भारतीय बाजार में आज सोने की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। ग्लोबल मार्केट में हो रहे बदलावों की वजह से घरेलू मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में निवेशक इस उलझन में हैं कि वे फिजिकल गोल्ड (सोना) खरीदें या मॉडर्न फाइनेंशियल एसेट्स में पैसा लगाएं। सही चुनाव आपकी निवेश अवधि और लक्ष्यों पर निर्भर करता है। बेहतर रिटर्न के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB), गोल्ड ETF और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बीच अंतर समझना जरूरी है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने की चमक बढ़ी है और वायदा कीमतों में तेजी का रुख है। अंतरराष्ट्रीय हलचल और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिख रहा है। आज 24 कैरेट सोने का भाव 75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है। बाजार में जारी इस उतार-चढ़ाव के बीच रिटेल खरीदारों के लिए निवेश का सही समय चुनना काफी अहम हो गया है।

SGB, Gold ETF या FD: निवेश के लिए कौन सा विकल्प है बेस्ट?
| मानक | SGB | गोल्ड ETF | बैंक FD |
|---|---|---|---|
| सालाना रिटर्न | सोने की कीमत + 2.5% | सोने की वास्तविक कीमत | फिक्स्ड 6-8% |
| लिक्विडिटी | 8 साल की अवधि | मार्केट ऑवर्स के दौरान | तुरंत निकासी संभव |
| टैक्स लाभ | कैपिटल गेन्स पर छूट | स्टैंडर्ड टैक्स रेट | पूरी तरह टैक्स योग्य |
लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) अब भी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। इसमें सोने की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ 2.5% का अतिरिक्त सालाना ब्याज भी मिलता है। हालांकि, अगर आपको कभी भी पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो गोल्ड ETF एक बेहतर विकल्प है। बॉन्ड या फिजिकल गोल्ड के मुकाबले इसमें लिक्विडिटी यानी पैसे निकालने की सुविधा ज्यादा बेहतर होती है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में स्थिरता तो मिलती है, लेकिन इसमें सोने जैसी ग्रोथ की उम्मीद नहीं की जा सकती।
आज के समय में निवेश करने से पहले रिटेल खरीदारों को कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। सबसे पहले, यह तय करें कि आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। दूसरा, अगर आप फिजिकल गोल्ड खरीद रहे हैं, तो मेकिंग चार्जेस जरूर चेक करें। तीसरा, अपने टैक्स स्लैब और कैपिटल गेन्स पर पड़ने वाले असर का आकलन करें। अगर आपका बजट कम है, तो आप SIP के जरिए भी धीरे-धीरे सोना जमा कर सकते हैं और अपना भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो अपने कुल पोर्टफोलियो का कम से कम 10% हिस्सा सोने में रखना चाहिए। यह शेयर बाजार की गिरावट के समय एक इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह काम करता है। निवेश के नए मौकों के लिए रिजर्व बैंक (RBI) के कैलेंडर पर नजर रखें। बाजार की खबरों से अपडेट रहकर आप कीमतों में आने वाली गिरावट का सही फायदा उठा सकते हैं। हमेशा अपनी जरूरतों और लिक्विडिटी को ध्यान में रखकर ही सही विकल्प का चुनाव करें।


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