1 नवंबर 2026 (रविवार) से जीएसटी से जुड़े तीन बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बिक्री के बाद मिलने वाले डिस्काउंट (Post-sale discount) अब क्रेडिट नोट और खरीदार के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिवर्सल मॉडल के तहत तय होंगे। इसके साथ ही, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत मिलने वाले रिफंड में 1 नवंबर 2026 या उसके बाद क्लेम की गई पात्र इनपुट सर्विस क्रेडिट को भी जोड़ा जा सकेगा। वहीं, टैक्स का भुगतान करके एक्सपोर्ट किए जाने वाले सामान पर रिफंड पाने के लिए ₹1,000 की न्यूनतम सीमा की शर्त खत्म कर दी गई है।
इनवॉइसिंग की बात करें तो, अगर पहले से कोई एग्रीमेंट नहीं है, तब भी सप्लाई के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट को टैक्सेबल वैल्यू से बाहर रखा जा सकता है। इसके लिए सेक्शन 34 के तहत जीएसटी क्रेडिट नोट जारी करना होगा और यह पक्का करना होगा कि खरीदार आनुपातिक (proportionate) क्रेडिट रिवर्स करे। अपने टैक्स रिकॉर्ड को सही रखने और ऑडिट में किसी गड़बड़ी से बचने के लिए क्रेडिट नोट की सही जानकारी GSTR-1 में दर्ज करना जरूरी है।

इनवर्टेड ड्यूटी में इनपुट सर्विसेज पर रिफंड: जानिए क्या बदला
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत रिफंड का दावा करते समय अब इनपुट सर्विसेज क्रेडिट को भी शामिल किया जाएगा, लेकिन यह नियम केवल 1 नवंबर 2026 या उसके बाद ली गई क्रेडिट पर ही लागू होगा। अधिकारियों ने साफ किया है कि रिफंड का दावा तभी मान्य होगा जब इनपुट और आउटपुट टैक्स दरों के बीच वास्तविक अंतर (genuine inversion) होगा। किसी भी सिस्टम फ्लैग या गड़बड़ी से बचने के लिए सर्विस इनवॉइस, पेमेंट प्रूफ और रिकंसिलेशन डॉक्युमेंट्स के साथ ही अपना रिफंड क्लेम करें।
एक्सपोर्ट रिफंड पर ₹1,000 की न्यूनतम सीमा खत्म: क्या होगा असर
टैक्स चुकाकर एक्सपोर्ट किए गए सामान पर रिफंड क्लेम करने के लिए अब ₹1,000 की न्यूनतम सीमा की शर्त लागू नहीं होगी। हालांकि, बाकी मामलों में CGST, SGST/UTGST और IGST को मिलाकर कुल रिफंड पर ₹1,000 की यह सीमा बनी रहेगी। अगर रिफंड एप्लीकेशन दाखिल करने के 10 दिनों के भीतर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की जाती, तो उसे अपने आप स्वीकृत मान लिया जाएगा, जिससे रिफंड जल्दी मिलेगा। इसलिए पूरा शिपिंग और बैंक प्रूफ तैयार रखकर ही RFD-01 फॉर्म दाखिल करें।
RCM और ई-इनवॉइसिंग का दायरा: कारोबारियों को तुरंत ERP में करने होंगे ये बदलाव
1 जनवरी 2027 से ई-इनवॉइसिंग का दायरा और बढ़ने वाला है। इसमें अनरजिस्टर्ड सप्लायर्स से रिवर्स चार्ज (RCM) पर की गई खरीदारी और सर्विसेज के इम्पोर्ट के लिए सेल्फ-इनवॉइसिंग को भी शामिल किया जाएगा। 1 नवंबर 2026 से जीएसटी फॉर्म में कई नए बदलाव आ रहे हैं, इसलिए कारोबारी अभी से अपने ERP सिस्टम में नए फील्ड्स और कोड्स मैप कर लें। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट डिस्काउंट क्लॉज अपडेट करें, क्रेडिट नोट्स का मिलान करें और रिफंड दावों के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।


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