नई दिल्ली, नवंबर 6। फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) भारत में पैसे बचाने के सबसे लोकप्रिय ऑप्शनों में से एक है। यह प्राइवेट और सरकारी बैंकों के साथ-साथ नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा पेश किया जाने वाला एक निवेश प्रोडक्ट है। ज्यादातर मध्यम वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों के बीच सालों से एफडी देश में निवेश का पर्याय बन गया है। एफडी निवेशकों को अपने फंड को सुरक्षित रूप से निवेश करने और सालाना एक निश्चित ब्याज दर प्राप्त करने की सुविधा देता है। एफडी पर ब्याज दर भी बचत खाते की तुलना में अधिक होती है। मगर फिलहाल बीते कुछ सालों में एफडी पर ब्याज दरें कम हुई हैं। पर हम आपको यहां उन बैंकों की जानकारी देंगे, जिनमें आप 7 फीसदी तक ब्याज हासिल कर सकते हैं।
यस बैंक
यस बैंक में कम से कम तीन साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 7 प्रतिशत ब्याज दर मिलती है। यह प्राइवेट बैंकों के बीच सबसे अच्छी ब्याज दर है। यानी प्राइवेट बैंकों में यस बैंक सबसे अधिक ब्याज ऑफर कर रहा है। यदि कोई वरिष्ठ नागिरक यस बैंक में 3 साल की एफडी पर 1 लाख रुपये का निवेश करता है, तो तीन साल बाद यह रकम 1.23 लाख रुपये हो जाएगी।
आरबीएल बैंक
आरबीएल बैंक तीन साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 6.80 प्रतिशत ब्याज दर ऑफर कर रहा है। इस बैंक को पहले रत्नाकर बैंक के नाम से जाना जाता था। बता दें कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 3 साल की एफडी के लिए आरबीएल बैंक में निवेश करता है तो उसे 3 सालों में 22,000 रुपये बतौर ब्याज मिलेंगे।
इंडसइंड बैंक
इंडसइंड बैंक वरिष्ठ नागरिकों को 3 साल की एफडी पर 6.50 प्रतिशत की ब्याज दरों की पेशकश कर रहा है। वरिष्ठ नागिरकों को इस बैंक में तीन साल की 1 लाख रुपये की एफडी कराने पर कुल 21,000 रुपये का ब्याज मिलेगा। मगर यहां न्यूनतम निवेश राशि 10,000 रुपये है।
डीसीबी बैंक
डीसीबी बैंक में खाता खोलने वाले वरिष्ठ नागरिकों को तीन साल की अवधि के लिए 6.45 प्रतिशत की ब्याज दर ऑफर की जा रही है। इस तरह 1 लाख रुपये की 3 साल की एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को 21,000 रुपये बतौर ब्याज मिलेंगे।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की तीन साल की एफडी पर ब्याज दर 6.25 प्रतिशत (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) है। इस तरह 1 लाख रुपये की जमा राशि पर तीन साल के भीतर वरिष्ठ नागरिक निवेशकों को 20 हजार रु का ब्याज मिलेगा।
क्यों घटी ब्याज दरें
एफडी ब्याज दरें पिछले दो सालों में खास तौर से कम हुई हैं। आरबीआी ने मई 2020 में कोविड-19 के दौरान रेपो रेट में कटौती की थी। इसके नतीजे में फिक्स्ड डिपॉजिट की भी दरें कम हुईं। एफडी निवेशक पिछले साल से रेपो रेट में फिर से बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आरबीआई ने ऐसा नहीं किया है। मगर कम ब्याज दर के बावजूद एफडी अभी भी उन लोगों के बीच लोकप्रिय हैं जो जोखिम फ्री निवेश करना चाहते हैं। ध्यान रहे कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरें आम तौर पर अधिक होती हैं।


Click it and Unblock the Notifications