FD हो या Savings Account बैंक में जमा किया पैसा तो होगा नुकसान, जानिए क्यों

नयी दिल्ली। अकसर लोग अपने इस्तेमाल न होने रहे पैसे को बैंक में जमा कर देते हैं ताकि उस पर ब्याज मिले और कुछ कमाई हो सके। बैंकों में आम तौर पर एफडी या बचत खाते में ही पैसा रखा जाता है। मगर क्या आप जानते हैं कि इस समय एफडी या बचत खाते में पैसा रखना फायदे नहीं बल्कि नुकसान का सौदा है। असल में कोरोना काल में ब्याज दरें घटी हैं। इससे एफडी और बचत खातों की भी ब्याज दरें कम हुई है। नतीजे में लोगों को मिलने वाली 'रियल रेट ऑफ रिटर्न' घटी। यही रियल रेट ऑफ रिटर्न इस समय समय निगेटिव हो गयी है और निवेशकों के नुकसान की वजह है। आइए जानते हैं कि असल में रियल रेट ऑफ रिटर्न होती क्या है।

क्या होती है रियल रेट ऑफ रिटर्न

क्या होती है रियल रेट ऑफ रिटर्न

जब कोरोना काल में आरबीआई में ब्याज दरें घटाईं तो लोन सस्ते हुए। क्योंकि बैंकों ने होम लोन आदि पर ब्याज दरें कम कीं। मगर बैलेंस बनाने के लिए बैंकों ने एपडी और बचत खाते की भी ब्याज दरें घटाईं। अब हुआ यह है कि महंगाई दर बैंकों में मिलने वाले ब्याज से अधिक है। यानी आपकी जमा राशि पर मिलने वाला रिटर्न महंगाई दर को पछाड़ने में नाकामयाब है।

कैसे निकालें रियल रेट ऑफ रिटर्न

कैसे निकालें रियल रेट ऑफ रिटर्न

किसी को बैंक में एफडी या बचत खाते पर जो ब्याज दर मिल रही है उसमें से महंगाई दर को घटाएं। इसी से रियल रेट ऑफ रिटर्न का पता लगेगा। मान लीजिए आपको बचत खाते या एफडी पर 5 फीसदी ब्याज दर दी जा रही है और महंगाई दर 4 फीसदी है तो आपका रियल रेट ऑफ रिटर्न सिर्फ 1 फीसदी रह जाएगा। अब नुकसान ऐसे हुआ कि जो चीज आज 200 रु में खरीदी जा सकती है वो कल 200 रु में नहीं मिलेगी। जबकि आपके जमा पैसे इतना रिटर्न नहीं मिलेगा, जो महंगाई दर को हरा दे। ये एक तरह से अप्रत्क्ष घाटा है।

कैसे बचें इस घाटे से

कैसे बचें इस घाटे से

आरबीआई के अनुसार सितंबर तक खुदरा महंगाई 5-5.2 फीसदी के आस-पास रह सकती है। अब आपको करना यह है कि ऐसी जगह निवेश करें जहां आपको 5.2 फीसदी खुदरा महंगाई के मुकाबले अधिक से अधिक ब्याज मिल सके। क्योंकि अगर इससे कम रिटर्न मिला तो आपको नुकसान होगा। ऐसे कई ऑप्शन हैं जहां 5.2 फीसदी से अधिक ब्याज मिल रहा है।

यहां करें निवेश

यहां करें निवेश

एफडी या बचत खाते जैसी चीजों पहले से ब्याज दर तय होती है। मगर इक्विटी सेगमेंट, जिसमें शेयर बाजार और कुछ म्यूचुअल फंड स्कीमें (वे स्कीमें जो इक्विटी बाजार में निवेश करती हैं) में रिटर्न फिक्स नहीं होते। यहां आपको एफडी से काफी बेहतर रिटर्न मिल सकता है। हालांकि इक्विटी में इंफ्लेशन रेट को पछाड़ने की ज्यादा बेहतर क्षमता होती है, मगर यहां जोखिम भी रहता है।

म्यूचुअल फंड ज्यादा सुरक्षित

म्यूचुअल फंड ज्यादा सुरक्षित

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इक्विटी में निवेश लिए शेयर बाजार से ज्यादा सुरक्षित ऑप्शन म्यूचुअल फंड है। यह इंफ्लेशन को मात दे सकता है और यहां आपका पैसा भी सुरक्षित रहेगा। असल में म्यूचुअल फंड में आपका पैसा एक्सपर्ट पूरी रिसर्च के आधार पर निवेश करते हैं।

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