Financial Freedom: वित्तीय स्वतंत्रता यानी फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब है बिना काम किए जीवन के खर्चों को पूरा करना. साथ ही लाइफ के टारगेट्स को हासिल करने के लिए पर्याप्त संसाधन होना. इसे म्यूचुअल फंड और नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS जैसे इनवेस्टमेंट मीडियम के जरिए हासिल किया जा सकता है. म्यूचुअल फंड अलग-अलग इनवेस्टमेंट ऑप्शन और फ्लैक्सिबिलिटी देता है. जबकि NPS कम लागत वाली एक सरल, ऑटोमेटेड इनवेस्टमेंट सिस्टम है. हालांकि, NPS में इक्विटी निवेश सीमाएं और लॉक-इन अवधि होती है, जबकि म्यूचुअल फंड को रेगुलर देखते रहने या फिर फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद होती है.
म्यूचुअल फंड अपने सुलभ टिकट साइज की वजह से फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए फेमस है, जिससे छोटे रिटेल निवेशक हिस्सा ले सकते हैं. वे निवेश के तरीकों और निकासी के मामले में कम लागत वाले निवेश ऑप्शन और सुविधा मुहैया करते हैं. म्यूचुअल फंड में डाइवर्सिफिकेशन भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है.

सही म्यूचुअल फंड चुनना
फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए म्यूचुअल फंड चुनते समय कुछ खास बातों का ध्यान रहना चाहिए. इसमें जोखिम सहन की क्षमता समेत गोल्स का ध्यान रखना होता है. म्यूचुअल फंड के कई प्रोडक्ट्स में इक्विटी, डेट, कमोडिटीज और रियल एस्टेट शामिल हैं. इन्हें निवेशक अपनी सुविधा और लक्ष्यों के लिहाज से चुन सकता है.
म्यूचुअल फंड्स में फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने के लिए निवेश को जल्दी शुरुआत करना और लंबे समय तक निवेशित रहना अहम होता है. उदाहरण के लिए, 25 साल की उम्र में 15,000 रुपए मंथली सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करने वाला निवेशक 60 साल की उम्र तक 10 करोड़ रुपए जमा कर सकता है. जबकि 40 साल की उम्र में शुरू करने के लिए उसी राशि तक पहुंचने के लिए 1 लाख रुपए प्रति माह की SIP की आवश्यकता होगी.
इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी
म्यूचुअल फंड चुनते समय मौजूदा मार्केट वैल्युएशन पर विचार करें और धीमे-धीमे इक्विटी-बेस्ड फंड में निवेश करें. लिक्विड, डेट, हाइब्रिड और गोल्ड फंड में भी एकमुश्त निवेश किया जा सकता है. थीमैटिक और इंटरनेशनल इक्विटी फंड में डाइवर्सिफाइड घरेलू इक्विटी फंड की तुलना में ज्यादा रिस्क होता है. हाइब्रिड फंड आवश्यक निवेश की संख्या को कम कर सकते हैं, क्योंकि वे लिक्विड, डेट, इक्विटी और सोने में निवेशित होता है.


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