी को जब्त करने और फिर नीलामी के जरिए लोन वसूली की प्रक्रिया शुरू कर देता है। जो भी रकम नीलामी से मिलती है, उससे लोन की भरपाई की जाती है। अगर नीलामी की राशि कम पड़ती है, तो बाकी पैसा उधारकर्ता से वसूला जा सकता है।
डिफॉल्टर बनने के बड़े नुकसान
क्रेडिट स्कोर गिरता है, जिससे भविष्य में कोई भी लोन लेना मुश्किल हो जाता है। मानसिक तनाव बढ़ जाता है, खासकर जब रिकवरी एजेंट्स संपर्क करने लगते हैं। घर खोने का डर परिवार और व्यक्तिगत जीवन पर गहरा असर डाल सकता है। भविष्य में किसी भी वित्तीय संस्था से क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन लेना लगभग नामुमकिन हो सकता है।
लोन डिफॉल्ट से कैसे बचें?
अगर किसी कारण EMI देना मुश्किल हो रहा है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। लोन को री-स्ट्रक्चर करने का अनुरोध करें या EMI मोरेटोरियम का विकल्प देखें। घर के किसी सदस्य या मित्र से आर्थिक सहायता लें ताकि समय पर किस्त दी जा सके। अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो, तो समय रहते प्रॉपर्टी बेचकर लोन की अदायगी कर दी जाए।
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