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Foreign Education Loan : क्या आ सकती हैं चुनौतियां, लेने से पहले जानें

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Foreign Education Loan : अकसर माता-पिता बच्चों की शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लेते हैं। मान लीजिए कि एक छात्र मेडिकल कोर्स के लिए यूरोप के जॉर्जिया जा रहा है। 5 साल के कोर्स की फीस करीब 30 लाख रुपये है, उसका खर्चा उसके पिता मैनेज कर रहे हैं। इसलिए उन्हें कर्ज लेने की जरूरत पड़ेगी। मगर भारतीय रुपये के मूल्य में गिरावट आई है और मुद्रास्फीति बजट खर्चों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में यूरोप में रहने का खर्च भी बदल जाएगा। एजुकेशन लोन पर क्या-क्या दिक्कतें आती हैं, वो हम आपको यहां बताएंगे।

 
Foreign Education Loan : आ सकती हैं ये चुनौतियां

रुपये में गिरावट एक मुसीबत
ऊपर वाले मामले की तरह ही कुछ अन्य भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं, जबकि जिन्हें पहले ही नौकरी मिल चुकी है, उन्हें इस साल रुपये के कमजोर होने के तौर पर और भी बदतर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। साल 2022 की शुरुआत से डॉलर के मुकाबले रुपया 7% से ज्यादा गिर गया है। ये फॉरेन एजुकेशन लोन में एक समस्या है।

ब्य़ाज दर बढ़ी
इस साल मार्च में अगर किसी छात्र ने डॉलर के मुकाबले रुपये के 75 पर होने पर लोन लिया है, तो उसके लोन में कुछ लाख की बढ़ोतरी हो जाएगी। लोन के प्रत्येक डॉलर के लिए 7 रुपये बढ़ जाएँगे और इसने लोन के साथ-साथ ब्याज को भी बढ़ा दिया है।

Foreign Education Loan : आ सकती हैं ये चुनौतियां

ट्यूशन फीस
ट्यूशन फीस को शामिल करने पर भारतीय छात्रों को असल में विदेश में रहने के खर्च में वृद्धि के बाद खुद की सहायता करनी होती है। अनुमानों के अनुसार यूरोजोन की मुद्रास्फीति 10% थी, अमेरिका में मुद्रास्फीति 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जो विदेश में पढ़ रहे छात्रों की जेब को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। अधिकांश भारतीय छात्र अपने करियर के लिए वहां जा रहे हैं। ये उनके लिए मुसीबत है।

 

बढ़ती ब्याज दरें
तीसरी मुसीबत है बढ़ती ब्याज दरें। ब्याज दरें बढ़ रही हैं। इसी वित्तीय वर्ष में भारतीय केंद्रीय बैंक ने रेपो दरों में वृद्धि की। आधार दर अब 5.9% हो गई। ब्याज दरों में वृद्धि और होने की उम्मीद है। रेपो रेट बढ़ती है तो लोन की दरें भी बढ़ती हैं। ये भी जेब पर नया बोझ है।

Foreign Education Loan : आ सकती हैं ये चुनौतियां

एमसीएलआर और बीपीएलआर
एमसीएलआर और बीपीएलआर लोन के बाद के समय में ब्याज दरों में वृद्धि दिखाएंगी। इसी के कारण वर्तमान और उसके बाद के उधारकर्ताओं की ईएमआई बढ़ जाएगी। रुपये की गिरावट का मनोवैज्ञानिक प्रभाव अमेरिका और यूरोप जाने वाले छात्रों के दिमाग पर पड़ेगा, जिसमें उनके माता-पिता भी शामिल हैं।

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English summary

Foreign Education Loan What challenges can come know before taking

Similar to the case above, some other Indian students who want to study abroad, while those who have already got jobs, are facing an even worse situation this year as the rupee weakens.
Story first published: Saturday, November 12, 2022, 20:25 [IST]
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