मई 2025 में भारतीय बचतकर्ताओं के सामने एक बड़ी उलझन खड़ी हो गई है। अप्रैल की मौद्रिक नीति बैठक में RBI द्वारा रेपो रेट को 6.25 प्रतिशत से घटाकर 6.00 प्रतिशत करने के फैसले के बाद, YES बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों में कटौती कर दी है। दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड में SIP का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। अप्रैल 2025 में SIP खातों की संख्या 838.25 लाख तक पहुंच गई, जो अप्रैल 2024 के 637.84 लाख के मुकाबले 31 प्रतिशत ज्यादा है। गिरती FD दरें और बढ़ती SIP की रफ्तार अब करोड़ों भारतीय परिवारों को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर उनका पैसा कहां सुरक्षित और ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
FD vs SIP: रेपो रेट में कटौती ने कैसे बदला FD का गणित
RBI ने अप्रैल 2025 में लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कटौती करते हुए इसे 6 प्रतिशत पर ला दिया है। पिछले पांच वर्षों में यह पहली बार है जब लगातार दो बार दरें घटाई गई हैं, जो वैश्विक अनिश्चितता के बीच आर्थिक विकास को रफ्तार देने का संकेत है। जब भी RBI रेपो रेट कम करता है, तो बैंक और NBFC अपनी फंड लागत कम करने के लिए FD की ब्याज दरों में कटौती करते हैं। इसका सीधा असर नए FD निवेशकों पर पड़ता है, जिन्हें अब पहले के मुकाबले कम रिटर्न मिलेगा। जो लोग अपनी कमाई के लिए पूरी तरह FD पर निर्भर थे, उनके लिए यह एक बड़ा बदलाव है।

