भारत में लेबर कानूनों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसका सीधा फायदा लाखों प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिलेगा। नया 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी' (CSS) जल्द ही फ्रीलांसरों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। इन नियमों का मकसद गिग इकोनॉमी से जुड़े लोगों को एक मजबूत सुरक्षा कवच देना है, ताकि उनका आर्थिक भविष्य सुरक्षित रहे।
सरकार के मुताबिक, 'गिग वर्कर' (GW) वो हैं जो पारंपरिक एम्प्लॉयर-एम्प्लॉई के दायरे से बाहर रहकर कमाई करते हैं। आज देश में बड़ी संख्या में लोग जोमैटो, स्विगी और उबर जैसे ऐप्स के लिए काम कर रहे हैं। अक्सर बीमारी या आर्थिक तंगी के समय इनके पास कोई औपचारिक मदद नहीं होती। लेकिन अब नई पॉलिसी के जरिए हर गिग वर्कर को जरूरी सरकारी योजनाओं और लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी का फायदा मिलेगा।

गिग वर्कर्स के लिए सरकार के नए नियम
इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए वर्कर्स को 'ई-श्रम' (e-Shram) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। यह नेशनल डेटाबेस सरकार को असंगठित क्षेत्र के कामगारों की निगरानी करने और उन तक मदद पहुँचाने में कारगर साबित होगा। रजिस्टर्ड मेंबर्स को जल्द ही मेडिकल सहायता के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की सुविधा भी मिल सकेगी। यह सिस्टम फॉर्मल और इनफॉर्मल सेक्टर के बीच की दूरी को प्रभावी ढंग से कम करेगा।
इन कल्याणकारी योजनाओं को चलाने के लिए एक खास 'सोशल सिक्योरिटी फंड' (SSF) बनाया जाएगा। एग्रीगेटर कंपनियों को अपनी कुल कमाई का एक छोटा हिस्सा इस फंड में देना पड़ सकता है। इस पैसे का इस्तेमाल वर्कर्स के लिए एक्सीडेंट इंश्योरेंस और मैटरनिटी बेनिफिट्स जैसी सुविधाओं की फंडिंग में किया जाएगा। ऐसे कदमों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को एक भरोसेमंद सेफ्टी नेट मिलेगा।
सोशल सिक्योरिटी और पेंशन का भविष्य पर असर
नए कानूनी ढांचे के तहत डिजिटल वर्कर्स को कई बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है। इसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की योजनाओं जैसी बुनियादी जरूरतों को भी शामिल किया गया है। नीचे दी गई टेबल में प्रस्तावित सोशल सिक्योरिटी प्लान के मुख्य हिस्सों को समझाया गया है:
| फायदे का प्रकार | सिस्टम/माध्यम |
|---|---|
| हेल्थ बेनिफिट्स | ESIC |
| रिटायरमेंट में मदद | EPFO |
| वर्कर की पहचान | e-Shram |
गिग इकोनॉमी को रेगुलेट करने की इस प्रक्रिया में थोड़ा समय जरूर लग सकता है, लेकिन यह भविष्य में स्थिरता का वादा करती है। समय रहते रजिस्ट्रेशन कराकर वर्कर्स अपने परिवार को अनहोनी के खतरों से सुरक्षित कर सकते हैं। भारत में सभी के लिए 'यूनिवर्सल सोशल प्रोटेक्शन' की दिशा में यह एक बड़ा मील का पत्थर है। यह कदम दिखाता है कि देश आज के दौर के हर तरह के कामगारों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे वर्कफोर्स का भविष्य और भी मजबूत होगा।


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