हाल ही में GST दरों में कमी के बाद उपभोक्ताओं और FMCG कंपनियों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। कुछ कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट की कीमतें घटा दी थीं, जिससे छोटे पैक के दाम अजीब हो गए। उदाहरण के लिए 1 रुपए की कैंडी 88 पैसे में और 2 रुपए का शैम्पू 1.77 रुपए में बिकने लगा।

इससे दुकानदार और ग्राहक दोनों असमंजस में पड़ गए। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि कंपनियां टैक्स में हुई राहत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए सामान का वजन या मात्रा बढ़ा सकती हैं, न कि कीमत घटाएं।
पैकिंग बढ़ाने का नया रास्ता
FMCG कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि प्रोडक्ट की कीमत पुराने स्तर पर रहे, लेकिन पैकिंग में 6% से 12% तक का इजाफा किया जा सकता है। कंपनियां अगले 1-2 हफ्तों में नए पैक तैयार कर रही हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से ₹2, ₹5, ₹10 और ₹20 पैक वाले सामान पर लागू होगा।
पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने बताया कि स्नैक्स के नए पैक पहले ही बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन बिस्किट, शैम्पू और अन्य प्रोडक्ट्स में पैकिंग बदलने में थोड़ा समय लगेगा। विशेषकर बिस्किट पैक में 11%-12% वजन वृद्धि की जाएगी, लेकिन कीमत वही पुरानी रहेगी।
GST कटौती के बाद कीमतों में बदलाव
जब GST दरों में कमी हुई, तो कई कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट की कीमतें भी घटा दीं। उदाहरण के तौर पर:
पारले-जी बिस्किट ₹5 से ₹4.45
मोंडलीज़ बॉर्नविटा ₹30 से ₹26.69, ओरेओ ₹10 से ₹8.90
जेम्स और 5 स्टार ₹20 से ₹17.80
बिसलेरी 500ml पानी ₹10 से ₹9, 1 लीटर ₹20 से ₹18
कई किराना दुकानों ने इन अजीब कीमतों को गोल कर दिया और ₹4.45 को ₹5 में ही बेच दिया। वहीं कुछ दुकानदारों ने UPI पेमेंट लेने पर सही कीमत लागू की।
'मैजिक प्राइस' की भूमिका
जायडस वेलनेस के CEO तरुण अरोड़ा ने कहा कि ₹5 और ₹10 जैसे 'मैजिक प्राइस पॉइंट' ग्राहकों के लिए समझने में आसान होते हैं और दुकानदारों के लिए भी संभालना आसान है। इसी कारण कंपनियां पुराने दाम पर नए पैक लॉन्च करना पसंद करती हैं।
पहले भी कंपनियां ऐसा कर चुकी हैं
महंगाई बढ़ने पर FMCG कंपनियां कीमतें नहीं बढ़ातीं, बल्कि सामान का वजन घटा देती हैं। इससे ग्राहकों को लगता है कि दाम वही है, लेकिन उन्हें कम सामान मिलता है। 2017 में GST लागू होने के बाद कुछ कंपनियों पर जुर्माना भी लगा क्योंकि उन्होंने टैक्स में मिली राहत का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया।
अमूल का रुख
अमूल ने कहा है कि वह पुराने दामों पर तब तक वापस नहीं आएगी जब तक सरकार कोई आधिकारिक आदेश नहीं देती। कंपनी का मानना है कि सरकार का उद्देश्य कीमतें घटाना था, मात्रा बढ़ाकर पुराने दाम वापस लाना नहीं।
इस नई रणनीति से उम्मीद है कि नवंबर के मध्य तक रोजमर्रा के FMCG सामान पुराने दामों पर लेकिन ज्यादा वजन या मात्रा के साथ ग्राहकों तक उपलब्ध होंगे।
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