HDFC Bank MCLR Cut: नए साल की शुरुआत में लोन ग्राहकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। देश के प्रमुख प्राइवेट बैंकों में शामिल HDFC Bank ने अपनी लेंडिंग दरों में मामूली कमी की है। बैंक ने MCLR आधारित ब्याज दरों में कुछ चुनिंदा अवधियों के लिए 5 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की है। यह बदलाव 7 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है और इसका फायदा उन ग्राहकों को मिल सकता है, जिनके लोन MCLR से जुड़े हुए हैं।

क्यों अहम है यह फैसला
आज के समय में बड़ी संख्या में होम लोन और कार लोन फ्लोटिंग रेट पर दिए जाते हैं। ऐसे लोन की ब्याज दर MCLR से तय होती है। जब बैंक MCLR घटाता है, तो लोन की रीसेट तारीख आने पर ग्राहक को कम ब्याज दर का फायदा मिलता है। इसका सीधा असर EMI पर पड़ता है और मासिक किस्त कुछ हद तक कम हो सकती है।
किन अवधियों में बदली दरें
HDFC Bank ने सभी अवधि की MCLR में बदलाव नहीं किया है।
- ओवरनाइट और एक महीने की MCLR में 5 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है।
- तीन महीने की अवधि में भी उतनी ही कटौती देखने को मिली है।
- एक साल की MCLR, जो होम लोन के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, उसमें भी हल्की कमी की गई है।
हालांकि, छह महीने, दो साल और तीन साल की MCLR दरों को पहले जैसा ही रखा गया है। नई दरों के बाद बैंक की MCLR अब 8.25 फीसदी से 8.55 फीसदी के बीच है।
होम लोन ग्राहकों को क्या फायदा
जो लोग होम लोन चुका रहे हैं, उनके लिए यह फैसला खास है। अगर आपके लोन की रीसेट डेट नजदीक है, तो आने वाले समय में आपकी EMI कुछ कम हो सकती है। भले ही कटौती बहुत बड़ी न लगे, लेकिन लंबे समय में इससे ब्याज पर अच्छी बचत हो सकती है। बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच यह राहत मध्यम वर्ग के लिए मददगार साबित हो सकती है।
MCLR को आसान भाषा में समझें
MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिस पर बैंक आमतौर पर लोन देते हैं। इसे इस तरह बनाया गया है कि रिजर्व बैंक की नीतियों का असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचे। बैंक अपनी फंडिंग लागत, संचालन खर्च और जोखिम को ध्यान में रखकर MCLR तय करते हैं। इसी वजह से MCLR में बदलाव होते ही लोन की ब्याज दर भी प्रभावित होती है।
बैंक की अन्य दरों की झलक
HDFC Bank की बेस रेट फिलहाल 8.90 फीसदी है। वहीं बैंक की प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) 17.40 फीसदी सालाना पर बनी हुई है। फिक्स्ड डिपॉजिट की बात करें तो सामान्य ग्राहकों को अलग-अलग समय पर 2.75 फीसदी से 6.45 फीसदी तक ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर थोड़ी ज्यादा है, जिससे उन्हें बेहतर रिटर्न मिलता है।
आगे क्या उम्मीद की जा रही है
बैंकिंग जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव कम होता है, तो दूसरे बैंक भी लोन दरों में राहत दे सकते हैं। फिलहाल HDFC Bank का यह कदम बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
यह कटौती भले ही छोटी हो, लेकिन लोन लेने वालों के लिए यह राहत का संकेत जरूर है और EMI का बोझ कुछ हद तक हल्का कर सकती है।
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