Health Insurance: मान लीजिए आप कुछ दिनों से अस्पताल में हैं और जब आप स्वस्थ हो जाते हैं, तो आप घर जैसा आराम चाहते हैं। दोपहर में डॉक्टर एक राउंड पर आता है और आपको डिस्चार्ज करने की जानकारी देता है।
आप अपना सामान पैक करते हैं क्योंकि आप आखिरकार घर जा सकेंगे, लेकिन फिर अस्पताल का स्टाफ आपको कुछ और समय तक इंतजार करने के लिए कहता है।

आप अपने परिवार के सदस्यों को इधर-उधर भागते और बिलों का भुगतान करवाने के लिए हजारों कॉल करते हुए देख सकते हैं।
शाम के 7 बज चुके हैं और आप अभी भी अस्पताल में फंसे हुए हैं लेकिन आपका स्वास्थ्य बीमा क्लेम अभी तक क्लियर नहीं हुआ है। जब तक बीमाकर्ता बिलों पर हस्ताक्षर नहीं कर देता, तब तक अस्पताल आपको डिस्चार्ज नहीं करेगा।
अगर इसमें कुछ और घंटे लगते हैं, तो आपको अस्पताल में एक और रात बितानी पड़ सकती है और इससे आपका अस्पताल का बिल भी बढ़ जाएगा। खैर, यह कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन हाल ही में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर एक बढ़ी जानकारी दी है।
IRDAI ने जारी किया है ये सर्कुलर
IRDAI ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम प्रसोस को सरल बनाने के लिए एक मास्टर सर्कुलर जारी किया है। पहले, क्लेम अप्रूवल में देरी के कारण मरीजों को अस्पताल में अधिक समय तक रहना पड़ता था। अब, बीमाकर्ताओं के पास कैशलेस डिस्चार्ज अनुरोधों को अप्रूव करने के लिए तीन घंटे हैं। इसके अतिरिक्त, देरी के कारण बीमाकर्ता अतिरिक्त हॉस्पिटल चार्ज को भी भरेगा।
आपको बता दें कि हाल ही में स्वास्थ्य बीमा नियमों में IRDAI ने बीमा कंपनियों को सर्कुलर जारी कर कहा है कि 3 घंटे में कैशलेस क्लेम क्लियर करना होगा।
तीन घंटे के अंदर करना होगा कैशलेस क्लेम को क्लियर
IRDAI ने कैशलेस दावों को मंजूरी देने के लिए समय सीमा तय की है। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारकों के लिए इस थकान के क्लेम के अनुभव को बदलने के लिए, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने कहा है कि बीमाकर्ता को अस्पताल से डिस्चार्ज अनुरोध प्राप्त होने के तीन घंटे के भीतर अंतिम प्राधिकरण प्रदान करना होगा।
सर्कुलर में यह भी जानकारी दी गई है कि किसी भी स्थिति में पॉलिसीधारक को अस्पताल से छुट्टी मिलने का इंतजार नहीं करना होगा।
यदि तीन घंटे से अधिक की देरी होती है, तो अस्पताल द्वारा ली जाने वाली अतिरिक्त राशि, यदि कोई हो, बीमाकर्ता द्वारा शेयरधारक के फंड से लिया जाएगा।
उपचार के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु की स्थिति में, बीमाकर्ता क्लेम अप्रूवल प्रोसेस के अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई करेगा। साथ ही पार्थिव शरीर(मृत व्यक्ति का शरीर) को तुरंत अस्पताल से निकलवाएगा।
इसके अलावा, नियामक ने बीमाकर्ताओं से समय सीमा के अंदर 100% कैशलेस क्लेम सेटलमेंट हासिल करने का प्रयास करने की भी जानकारी दी है।
एमेरजेंसी केस में, बीमाकर्ता को अनुरोध प्राप्त होने के एक घंटे के अंदर तुरंत कैशलेस प्राधिकरण के अनुरोध पर निर्णय लेना चाहिए।
IRDAI ने बीमाकर्ताओं से यह लक्ष्य पूरा करने के लिए 31 जुलाई, 2024 तक तुरंत आवश्यक चीजों को स्थापित करने को भी कहा। बीमाकर्ता कैशलेस क्लेम और सहायता के लिए अस्पताल में हेल्प डेस्क की व्यवस्था कर सकते हैं। इसके अलावा प्री- ऑथराइजेशन प्रोसेस के लिए डिजिटल मोड का यूज करने का सुझाव दिया गया है।
More From GoodReturns

सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: 1 सितंबर को जानें अपने शहर में 22K और 24K के ताजा रेट

FD की नई दरें: इन 4 बैंकों में सीनियर सिटीजन्स को मिल रहा 8.30% तक ब्याज, जानें निवेश का सही तरीका

आज 31 अगस्त को सोने के दाम स्थिर, खरीदारी से पहले जानें 22 और 24 कैरेट के ताजा रेट

LIC की नई पॉलिसी लॉन्च: 'बीमा प्लेटिनम' और 'जीवन रक्षा' में से कौन सी है आपके लिए बेस्ट?

EPFO Enrollment Campaign 2026: पीएफ से छूटे कर्मचारियों के लिए आखिरी मौका, 31 अक्टूबर तक करें आवेदन

पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी: आज आपके शहर में क्या है कीमत? जानें पूरा गणित

Gold Price 2 सितंबर को सोने-चांदी के भाव में स्थिरता, क्या आज खरीदारी करना है फायदे का सौदा? जानें ताजा रेट

3 सितंबर को सोने के दाम स्थिर: क्या आज खरीदारी करना सही फैसला है? जानें ताजा रेट

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: 4 सितंबर को आपके शहर में बैंक बंद या खुले? चेक करें पूरी लिस्ट

गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर को बंद रहेगा शेयर बाजार, NSE-BSE की छुट्टी से ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?

GST कलेक्शन का धमाका: ₹2 लाख करोड़ के करीब पहुंचा आंकड़ा, इन सेक्टर्स में मचेगी हलचल!



Click it and Unblock the Notifications
