F&O ट्रेडिंग में बड़ा बदलाव: गुरुवार नहीं, अब सोमवार को होगी एक्सपायरी, इन 5 बातों का रखें ध्यान

अगर आप इस हफ्ते मंथली F&O में ट्रेडिंग करने जा रहे हैं, तो गुरुवार नहीं बल्कि सोमवार, 31 अगस्त 2026 की तारीख डायरी में नोट कर लें। NSE ने अप्रैल 2025 से मंथली और कई इंडेक्स एक्सपायरी को गुरुवार की जगह सोमवार कर दिया है। एक्सपायरी के दिन मार्केट क्लोजिंग के समय काफी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। F&O ट्रेडिंग का समय सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक होता है, इसलिए आखिरी घंटे की आपाधापी से बचने के लिए समय रहते अपनी एग्जिट की प्लानिंग कर लें।

ट्रेडिंग के लिए एक प्रॉपर टाइमिंग चेकलिस्ट तैयार रखें। ज्यादातर ब्रोकर दोपहर 3:15 बजे से 3:25 बजे के बीच अपने रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) के तहत इंट्राडे पोजीशन का ऑटो स्क्वायर-ऑफ शुरू कर देते हैं। इसके बाद नए इंट्राडे ऑर्डर ब्लॉक कर दिए जाते हैं। अपने फोन में दोपहर 1 बजे रिव्यू करने और 3 बजे तक एग्जिट करने का अलर्ट सेट कर लें। अगर इंट्राडे पोजीशन समय पर बंद नहीं हुई, तो वह कैरी फॉरवर्ड हो सकती है और इसके लिए आपको भारी मार्जिन देना पड़ सकता है।

F&O Trading NSE Expiry Changes 2026: Monday Expiry Rules, RMS Timing, and Risk Management Guide

एक्सपायरी पर वोलैटिलिटी, मार्जिन और डिलीवरी का रिस्क

सभी स्टॉक डेरिवेटिव्स पर फिजिकल सेटलमेंट का नियम लागू होता है। अगर एक्सपायरी के समय आपके पास 'इन-द-मनी' (ITM) स्टॉक ऑप्शंस या फ्यूचर्स पोजीशन खुली रह जाती है, तो आपको शेयरों की लेन-देन (डिलीवरी) करनी पड़ेगी। फिजिकल डिलीवरी की झंझट से बचने के लिए अपनी पोजीशन को वक्त रहते बंद कर लें या रोलओवर कर लें। आमतौर पर ब्रोकर हफ्ते के बीच से ही डिलीवरी मार्जिन बढ़ाना शुरू कर देते हैं और मार्जिन टाइट होने पर जोखिम भरे नए ट्रेड्स पर रोक भी लगा सकते हैं।

एक्सपायरी पर ऑप्शंस STT का गणित और टैक्स के नुकसान से बचाव

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) के गणित को अच्छी तरह समझ लें। अगर एक्सपायरी के दिन कोई ऑप्शन एक्सरसाइज होता है, तो बायर्स को उसकी इंट्रिंसिक वैल्यू पर 0.15% का STT देना पड़ता है। ऑप्शन सेलर्स बिक्री के वक्त प्रीमियम पर STT चुकाते हैं, जबकि फ्यूचर्स में बिकवाली (Sell leg) पर STT लगता है। ऐसे में मार्केट क्लोज होने से पहले ही 'इन-द-मनी' ऑप्शंस को स्क्वायर ऑफ (बंद) कर लेना बेहतर रहता है, इससे भारी STT और स्लिपेज के नुकसान से बचा जा सकता है।

कैश इन्वेस्टर्स, SIP और FD बनाम इक्विटी रिटर्न का पूरा लेखा-जोखा

कैश मार्केट के निवेशकों को अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की किश्तों को बिना रोके जारी रखना चाहिए और नया निवेश करते समय हमेशा लिमिट ऑर्डर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। बाजार में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बढ़ने से पहले ही अपने प्लेज्ड कोलैटरल, अन-प्लेज जरूरतों और हेयरकट की समीक्षा कर लें। लंबी अवधि के नजरिए को समझने के लिए, आज की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों की तुलना निफ्टी 50 के ऐतिहासिक रोलिंग रिटर्न से करके देखें। ध्यान रहे, इन आंकड़ों को केवल एक संदर्भ (रेफरेंस) के रूप में देखें, इसे निश्चित रिटर्न का वादा न समझें।

समय सीमा (अवधि)बैंक FD की मौजूदा दरें (दायरा)निफ्टी 50 रोलिंग रिटर्न (ऐतिहासिक)
5 साल6.5%–8.0%मीडियन ~11%–12%
10 साल6.0%–7.5%औसत ~14.2%
15 साल6.0%–7.0%मीडियन ~12%–13%

FD की दरें प्रमुख बैंकों की मौजूदा ब्याज दरों और एग्रीगेटर्स के आधार पर हैं, जबकि रोलिंग रिटर्न के आंकड़े एनएसई (NSE) इंडेक्स के दशकों पुराने अध्ययनों पर आधारित हैं। इस हफ्ते की ट्रेडिंग के लिए यह क्विक गाइड ध्यान में रखें: एक्सपायरी का सही दिन कन्फर्म करें, ब्रोकर की RMS टाइमिंग का ध्यान रखें, गलती से भी फिजिकल डिलीवरी के चक्कर में न फंसें और समझदारी से ऑप्शंस स्क्वायर ऑफ करें। सोमवार की क्लोजिंग में हड़बड़ी मचाने से कहीं बेहतर है कि आप पूरी प्लानिंग और शांति के साथ ट्रेडिंग करें।

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