आजकल बैंक और फाइनेंस कंपनियां 7% की शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन के विज्ञापन दे रहे हैं, जिससे लोन लेने वाले अपनी गणित दोबारा लगाने लगे हैं। 20 साल के लिए 50 लाख रुपये के लोन पर अगर ब्याज दर 8.5% से घटकर 7% हो जाए, तो आपकी हर महीने की किस्त (EMI) में करीब ₹4,590 की बचत होती है। हर महीने का यह फर्क बैलेंस ट्रांसफर के फैसले को सही ठहरा सकता है, लेकिन इसके लिए आपको प्रोसेसिंग और अन्य चार्जेस का हिसाब भी लगाना होगा। आइए समझते हैं कि अलग-अलग दरों पर EMI कितनी बनेगी और लोन ट्रांसफर करना कब फायदेमंद रहेगा।
ज्यादातर नए होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, जो आमतौर पर आरबीआई की रेपो रेट पर निर्भर करते हैं। आपकी कुल ब्याज दर बेंचमार्क रेट और आपके क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर तय स्प्रेड को मिलाकर बनती है। विज्ञापनों में दिख रही सबसे कम ब्याज दर अमूमन बेहतरीन क्रेडिट स्कोर वाले लोगों के लिए होती है। इसलिए लोन लेने या बदलने से पहले रीसेट फ्रीक्वेंसी (ब्याज दर बदलने की समय सीमा), टॉप-अप के बाद मार्जिन में बदलाव और प्रोसेसिंग फीस की छूट को अच्छी तरह जांच लें। सिर्फ हेडलाइंस देखकर फैसला न करें, बल्कि सरकारी और प्राइवेट बैंकों के ऑफर्स की कुल लागत की तुलना करें।

7% से 8.5% ब्याज दर पर कितनी बनेगी होम लोन EMI?
| लोन अमाउंट | 7.0% पर EMI (20 साल) | 7.75% पर EMI (20 साल) | 8.5% पर EMI (20 साल) |
|---|---|---|---|
| ₹30,00,000 | ₹23,274 | ₹24,627 | ₹26,028 |
| ₹50,00,000 | ₹38,790 | ₹41,045 | ₹43,380 |
| ₹75,00,000 | ₹58,185 | ₹61,568 | ₹65,070 |
20 साल की अवधि वाले लोन में ब्याज दर 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) बढ़ने पर हर लाख रुपये पर करीब ₹30 प्रति महीना अतिरिक्त देने होते हैं। उदाहरण के लिए, 50 लाख रुपये के लोन पर 0.50% का अंतर हर महीने लगभग ₹1,500 का फर्क डालता है। लोन ट्रांसफर सही है या नहीं, यह जानने के लिए बैलेंस ट्रांसफर के कुल खर्च को हर महीने होने वाली EMI बचत से भाग दें। अगर लागत की भरपाई में लगने वाला समय आपके लोन चुकाने की योजना से अधिक है, तो ट्रांसफर न करना ही समझदारी है।
बैलेंस ट्रांसफर: चार्जेस, शर्तें और जानिए कब लोन बदलना फायदेमंद है
लोन ट्रांसफर करते वक्त प्रोसेसिंग फीस, लीगल व वैल्युएशन चार्ज, डॉक्यूमेंटेशन, CERSAI फीस और राज्य के स्टाम्प ड्यूटी या MODT चार्ज का ध्यान रखें। होम लोन से जुड़ी इंश्योरेंस पॉलिसी वैकल्पिक होती हैं, अगर ये वास्तविक ब्याज छूट के बदले दी जा रही हों तो इन्हें मना कर दें। लोन ट्रांसफर के लिए पांच कदम उठाएं: सबसे पहले मौजूदा बैंक से फोरक्लोजर स्टेटमेंट और एमॉर्टाइजेशन शेड्यूल लें। इसके बाद नए बैंक से पक्का कोटेशन लें, फीस माफी पर बात करें और सारे फीस चार्ज स्पष्ट होने के बाद ही दस्तखत करें। ध्यान रखें, बैलेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया लोन की शुरुआत में या ब्याज दरों में बड़ा अंतर होने पर ही सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होती है।
नौकरीपेशा और कारोबारियों के लिए जरूरी दस्तावेज
नौकरीपेशा लोगों को आवेदन के लिए KYC दस्तावेज, पिछले 3 से 6 महीने की सैलरी स्लिप, 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16, रोजगार प्रमाण पत्र और प्रॉपर्टी के कागजात देने होंगे। वहीं स्व-रोजगार वाले (Self-employed) लोगों के लिए KYC, 2 से 3 साल का आईटीआर (ITR), ऑडिटेड फाइनेंशियल रिपोर्ट्स, जीएसटी रिटर्न, 12 महीने का बैंक स्टेटमेंट, बिजनेस प्रूफ और प्रॉपर्टी पेपर्स जरूरी हैं। एक शानदार क्रेडिट स्कोर होने से आपको बेहतर ब्याज दर (लो स्प्रेड) और आसान प्रोसेसिंग का फायदा मिलता है।
आजकल विज्ञापनों में दिखने वाले शुरुआती रेट केवल बातचीत का रास्ता खोलते हैं, वे अंतिम ऑफर नहीं होते। बैंक से हमेशा लागू होने वाली सही ब्याज दर (Effective Rate), रीसेट साइकिल और लिखित में फीस स्ट्रक्चर मांगें। दस्तावेज साइन करने से पहले लागत और बचत की गणित जरूर लगाएं और गैर-जरूरी प्रोडक्ट्स (क्रॉस-सेल) लेने से बचें। अगर लोन ट्रांसफर का खर्च कुछ ही महीनों की EMI बचत से पूरा हो जाता है, तो लोन बदलना बिना किसी छिपे नुकसान के आपकी मंथली EMI का बोझ काफी कम कर सकता है।


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