7 अक्टूबर 2026 को RBI द्वारा ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी के बाद फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों में हलचल तेज हो गई है। 25 अक्टूबर तक कई बड़े बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में बदलाव किया है, जिससे चुनिंदा अवधि पर सीनियर सिटीजन्स के लिए उच्चतम दर 8.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अगर आप एफडी कराने की सोच रहे हैं, तो दरों में आगे होने वाले बदलाव से पहले आज ही बुकिंग करके ऊंची रिटर्न दरें लॉक कर सकते हैं।
आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने 24 अक्टूबर से अपनी एफडी दरें संशोधित की हैं। वहीं, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की नई दरें 16 अक्टूबर से लागू हैं और बैंक ने आगाह किया है कि दरें बिना पूर्व सूचना के बदल सकती हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में सूर्योदय, इक्विटास और ईएसएएफ (ESAF) चुनिंदा अवधि पर वरिष्ठ नागरिकों को 8.5 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। हालांकि, बुकिंग करने से ठीक पहले बैंक की वेबसाइट या ऐप पर जाकर ताजा दरों की पुष्टि जरूर कर लें।

आज की एफडी दरें: प्रमुख बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक
| बैंक/SFB | वरिष्ठ नागरिकों के लिए दर (उच्चतम) | मुख्य अवधि |
|---|---|---|
| Suryoday SFB | 8.50% | 5 साल |
| Equitas SFB | 8.50% | 3 साल 1 दिन (स्पेशल) |
| ESAF SFB | 8.50% | 800 दिन |
सामान्य जमाकर्ताओं के लिए अधिकतम दरें इनसे थोड़ी कम हैं। सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक सामान्य नागरिकों को चुनिंदा अवधि पर अधिकतम 8.25 प्रतिशत ब्याज दे रहा है, जबकि ESAF 800 दिनों की एफडी पर 8 प्रतिशत ब्याज की पेशकश कर रहा है। अक्टूबर में नीतिगत बदलाव के बाद बाजार में लिक्विडिटी में आई सख्ती की वजह से दरों में यह बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस तालिका को एक संदर्भ सूची के रूप में इस्तेमाल करें और संबंधित बैंक की वेबसाइट पर अवधि और दरों का मिलान जरूर कर लें।
सीनियर सिटीजन बनाम सामान्य नागरिक: सुरक्षा और बचत योजनाएं
सुरक्षा का ध्यान रखना हमेशा की तरह सबसे जरूरी है। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) के नियमों के मुताबिक, प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक की जमा राशि (मूलधन + ब्याज) पूरी तरह से बीमित होती है। इसमें स्मॉल फाइनेंस बैंक भी शामिल हैं। वहीं, सरकार समर्थित अन्य बचत योजनाओं की बात करें तो सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) फिलहाल 8.2 प्रतिशत और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) इस तिमाही में 7.4 प्रतिशत का ब्याज दे रही है।
अगर निवेश का सही समय तय करना मुश्किल लग रहा है, तो 'लैडरिंग' (Laddering) का तरीका अपनाएं। अपने फंड को 6, 12, 24 और 36 महीनों की अलग-अलग अवधि की एफडी में बांट दें। जब ब्याज दरें बढ़ें, तो छोटी अवधि की एफडी मैच्योर होने पर उन्हें लंबी अवधि के लिए री-इन्वेस्ट कर दें। इससे री-इन्वेस्टमेंट का जोखिम कम हो जाता है और नई दरों का लाभ भी मिलता रहता है। नियमित आय की जरूरत वाले रिटायर लोग 5 साल की स्पेशल सीनियर एफडी दरें लॉक कर सकते हैं, जबकि अन्य निवेशक भविष्य के मौकों के लिए छोटी अवधि वाले विकल्प चुन सकते हैं।


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