1 से 3 अक्टूबर के वीकेंड में तीन प्रमुख बैंकों ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) ब्याज दरों में बदलाव किया है। इसके बाद सीनियर सिटीजंस के लिए एफडी रेट्स बढ़कर करीब 8.30 फीसदी तक पहुंच गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को आने वाले फैसले से ठीक पहले आरबीएल बैंक (RBL Bank), फेडरल बैंक (Federal Bank) और जाना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana SFB) ने अपनी दरें रिवाइज की हैं। रिजर्व बैंक की तरफ से रेपो रेट बढ़ने पर नई एफडी दरें और भी ऊपर जा सकती हैं, ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या अभी एफडी में पैसा लॉक करना सही रहेगा?
आरबीएल बैंक की 1 अक्टूबर से लागू नई दरों के मुताबिक, 18 से 60 महीने की एफडी पर सामान्य नागरिकों को अधिकतम 7.00 फीसदी, सीनियर सिटीजंस को 7.50 फीसदी और सुपर सीनियर सिटीजंस को 7.75 फीसदी तक ब्याज मिल रहा है। फेडरल बैंक ने 29 सितंबर को दरें बदली थीं, जहां 48 महीने की एफडी पर सीनियर सिटीजंस को सबसे ज्यादा 7.20 फीसदी ब्याज दिया जा रहा है। वहीं, जाना स्मॉल फाइनेंस बैंक ने भी 29 सितंबर से नई दरें लागू की हैं, जिसमें 24 से 36 महीने की एफडी पर सीनियर सिटीजंस को सबसे ज्यादा 8.30 फीसदी का ब्याज मिल रहा है।

वीकेंड में बदले एफडी रेट्स: जानें कौन सा बैंक दे रहा है सबसे ज्यादा ब्याज
| बैंक का नाम | सीनियर सिटीजन (अधिकतम ब्याज और अवधि) | सामान्य नागरिक (अधिकतम ब्याज और अवधि) |
|---|---|---|
| Jana Small Finance Bank | 8.30%, 24-36 महीने | 8.00%, 24-36 महीने |
| RBL Bank | 7.50%, 18-60 महीने | 7.00%, 18-60 महीने |
| Federal Bank | 7.20%, 48 महीने | 6.70%, 48 महीने |
एफडी की सुरक्षा: DICGC कवर और स्मॉल फाइनेंस बैंकों से जुड़ा नियम
ये नई दरें 3 करोड़ रुपये से कम की रिटेल कॉलेबल एफडी (असमय निकासी की सुविधा वाली) पर लागू होंगी। डिपॉजिट की सुरक्षा की बात करें तो स्मॉल फाइनेंस बैंकों समेत सभी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों पर 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन' (DICGC) का नियम लागू होता है। इसके तहत हर बैंक में ग्राहक के 5 लाख रुपये तक के डिपॉजिट (मूलधन और ब्याज मिलाकर) पर सरकारी गारंटी मिलती है। अगर आपका निवेश 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो जोखिम कम करने के लिए रकम को अलग-अलग बैंकों में बांटना समझदारी होगी।
FD पर टैक्स और TDS: 80TTB और नए फॉर्म का नियम
एफडी से मिलने वाले ब्याज पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। एक वित्त वर्ष में अगर ब्याज की रकम आम नागरिकों के लिए ₹40,000 और सीनियर सिटीजंस के लिए ₹50,000 से ज्यादा होती है, तो बैंक TDS काटते हैं। धारा 80TTB के तहत सीनियर सिटीजंस ₹50,000 तक की ब्याज आय पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। वहीं, अनावश्यक TDS से बचने के लिए पात्र निवेशक नया सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म 121 जमा कर सकते हैं, जिसने अब पुराने फॉर्म 15G और 15H की जगह ले ली है।
क्या आपको भी आरबीआई के फैसले का इंतजार है? मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होगी और फैसले का ऐलान 7 अक्टूबर को किया जाएगा। बाजार को उम्मीद है कि इस बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे नई एफडी की दरें और बढ़ सकती हैं। अगर आप निश्चित रिटर्न चाहते हैं, तो अभी 24 से 48 महीने की टॉप एफडी स्लैब में कुछ हिस्सा निवेश कर सकते हैं और बाकी रकम आरबीआई की पॉलिसी आने के बाद लगाने के लिए रोककर रख सकते हैं।


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