Health Insurance Claim Process: प्रदीप एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है। उन्होंने करीब 5 महीने पहले 20 लाख रुपये का एक हेल्थ इंश्योरेंस लिया था। इंश्योरेंस लेने के करीब 4 महीने बाद उन्हें पेट के पास दर्द हुआ। डॉक्टर ने कुछ टेस्ट लिखे। टेस्ट रिपोर्ट से पता चला कि उनके पेट में स्टोन है। डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी।

जब उन्होंने इंश्योरेंस कंपनी को इस ऑपरेशन की बात बताई तो कंपनी ने टेस्ट रिपोर्ट मांगी। बाद में कंपनी ने यह कहकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया कि स्टोन की बीमारी काफी पुरानी है, जिसके बारे में उन्होंने कंपनी को जानकारी नहीं दी थी। नतीजा हुआ कि प्रदीप को पूरी रकम खुद भरनी पड़ी।
ऐसा कभी आपके साथ न हो इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन बातों का ध्यान आपको रखना चाहिए ताकि आपका मेडिकल क्लेम रिजेक्ट न हो।
सभी डॉक्यूमेंट्स का रखें ध्यान
आपके अकेले का हेल्थ इंश्योरेंस हो या फैमिली फ्लोटर या परिवार के सभी सदस्यों का अलग-अलग, इसके बारे में आपको फैमिली में जानकारी देनी चाहिए। इसके बाद जिन-जिन के नाम हेल्थ इंश्योरेंस है या इंश्योरेंस में शामिल हैं, उन सभी के इन डॉक्यूमेंट्स की फोटो काॅपी के अलग-अलग सेट बना लें और अलग-अलग करके रख लें।
सेट बनाकर रखने से इमरजेंसी में परिवार के सदस्य जरूरत पड़ने पर निकालकर अस्पताल को दे सकते हैं क्योंकि भर्ती के दौरान ये सारे डॉक्यूमेंट्स अस्पताल में जमा कराने पड़ते हैं।
ईटी वेल्थ द्वारा किए गए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 88% पॉलिसीधारकों को इंश्योरेंस क्लेम में समस्या का सामना करना पड़ा है, जिनमें से 59% ने दावा अस्वीकृति और आंशिक भुगतान के मुद्दों का हवाला दिया है।
क्लेम प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी है जरूरी
किसी भी हेल्थ इश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी खरीदते समय आपको उस पॉलिसी के सेटलमेंट रेसियो और क्लेम प्रक्रिया के बारे में जरूर जानकारी ले लेनी चाहिए। ताकि आप किसी बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले क्लेम प्रोसेस को आसानी से कर सकें।
इसके लिए आपको अप्रूवल, जरूरी दस्तावेज, वेरीफिकेशन, TPA डिटेल समेत सभी जरूरी प्रक्रिया के बारे में जान लेना चाहिए। इसके अलावा आपको बीमा कंपनी से उसके क्लेम सेटलमेंट रेसियो के बारे में पूछना चाहिए।
क्लेम सेटलमेंट रेशियो को समझें
क्लेम रिजेक्शन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है पॉलिसी खरीदते समय सही सवाल पूछना और क्लेम फॉर्म भरते समय सावधान रहना जरूरी है। क्लेम सेटलमेंट के बारे में पूछें और अच्छे क्लेम सेटलमेंट रेशियो की बात करें तो 95 फीसदी से अधिक होना चाहिए।
क्लेम सेटलमेंट रेशियो वह प्रतिशत है जिससे आपको पता चलता है कि आपके क्लेम्स के मजबूती से फाइल किए जाने और उनको सेटल करने की कितनी संभावना है।
क्लेम में देरी होने पर क्या करना है सही
क्लेम मिलने में 45 दिन से ज्यादा लगते हैं तो उस रकम पर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को बैंक रेट से 2 फीसदी ज्यादा का ब्याज उसे देना होगा जिसके नाम से इंश्योरेंस है। क्लेम में देरी पर इंश्योरेंस कंपनी को उसकी ऑफिशल ई-मेल आईडी पर ईमेल करें।
पुरानी बीमारी की वजह से रिजेक्ट हो जाता है क्लेम
अगर मरीज प्री-एग्जिस्टिंग (पहले से हुई) बीमारी जैसे- डायबीटीज, अस्थमा, थॉयराइड आदि या पुरानी बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती हो जाए जिसके बारे में एजेंट को बताया नहीं था तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा और इलाज का पूरा बिल अपनी जेब से भरना पड़ेगा।


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