FD vs SIP: किस बैंक ने घटाईं और किसने बढ़ाईं दरें
ब्याज दरों को लेकर हर बैंक का रुख अलग रहा है। YES बैंक ने 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि पर रिटेल निवेशकों के लिए अपनी अधिकतम FD दर 7.75 प्रतिशत से घटाकर 7.50 प्रतिशत कर दी है। कोटक महिंद्रा बैंक ने भी इस महीने दूसरी बार कटौती करते हुए चुनिंदा अवधि के लिए अपनी उच्चतम FD दर 7.30 प्रतिशत से घटाकर 7.15 प्रतिशत कर दी है। इसके उलट, इंडसइंड बैंक ने कुछ अवधियों के लिए दरें बढ़ाई हैं। बैंक ने 61 से 90 दिनों की शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट पर ब्याज 4.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। बैंकों के इस अलग-अलग रुख के कारण निवेशकों के लिए पैसा लगाने से पहले रिसर्च करना जरूरी हो गया है।
बाजार के शोर के बीच SIP की रफ्तार बरकरार
वित्त वर्ष 2025 में औसत मासिक SIP निवेश बढ़कर 24,113 करोड़ रुपये हो गया है, जो वित्त वर्ष 2023 में 16,602 करोड़ रुपये था। यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक अब ज्यादा समझदार हो रहे हैं। अप्रैल 2025 से लागू नए टैक्स सिस्टम के तहत, 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले लोग इनकम टैक्स से मुक्त हैं। इससे लोगों के पास खर्च और निवेश के लिए ज्यादा पैसा बच रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा SIP जैसे लंबी अवधि के विकल्पों में जाने की उम्मीद है। खासकर युवा नौकरीपेशा लोग इक्विटी SIP को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जहां हर महीने छोटी बचत अपने आप बढ़ती रहती है।
FD vs SIP रिटर्न: क्या कहते हैं असली आंकड़े?
अगर आंकड़ों की तुलना करें, तो तस्वीर काफी साफ हो जाती है। पिछले 10 वर्षों में लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड्स ने SIP के जरिए औसतन 14 प्रतिशत का सालाना रिटर्न दिया है, जिससे निवेशकों का पैसा दोगुने से भी ज्यादा हो गया। वहीं, हाल के वर्षों में ज्यादातर FD निवेशकों को सालाना 5 से 7 प्रतिशत के बीच ही ब्याज मिला है। अगर इसमें टैक्स और महंगाई (Inflation) को जोड़ दें, तो असल मुनाफा (Real Return) अक्सर शून्य के करीब पहुंच जाता है। टैक्स स्लैब के हिसाब से गणना करने पर यह अंतर और भी बढ़ जाता है।
| खूबी | फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | SIP (इक्विटी म्यूचुअल फंड) |
|---|---|---|
| अनुमानित रिटर्न (2025) | 6.00% से 8.00% सालाना | 12% से 14% सालाना (ऐतिहासिक) |
| जोखिम का स्तर | बहुत कम | मध्यम से उच्च |
| टैक्स | इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार | 12.5% LTCG (1.25 लाख रुपये से ऊपर) |
| सही समय सीमा | 3 साल से कम | 5 साल या उससे अधिक |
| न्यूनतम निवेश | 1,000 रुपये से शुरू | 500 रुपये प्रति माह |
| महंगाई से बचाव | कम | लंबी अवधि में बेहतर |
FD vs SIP: टैक्स का वो पहलू जिसे अक्सर निवेशक भूल जाते हैं
फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है। यह आपकी कुल आय में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से इस पर टैक्स लगता है। 20 या 30 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में आने वालों के लिए यह घाटे का सौदा हो सकता है। वहीं, इक्विटी SIP में अगर आप एक साल के भीतर पैसा निकालते हैं, तो शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर 20 प्रतिशत टैक्स लगता है। लेकिन लंबी अवधि (एक साल से ज्यादा) के लिए यह टैक्स सिर्फ 12.5 प्रतिशत है, और इसमें भी साल भर में 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स-फ्री है। ऊंचे टैक्स स्लैब वाले लोगों के लिए लंबी अवधि की SIP ज्यादा फायदेमंद साबित होती है।
FD vs SIP: जोखिम और समय के हिसाब से कैसे चुनें?
अगर आप 5 से 7 साल या उससे ज्यादा समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो इक्विटी SIP बेहतर रिटर्न दे सकती है। लेकिन अगर आपको 5 साल से कम समय के लिए पैसा पार्क करना है, तो FD एक सुरक्षित विकल्प है। जो लोग बाजार के उतार-चढ़ाव से डरते हैं, उन्हें FD या कंजर्वेटिव डेट फंड चुनना चाहिए। पूंजी की सुरक्षा के लिए FD बेहतर है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए SIP का सहारा लेना समझदारी है। फैसला इस बात पर नहीं होना चाहिए कि कौन सा विकल्प बेहतर है, बल्कि इस पर कि आपकी जरूरत क्या है।
भारत में DICGC के नियमों के तहत हर बैंक में आपकी 5 लाख रुपये तक की FD बीमाकृत (Insured) होती है, जो सुरक्षा का एक ऐसा स्तर देती है जो SIP में नहीं मिलता। हालांकि, FD का असली जोखिम पैसा डूबना नहीं, बल्कि महंगाई से पिछड़ना है। अगर FD की रफ्तार धीमी रही, तो रिटायरमेंट के समय महंगाई आपके फंड को कम कर सकती है। एक समझदार रणनीति वही है जिसमें इमरजेंसी फंड और छोटी जरूरतों के लिए FD का इस्तेमाल हो, जबकि लंबी अवधि की बचत को SIP के जरिए बढ़ाया जाए।
More From GoodReturns

F&O में 88% ट्रेडर्स को भारी नुकसान: क्या अब सुरक्षित निवेश का समय आ गया है?

इनकम टैक्स रिफंड 'On Hold' है? घबराएं नहीं, इन 5 आसान स्टेप्स से तुरंत पाएं पैसा

PMFBY खरीफ 2026: आज है रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन, बैंक बंद होने पर भी ऐसे करें आवेदन

Jio का नया 'Price Lock' फीचर: ₹300 खर्च करना समझदारी या नुकसान? जानें पूरी सच्चाई

सावधान! व्हाट्सएप पर आ रहा है नया 'सपोर्ट APK' स्कैम, एक क्लिक और खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट

भारत बनाम श्रीलंका मैच: लाइव स्ट्रीमिंग में बफरिंग? ₹22 से शुरू हैं ये बेस्ट डेटा प्लान्स

50 साल के सरकारी बॉन्ड की नीलामी: FD या G-Sec, निवेश के लिए क्या है सही विकल्प?

पीएम मोदी का भाषण और आपकी जेब: क्या टैक्स और ब्याज दरों में हुआ कोई बदलाव? सच जानिए

30 सितंबर तक का मौका: USD FCNR डिपॉजिट पर मिल रहा है 7.52% तक ब्याज, ऐसे करें निवेश

SGB रिडेम्पशन विंडो लाइव: क्या आपका गोल्ड बॉन्ड समय से पहले निकासी के लिए तैयार है?

72 घंटे का लंबा वीकेंड: पैसे को कहां रखें? ओवरनाइट फंड, FD या UPI, जानें क्या है बेहतर



Click it and Unblock the Notifications