अगर आप मंथली GST रिटर्न भरते हैं, तो आज यानी मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को सितंबर 2026 के GSTR-3B की आखिरी तारीख है। लेट फीस और ब्याज के झंझट से बचने के लिए आज रात से पहले ही अपना रिटर्न फाइल कर लें। वहीं QRMP (Quarterly Return with Monthly Payment) स्कीम वाले टैक्सपेयर्स को जुलाई-सितंबर तिमाही का GSTR-3B अपने राज्य की कैटेगरी के हिसाब से 22 या 24 अक्टूबर तक दाखिल करना होगा। ऐन वक्त की जल्दबाजी से बचने के लिए अपने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और रिवर्स चार्ज (RCM) की जांच तुरंत शुरू कर दें।
ध्यान रखें कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा सिर्फ अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि GSTR-2B को अपनी पर्चेज बुक्स से मिलाकर ही करें। GSTR-2B में पिछले महीने की 12 तारीख से लेकर इस महीने की 11 तारीख के बीच सप्लायर द्वारा दाखिल किए गए आंकड़ों का ब्योरा दर्ज होता है, जिसके बाद यह फ्रीज हो जाता है। अगर कोई इनवॉइस 2B में नहीं दिख रहा है, तो आज ही अपने वेंडर से संपर्क करें। 1 जनवरी 2022 से नियम बेहद साफ है—आपको क्रेडिट तभी मिलेगा जब इनवॉइस GSTR-2B में दिखाई देगा।

GSTR-3B की डेडलाइन, लेट फीस और ब्याज का गणित समझें
इसे एक आसान उदाहरण से समझें। मान लीजिए 1,00,000 रुपये की बिक्री पर 18% की दर से आपकी आउटपुट टैक्स देनदारी 18,000 रुपये बनती है। आपके GSTR-2B में 12,000 रुपये का इनपुट क्रेडिट दिख रहा है। वहीं रिवर्स चार्ज (RCM) के तहत 1,000 रुपये की देनदारी है, जिसका भुगतान सिर्फ कैश में ही किया जा सकता है। इस तरह आज आपकी नेट देनदारी 7,000 रुपये बनती है। अगर आप आज के बजाय कल रिटर्न फाइल करते हैं, तो एक दिन का करीब 3.45 रुपये ब्याज लगेगा और साथ ही लेट फीस भी जुड़ जाएगी। यह लेट फीस आपके कुल टर्नओवर पर निर्भर करती है।
ITC सेट-ऑफ, RCM और ई-इनवॉइस से जुड़े जरूरी नियम
क्रेडिट का सही इस्तेमाल करके आप अपनी जेब से जाने वाले कैश को कम कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले इंटीग्रेटेड GST (IGST) क्रेडिट का पूरा इस्तेमाल करें, फिर नियमों के मुताबिक सेंट्रल (CGST) या स्टेट (SGST) क्रेडिट को एडजस्ट करें। इसके अलावा यह भी जरूर चेक करें कि क्या आपकी कंपनी पर ई-इनवॉइसिंग लागू होती है। 1 अगस्त 2023 से 5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए B2B और एक्सपोर्ट पर ई-इनवॉइस बनाना अनिवार्य है। GSTR-2B में अंतर की एक बड़ी वजह ई-इनवॉइस का मिसमैच होना या छूट जाना ही होती है।
| ITC की पुरानी व्यवस्था (जनवरी 2022 से पहले) | ITC की मौजूदा व्यवस्था |
|---|---|
| तय सीमा के तहत सप्लायर के डेटा से ज्यादा प्रोविजनल ITC का दावा संभव था। | क्रेडिट सिर्फ तभी मिलेगा जब इनवॉइस GSTR-2B में दिखाई देगा। |
| सप्लायर की तरफ से देरी होने पर भी थोड़ी ढील मिल जाती थी। | आपका क्रेडिट पूरी तरह वेंडर के समय पर इनवॉइस अपलोड करने पर निर्भर है। |
| रिकंसीलिएशन (मिलान) समय-समय पर किया जाता था। | हर बार रिटर्न भरने से पहले हर महीने GSTR-2B का मिलान बेहद जरूरी है। |
चालान, पोर्टल कट-ऑफ समय, QRMP तारीखें और सुधार का मौका
टैक्स भुगतान के लिए PMT-06 चालान समय रहते बना लें, यह 15 दिनों तक मान्य रहता है। ध्यान रखें कि NEFT या RTGS पेमेंट बैंक के टाइमिंग पर निर्भर करते हैं और एजेंसी बैंक शाम 6 बजे तक RBI को डेटा भेजते हैं। तुरंत रसीद (acknowledgment) पाने के लिए नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर रहता है। QRMP स्कीम वाले ध्यान रखें कि उनके GSTR-3B की डेडलाइन 22 या 24 अक्टूबर है। आखिरी वक्त में पोर्टल पर होने वाले ट्रैफिक से बचने के लिए पहले ही काम निपटा लें।
तुरंत निपटाने योग्य चेकलिस्ट: GSTR-2B का अपनी बुक्स से मिलान करें और अयोग्य (ineligible) क्रेडिट को ब्लॉक कर दें। तय नियमों के अनुसार ही क्रेडिट सेट-ऑफ की गणना करें। चालान बनाते समय थोड़ा बफर मार्जिन रखें। ई-इनवॉइस की कवरेज और नंबरों को दोबारा जांच लें। RCM देनदारी का भुगतान कैश में करें और फिर पात्र क्रेडिट का दावा करें। GSTR-3B की मुख्य तालिकाओं की जांच करके रिटर्न जमा कर दें। याद रखें कि वित्त वर्ष 2025-26 के सुधार/संशोधन की विंडो 30 नवंबर 2026 को बंद हो रही है, इसलिए पुराने किसी भी मिसमैच को समय रहते ठीक कर लें।


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