FD छोड़ें या बने रहें? 2026 में सरकारी बॉन्ड और T-Bills से मिलेगा तगड़ा रिटर्न

26 अक्टूबर 2026 को भारत का 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.49 प्रतिशत के करीब बना हुआ है। इसने बिना शेयर बाजार के जोखिम के बेहतर रिटर्न की तलाश कर रहे निवेशकों के सामने नए विकल्प खोल दिए हैं। फिलहाल मुकाबला बैंक एफडी (FD), ट्रेजरी बिल (T-Bills) और लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड (Gilts) के बीच है। वहीं स्टेट डेवलपमेंट लोन्स (SDLs) थोड़ा ज्यादा रिटर्न तो देते हैं, लेकिन इनमें लिक्विडिटी का मामूली जोखिम रहता है। ऐसे में जो निवेशक तुरंत फैसला लेना चाहते हैं, उनके लिए इस हफ्ते होने वाली नीलामी एक शानदार मौका हो सकती है।

हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो 364 दिनों वाले T-bill का कट-ऑफ करीब 6.18 प्रतिशत रहा। वहीं 182 दिनों वाले T-bill का यील्ड 5.96 प्रतिशत और 91 दिनों वाले का लगभग 5.52 प्रतिशत रहा। दूसरी ओर, बड़े बैंकों की एक साल की एफडी पर फिलहाल 6.5 से 7 प्रतिशत के आसपास ब्याज मिल रहा है। रेगुलेटर के मुताबिक, T-bills की नीलामी हर बुधवार और SDLs की हर मंगलवार को होती है। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि SDLs पर स्प्रेड 60 बेसिस पॉइंट्स के ऊपरी स्तर पर है। गिल्ट्स के मुकाबले कम ट्रेडिंग होने की वजह से मिलने वाला यह एक्स्ट्रा प्रीमियम निवेशकों को बढ़िया भरपाई कर देता है।

FD vs T-Bills vs Gilt: Best Investment Options for 2026 and How to Maximize Your Returns

FD बनाम गिल्ट/SDL/T-bills: आज कहां पैसा लगाना है ज्यादा फायदेमंद

निवेश विकल्प संभावित यील्ड (26 अक्टूबर) टैक्स के नियम लिक्विडिटी और लागत
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) लगभग 6.5–7.0 प्रतिशत (बड़े बैंकों की 1 साल की FD) ब्याज पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स समय से पहले पैसा निकालने पर अमूमन पेनल्टी; इस्तेमाल में बेहद आसान
RBI रिटेल डायरेक्ट के जरिए T-bills ताजा कट-ऑफ: 91 दिन 5.52%, 182 दिन 5.96%, 364 दिन 6.18% डिस्काउंट/ब्याज पर स्लैब रेट से टैक्स; बेचने पर कैपिटल गेन्स के नियम लागू T+1 सेटलमेंट; मजबूत क्रेडिट सुरक्षा; सेकेंडरी मार्केट में स्प्रेड अलग-अलग
टार्गेट-मैच्योरिटी गिल्ट/SDL फंड (3-6 वर्ष) पोर्टफोलियो YTM खरीदे गए गिल्ट्स/SDLs के अनुसार; यील्ड 7% के निचले स्तर पर 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदी यूनिट्स पर स्लैब रेट से टैक्स (सेक्शन 50AA) एग्जिट लोड और ट्रैकिंग अंतर की संभावना; ETF में बिड-आस्क स्प्रेड का ध्यान रखें

टैक्स कटने के बाद के रिटर्न (Post-tax return) को देखें तो हर विकल्प का गणित बदल जाता है। FD के ब्याज और G-sec या T-bill से होने वाली कमाई पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स लगता है। 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए नए डेट म्यूचुअल फंड यूनिट्स पर भी स्लैब रेट से टैक्स का प्रावधान है। वहीं, लिस्टेड सरकारी सिक्योरिटीज को 12 महीने बाद बेचने पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है। 2024 के नए नियमों के तहत यह बिना इंडक्सेशन वाला लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स है।

RBI Retail Direct: प्रक्रिया, समय-सीमा और जोखिम

अगर आप आज ही निवेश करना चाहते हैं, तो RBI रिटेल डायरेक्ट की मदद लें। इसके लिए फ्री 'रिटेल डायरेक्ट गिल्ट' अकाउंट खोलें और 'प्राइमरी इश्यूएंस' सेक्शन में जाएं। अपनी पसंद का बिल या बॉन्ड चुनें, नॉन-कंपैटिटिव बिड लगाएं और ऑनलाइन भुगतान करें। इसमें ऑटो-बिडिंग का विकल्प भी है, जिससे समय-समय पर अपने आप खरीदारी होती रहती है। T-bills का सेटलमेंट T+1 दिन में होता है, जबकि शुक्रवार की गिल्ट नीलामी का सेटलमेंट सोमवार को होता है। अगर कोई अतिरिक्त राशि कटती है, तो वह दो कार्यदिवसों में वापस मिल जाती है।

अब सवाल यह है कि आपको कहां पैसा लगाना चाहिए? अगर आपको 12 महीने के भीतर फंड चाहिए, तो 28 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले बुधवार के ट्रेजरी बिल्स में किश्तों में पैसा लगाएं। अगर आप लंबी अवधि के लिए फिक्स्ड इनकम चाहते हैं और कीमतों में उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो अपनी रकम का एक हिस्सा सीधे गिल्ट्स में लॉक कर सकते हैं। 7.5 प्रतिशत के आसपास यील्ड को देखते हुए आने वाली नीलामियों में रुक-रुक कर (Staggered) निवेश करना बेहतर रहेगा। वहीं, अगर आप आसान तरीका और तुरंत पैसे निकालने की सुविधा चाहते हैं, तो बैंक FD सही है, हालांकि इसमें 1 प्रतिशत तक पेनल्टी देनी पड़ सकती है।

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